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आजादी के लिए दी सबसे बड़ी कुर्बानी, 14 साल की उम्र में सीने पर खाई गोली, अब परिवार मांग रहा इतिहास में जगह

आजादी के लिए दी सबसे बड़ी कुर्बानी, 14 साल की उम्र में सीने पर खाई गोली, अब परिवार मांग रहा इतिहास में जगह

MP News: मंडला में शहीद हुए  उदयचंद्र जैन का परिवार अब इतिहास में उन्हें जगह देने की मांग कर रहा है.

MP News: मंडला में शहीद हुए उदयचंद्र जैन का परिवार अब इतिहास में उन्हें जगह देने की मांग कर रहा है.

Independence Day 2022 Special: मंडला (Mandla News) के उपनगरीय क्षेत्र महराजपुर निवासी उदय चंद्र जैन छात्र जीवन से ही आजादी के आंदोलन में कूद पड़े थे. वे 15 अगस्त 1942 के दिन मंडला में जुलूस निकाल रहे थे. इस दौरान अंग्रेजों ने लाठीचार्ज कर दिया. महज 14 साल की उम्र में वे शहीद हो गए. अब उनका परिवार सरकारी दस्तावेजों और इतिहास में उन्हें जगह देने की मांग कर रहा है.

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मंडला. देश को अंग्रेजों की कैद से आजाद हुए 75 साल बीत गए हैं. इसको लेकर हम अमृत महोत्सव मना रहे हैं, लेकिन जिनकी बदौलत आज हम ये उत्सव मना रहे है उनका ही इतिहास में और ना ही सरकारी कागजो में नाम है. दरअसल देश को आजाद हुए 75 साल बीत गए हैं, लेकिन उनके जुल्म के निशां जगह-जगह पर मौजूद हैं. भारत को आजादी दिलाने में मंडला जिले का भी बड़ा योगदान रहा है. सन 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन की आग पूरे देश में तेजी से फ़ैल रही थी. उस दौरान आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में भी लोग बढ़चढ़ कर आंदोलन में शामिल हो रहे थे. उस वक्त मंडला के उपनगरीय क्षेत्र महराजपुर निवासी उदय चंद्र जैन भी छात्र जीवन से ही आज़ादी को लेकर आंदोलन की आग में कूद पड़े.

आंदोलन की मशाल लेकर सैंकड़ों लोगों की मौजूदगी में उदयचंद्र जैन 15 अगस्त 1942 के दिन मंडला में जुलूस निकाल रहे थे कि तभी अंग्रेजों ने जुलूस को रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए लाठीचार्ज कर दिया, लेकिन आंदोलनकारियों का प्रदर्शन जारी रहा और जुलूस का कारवां आगे बढ़ते रहा. अंग्रेजों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने की धमकी दी. उस वक्त स्कूली छात्र रहे मंडला जिले के अमर शहीद उदय चन्द्र जिनकी उम्र उस वक्त 14 थी  वो अपनी कमीज का बटन खोलकर अंग्रेजी सैनिकों को ललकारने लगे. अंग्रेजी सेना ने बालक के सीने में गोली मारकर उन्हें शहीद कर दिया.

14 साल की उम्र में दी देश के लिए कुर्बानी

महज 14 साल की उम्र में देश की आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर उदय चन्द्र भारत के इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गए. लेकिन स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा उनकी उपेक्षा की जा रही है. प्रशासन ने शहीद उदय चंद्र की याद में स्मारक और चौक तो बनवा दिया है. लेकिन सरकारी दस्तावेजों और इतिहास में उनका कही नाम नही है.

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परिवार शहीद को मिले हुए ताम्रपत्र और दस्तावेजों को लेकर जिला प्रशासन से गुहार लगा रहा है कि उन्हे सरकारी कागजों और इतिहास में जगह दी जाए. वही जब जिला कलेक्टर के पास आवेदन लेकर परिजन पहुंचे तो मंडला कलेक्टर ने शहीद उदय चंद की शहादत संबंधी सुबूत ओर दस्तावेजों के साथ एक आवेदन मांगा है. जिला कलेक्टर ने आश्नवासन दिया है कि उचित कार्रवाई की जाएगी.

Tags: Mandla news, Mp news

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