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मध्‍य प्रदेश: गणतंत्र दिवस पर आमने-सामने आए दो पूर्व मुख्‍यमंत्री, हुई इस मुद्दे पर तीखी तकरार

Anurag Shrivastav | News18 Madhya Pradesh
Updated: January 26, 2020, 3:36 PM IST
मध्‍य प्रदेश: गणतंत्र दिवस पर आमने-सामने आए दो पूर्व मुख्‍यमंत्री, हुई इस मुद्दे पर तीखी तकरार
सीएए और एनआरसी पर दोनों पूर्व मुख्‍यमंत्रियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

एक पूर्व मुख्‍यमंत्री (Ex- Chief Minister) ने कहा, इस बार का गणतंत्र दिवस (Republic Day) है सबसे खास, वहीं दूसरे पूर्व मुख्‍यमंत्री ने संविधान (Constitution) के साथ खिलवाड़ की बात कही है.

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भोपाल (Bhopal): देश के 71वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मध्‍य प्रदेश के दो पूर्व मुख्‍यमंत्रियों के बीच एक मुद्दे पर आमने सामने आ गए. पहले पूर्व मुख्‍यमंत्री ने इस गणतंत्र दिवस को सबसे खास बताया है. वहीं, दूसरे पूर्व मुख्‍यमंत्री ने संविधान से खिलवाड़ की बात कही है. दरअसल, हम बात कर रहे हैं मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह और शिवराज सिंह चौहान की. दोनों पूर्व मुख्‍यमंत्रियों के बीच नागरिकता संशोधन कानून के मुद्दे पर जुबानी जंग छिड़ी हुई थी.

उल्‍लेखनीय है कि सीएए और एनआरसी के मुद्दे को लेकर देश भर में बहस छिड़ी हुई है. इस बहस के बीच आए 71वें गणतंत्र दिवस पर भी ये मुद्दा गरम रहा. कांग्रेस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर संविधान के खतरे में होने और इसके साथ खिलवाड़ का आरोप लगाया. है. कांग्रेस ने संविधान की सुरक्षा के लिए लोगों को सचेत रहने की जरुरत भी बताई है. इस मुद्दे पर वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता और सूबे में के मुख्‍यमंत्री रह चुके दिग्विजय सिंह ने कहा कि नागरिकता कानून को लेकर देश में नाराजगी बढ़ रही है.

उन्‍होंने कहा कि अब पूरी दुनिया इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर देख रही है.  दिग्विजय सिंह ने सीएए के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को यह कानून वापिस ले लेना चाहिए. वहीं कांग्रेस के आरोपों के बावजूद बीजेपी ने इस बार के गणतंत्र दिवस को सबसे खास बताया है. बीजेपी ने सीएए के मुद्दे पर विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया  है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मु्स्लिमों को विपक्ष के भ्रम से बाहर आना चाहिए.

शिवराज ने कहा कि नागरिकता कानून किसी नागरिकता लेने का कानून नही है. विपक्ष को देश की शांति के साथ खेल खेलना बंद करना चाहिए. बहरहाल आज पूरा देश जहां गणतंत्र के उल्लास में डूबा है. वहीं सीएए और एनआरसी के मुद्दे को लेकर जारी अंतहीन बहस का दौर भी जारी है. जिससे उबरना जल्द आसान नही दिख रहा है. यहीं कारण है कि 71 वें गणतंत्र दिवस पर संविधान की रक्षा और उसके खतरे में होने को लेकर बयानों का दौर जारी है.

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First published: January 26, 2020, 3:36 PM IST
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