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International Women's Day: हार नहीं मानी, लड़ाई लड़ी और उगा दिया घनघोर जंगल

मंडला की महिलाओं ने गांव वालों से लड़ाई कर जंगल उगा दिया.

मंडला की महिलाओं ने गांव वालों से लड़ाई कर जंगल उगा दिया.

International Women's Day: मंडला की कल्लो बाई और शालिनी कुछ अलग हैं. इन्हें पर्यावरण से बेहद प्यार है. जब इनके जंगल खत्म होने लगे तो चिंता हुई. दोनों ने मिलकर घनघोर जंगल उगा दिया.

  • Last Updated: March 8, 2021, 11:23 AM IST
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मंडला. हम और आप शायद पूरी जिंदगी में दस पेड़ भी नहीं लगा पाते होंगे. हमें पर्यावरण की चिंता तो है, लेकिन, उसे बचाने के रास्ते पर चलने की हमारी हिम्मत नहीं होती. लेकिन, कुछ महिलाएं ऐसी हैं, जो न केवल पेड़ लगा रही हैं, बल्कि उन्होंने पूरा का पूरा जंगल ही उगा दिया है.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर जानिए मंडला जिले के मनेरी गांव की कल्लो बाई और शालिनी के बारे में. ये दोनों पर्यावरण से इतना प्यार करती हैं कि इन्होंने 200 हैक्टेयर का घनघोर जंगल ही उगा दिया है. इन्होंने यहां करीब 2.50 लाख पेड़-पौधे लगा दिए. इनके मन में पल-पल ये सवाल उठता है कि अगर जंगल खत्म हो जाएंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ी क्या करेगी?

मन में बार-बार उठता सवाल- क्या होगा हमारी पीढ़ी का?



कल्लो बाई और शालिनी का जीवन संघर्ष से भरा है. कुछ साल पहले मनेरी के पास गोराम बाबा की पहाड़ी पर घनघोर जंगल हुआ करता था. लेकिन, ये पहाड़ी मंडला जिले में ऐसी जगह है, जहां अधिकांश लोग आज भी खाना बनाने के लिए चूल्हे का उपयोग करते हैं. चूल्हे पर खाना बनाने की वजह से लोग इसी पहाड़ी से लकड़ियां काटकर ले जाते थे. हालात यहां तक पहुंच गए कि पूरा का पूरा जंगल साफ हो गया. इन दोनों महिलाओं से ये देखा न गया. उनके मन में फिर वही सवाल था कि जंगल में पेड़ नहीं बचेंगे तो हमारी आने वाली पीढ़ी को क्या मिलेगा?
ये है संघर्ष की जबरदस्त कहानी

इस सोच के साथ दोनों ने पौध रोपण शुरू किया. ये काम इतना आसान भी नहीं था. क्योंकि, पौधा रोपण के दौरान महिलाओं को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा. सबसे बड़ी दिक्कत थी पूरे गांव की. गांव के लोग जंगल काटने पर उतारू थे. यहां तक कि दोनों पर झूठा मामला भी दर्ज करवा दिया गया. लेकिन, दोनों महिलाओ ने हिम्मत नहीं हारी और एक भी पेड़ को कटने नहीं दिया. इस वीरान पहाड़ी पर करीब 2.50 लाख पेड़-पौधे हैं. दोनों ने मिलकर पहाड़ी पर सागौन, साल, हर्रा, आंवला, बेल जैसे घने, छायादार कीमती पेड़ लगा दिए. अभी ये पेड़ 30 से 50 सेंटीमीटर मोटाई के हैं.
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