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जननी सुरक्षा योजना की खुली पोल, महिला की घर में हुई डिलीवरी

जननी सुरक्षा योजना की खुली पोल, महिला की घर में हुई डिलीवरी

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मध्य प्रदेश सरकार जननी सुरक्षा योजना और सुरक्षित प्रसव को लेकर कितने भी दावें कर ले लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग ही कहानी बयां करती है. प्रदेश के मंडला जिले के आदिवासी इलाके में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और जननी एक्सप्रेस की लापरवाही और पैसों की डिमांड की वजह से एक प्रसूता दर्द से तड़पती रही. रूपये नहीं होने के चलते महिला को वापस अपने घर लौटना पड़ा जहां उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया.

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मध्य प्रदेश सरकार जननी सुरक्षा योजना और सुरक्षित प्रसव को लेकर कितने भी दावें कर ले लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग ही कहानी बयां करती है. प्रदेश के मंडला जिले के आदिवासी इलाके में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और जननी एक्सप्रेस की लापरवाही और पैसों की डिमांड की वजह से एक प्रसूता दर्द से तड़पती रही. रूपये नहीं होने के चलते महिला को वापस अपने घर लौटना पड़ा जहां उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया.

जिले में आदिवासी बाहुल्य इलाकों में जननी सुरक्षा योजना एक मजाक बनकर रह गयी है. मवई के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अस्पताल प्रबंधन का क्रूर चेहरा सामने आया है. यहां देर रात प्रसव पीड़ा से तड़पती आदिवासी महिला जब अस्पताल पहुंची तो वहां मौजूद स्टाफ ने उसे भर्ती कर इलाज़ करने की बजाए मंडला जाने की सलाह दे डाली. दर्द से तड़पती महिला मंडला जाने को तैयार हुई तो जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस के कर्ताधर्ता रुपयों की मांग करने लगे. रूपये नहीं होने के चलते दर्द से तड़प रही महिला को परिजन वापस अपने घर ले आये जहां उसने जुड़वाँ बच्चो को जन्म दिया.

महिला ने खुलासा किया है कि पिछले बार भी प्रसव पीड़ा के दौरान उसे मंडला जिला चिकित्सालय रैफर किया गया था. मंडला जिला चिकित्सालय से उसे जबलपुर रैफर कर दिया गया था. जबलपुर पहुंचने के पहले ही रास्ते में डिलेवरी हो गई जिसमें मृत बच्चा पैदा हुआ था.

मवई से मंडला की दूरी 120 किलोमीटर है. मंडला से जबलपुर की दूरी करीब 100 किलोमीटर है. ऐसे में किसी प्रसूता को 200 किलोमीटर का सफर कराया जायेगा तो प्रसूता की हालत का अंदाज़ा बड़ी आसानी से लगाया जा सकता है.

स्थानीय लोगो की माने तो मवई स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव की तमाम सुविधाएं होने के बाद भी पीड़ितों को मंडला जिलाचिकित्सालय रैफर कर दिया जाता है. अस्पताल में प्रसूताओं को नि:शुल्क लाने और लेकर जाने के लिए हर समय मौजूद जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस के संचालक गरीब आदिवासियों से रुपयों की मांग करते हैं.

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