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MP: कलेक्टर हर्षिका सिंह ने बदल दी मंडला की तस्वीर, अब बना देश का पहला आदिवासी साक्षर जिला

MP: कलेक्टर हर्षिका सिंह ने बदल दी मंडला की तस्वीर, अब बना देश का पहला आदिवासी साक्षर जिला

मंडला कलेक्टर का दावा है कि अब मंडला पूर्ण रूप से कार्यात्मक साक्षर जिला बन गया है.

मंडला कलेक्टर का दावा है कि अब मंडला पूर्ण रूप से कार्यात्मक साक्षर जिला बन गया है.

मध्यप्रदेश का मंडला जिला देश का पहला आदिवासी साक्षर जिला बन गया है. इसका श्रेय जिले की कलेक्टर हर्षिका सिंह को जाता है. खाद्य मंत्री बिसाहू लाल ने महात्मा गांधी स्टेडियम में इसकी घोषणा की है. मंत्री बिसाहू लाल ने कहा कि मंडला पहला पूर्ण कार्यात्मक आदिवासी साक्षर जिला बन गया है. मंडला जिले में साल 2011 के सर्वे अनुसार मंडला जिले में साक्षरता का प्रतिशत 68 था. जुलाई 2020 में हुए सर्वे के अनुसार मंडला जिले में लगभग सवा दो लाख व्यक्ति साक्षर नहीं थे. जिसमें ज्यादातर लोगों वनांचल और आदिवासी लोग थे.

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मंडला. मध्यप्रदेश के मंडला कलेक्टर हर्षिका सिंह ने अपनी लगन और प्रयास से दो साल में मंडला जिले को देश का पहला आदिवासी साक्षर जिला बना दिया है. जिसकी घोषणा खाद्य मंत्री बिसाहू लाल ने महात्मा गांधी स्टेडियम से करते हुए कहा कि मंडला पहला पूर्ण कार्यात्मक आदिवासी साक्षर जिला बन गया है. इसके साथ ही मंत्री ने पूरे जिले वासियों को निक्षरता से आजादी की शपथ भी दिलाई. कार्यात्मक आदिवासी साक्षर इसका मतलब यह हुआ कि यहां के सभी अनपढ़ लोग अब अपना नाम लिख सकते है. इतना ही नहीं गिनती लिखना व अ, आ, इ, ई लिखना पढना जानते हैं.

दरअसल मंडला जिले में साल 2011 के सर्वे अनुसार मंडला जिले में साक्षरता का प्रतिशत 68 था. जुलाई 2020 में हुए सर्वे के अनुसार मंडला जिले में लगभग सवा दो लाख व्यक्ति साक्षर नहीं थे. जिसमें ज्यादातर लोगों वनांचल और आदिवासी लोग थे. जो कि मंडला कलेक्टर के सामने हर जनसुनवाई में बड़ी संख्या में पहुंचते और सिर्फ यही बताते थे कि हमारे खाते से धोखाधड़ी करके किसी ने पैसा निकाल लिया है. जिसके बाद कलेक्टर ने सोचा ये सब इनके साथ निरक्षर होने के कारण हो रहा है.

लोगों के साथ बैंक से पैसे निकालने आदि कार्यों में धोखाधड़ी की जाती थी. फिर क्या था, कलेक्टर ने लोगों को निरक्षरता से आजादी दिलाने की ठानी और चला दिया निरक्षरता से आजादी अभियान. जिसके लिए उन्होंने कई नवाचार करते हुए इस सामाजिक कार्यक्रम में महिला और बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, आंगनवाड़ी व सामाजिक कार्यकर्ताओं के सात ही गांव के पढ़े लिखे लोगों को भी जोड़ा और उनसे सहयोग भी लिया.

बुजुर्गों को साक्षर बनाने का उठाया बीड़ा
इसके लिए उन्होंने सबसे पहले बुजुर्ग महिलाओं और पुरुषों को साक्षर बनाने का बीड़ा उठाया. आलम ये हुआ कि आज दो साल बाद पूरा जिला कार्यात्मक आदिवासी साक्षर बन गया. समय मिलते ही इसके लिए मंडला कलेक्टर हर्षिका सिंह खुद भी लोगों को पढ़ाने के लिए वनांचल क्षेत्र में गई थी. मंडला कलेक्टर का दावा है कि अब मंडला पूर्ण रूप से कार्यात्मक साक्षर जिला बन गया है. इसका मतलब यह हुआ कि यहां के सभी लोग अब अपना नाम लिख सकते हैं और गिनती लिखना व पढ़ना जानते हैं. ऐसा करने वाला मंडला पहला आदिवासी जिला बन गया है. अब इसके आगे भी लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाने का सिलसिला जारी रहेगा. फिलहाल मंडला साक्षरता के पहले पायदान को पार कर गया है.

क्या बोलीं कलेक्टर

कलेक्टर हर्षिका सिंह ने इस उपलब्धि को लेकर कहा कि कार्यात्मक रूप से जिला साक्षर हो गया है. इसका मतलब है कि सभी लोग अपना नाम लिख लेते हैं. साथ ही अक्षरों का भी ज्ञान लोगों को हो गया है. लोगों को गिनती करनी भी आती है. देश के पहले जिले पर कलेक्टर ने कहा कि हालांकि ऐसा कोई सर्वे हमारे पास नहीं हैं लेकिन देश के अन्य आदिवासी जिलों से आगे बढ़कर यह काम मंडला में देखने को मिला है.

Tags: Madhya pradesh news, Mandla news

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