MP: गरीबों को 3 साल पुराना चावल देने के मामले में राजनीति शुरू, कांग्रेस ने की कार्रवाई की मांग
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MP: गरीबों को 3 साल पुराना चावल देने के मामले में राजनीति शुरू, कांग्रेस ने की कार्रवाई की मांग
चावल खरीदी से लेकर सप्लाई तक में कई खामियां हैं. कई स्तर पर चूक होना सामने आ रहा है.

कांग्रेस के आरोप पर बीजेपी ने भी जवाबी हमला बोला है. बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल (Rajneesh Aggarwal) ने कहा है कि यदि चावल खरीदी 2 से 3 साल पुरानी थी तो 15 महीने तक कांग्रेस की सरकार इस मामले में चुप क्यों रही.

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भोपाल. मध्य प्रदेश के आदिवासी जिले मंडला और बालाघाट (Mandla and Balaghat) में 'जानवरों वाला चावल' इंसानों को बांटने के मामले पर छिड़ी सियासत दिन-ब-दिन गर्म होती जा रही है. प्रदेश में अब चावल खरीदी के मामले को लेकर बीजेपी और कांग्रेस (BJP and Congress) आमने-सामने आ गई है. कांग्रेस ने बीजेपी के उन सभी आरोपों पर केंद्र सरकार की रिपोर्ट का एक पेज जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि सैंपल लिए गए चावल दो से तीन साल पुराना था. केंद्र ने अपनी रिपोर्ट में यह माना है कि पुराने चावल को रिसाइकल कर राशन दुकानों तक सप्लाई करने का काम हुआ है. साथ ही केंद्र ने अपनी रिपोर्ट में राज्य सरकार को चावल खरीदी में शामिल रही कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने और चावल (Rice) खरीदी से लेकर जिलों में वितरण तक जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है.

कांग्रेस ने इसी का हवाला देते हुए बीजेपी पर जमकर हमला बोला है. कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने कहा है कि केंद्र सरकार की रिपोर्ट में साफ तौर पर इस बात का उल्लेख है कि मंडला और बालाघाट जिले में पोल्ट्री ग्रेड का चावल दो से तीन साल पुराना था. जब प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी और ऐसे में बीजेपी सरकार की जिम्मेदारी बनती है. और ऐसे में अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए कांग्रेस के 15 महीने की सरकार पर आरोप लगाना ठीक नहीं है. कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने चावल बांटने के मामले में जूडिशियल इंक्वायरी की मांग की है.

कांग्रेस के आरोप पर बीजेपी ने भी जवाबी हमला बोला है
वहीं, कांग्रेस के आरोप पर बीजेपी ने भी जवाबी हमला बोला है. बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा है कि यदि चावल खरीदी 2 से 3 साल पुरानी थी तो 15 महीने तक कांग्रेस की सरकार इस मामले में चुप क्यों रही. क्यों किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई. बीजेपी प्रवक्ता के मुताबिक, चावल खरीदी का पूरा गड़बड़झाला पूर्व की कांग्रेस सरकार में हुआ है. 15 महीने तक सत्ता में रहने के बाद भी गड़बड़ी को रोकने में कांग्रेस सरकार विफल रही. अपनी गलतियों का ठीकरा बीजेपी पर फोरना ठीक नहीं है. केंद्र सरकार के संज्ञान में मामला आने के बाद शिवराज सरकार ने पूरे मामले में जांच के आदेश देते हुए कार्रवाई की है.
 चावल खरीदी से लेकर सप्लाई तक में कई खामियां हैं


बहरहाल, चावल खरीदी से लेकर सप्लाई तक में कई खामियां हैं. कई स्तर पर चूक होना सामने आ रहा है. और पूरा मामला इस बात के भी संकेत देता है कि चावल खरीदी के मामले में ऊपर से लेकर मैदानी अमले तक मिलीभगत के जरिए बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया है. बहरहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है. और उसी के बाद पूरा सच निकल कर सामने आएगा. लेकिन चावल खरीदी से लेकर सप्लाई और बांटने तक के मामले को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी संग्राम मचा हुआ है.
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