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26 जनवरी से इस स्कूल को शिक्षकों का इंतजार, नौ दिन से लगे हैं ताले

26 जनवरी से इस स्कूल को शिक्षकों का इंतजार, नौ दिन से लगे हैं ताले

शासन लाख दावें करे, लेकिन मध्यप्रदेश के कुछ ऐसे भी गांव है जो आज भी शिक्षा व्यवस्थाओं से वंचित बने हुए हैं। ऐसा ही गांव है पखवार जहां अव्यवस्थाओं से नाराज ग्रामीणों ने शासकीय स्कूल में ताला जड़ दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि जब तक स्कूल में व्यवस्था में सुधार नहीं होगा तब तक स्कूल में तालाबंदी रहेगी। इस स्कूल में दो शिक्षक पदस्थ है जो 26 जनवरी बाद से आए ही नहीं। वही तालाबंदी के नौ दिन हो चुके है लेकिन शिक्षा विभाग के अफसरों की नींद इसके बाद भी नहीं खुली है।

शासन लाख दावें करे, लेकिन मध्यप्रदेश के कुछ ऐसे भी गांव है जो आज भी शिक्षा व्यवस्थाओं से वंचित बने हुए हैं। ऐसा ही गांव है पखवार जहां अव्यवस्थाओं से नाराज ग्रामीणों ने शासकीय स्कूल में ताला जड़ दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि जब तक स्कूल में व्यवस्था में सुधार नहीं होगा तब तक स्कूल में तालाबंदी रहेगी। इस स्कूल में दो शिक्षक पदस्थ है जो 26 जनवरी बाद से आए ही नहीं। वही तालाबंदी के नौ दिन हो चुके है लेकिन शिक्षा विभाग के अफसरों की नींद इसके बाद भी नहीं खुली है।

शासन लाख दावें करे, लेकिन मध्यप्रदेश के कुछ ऐसे भी गांव है जो आज भी शिक्षा व्यवस्थाओं से वंचित बने हुए हैं। ऐसा ही गांव है पखवार जहां अव्यवस्थाओं से नाराज ग्रामीणों ने शासकीय स्कूल में ताला जड़ दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि जब तक स्कूल में व्यवस्था में सुधार नहीं होगा तब तक स्कूल में तालाबंदी रहेगी। इस स्कूल में दो शिक्षक पदस्थ है जो 26 जनवरी बाद से आए ही नहीं। वही तालाबंदी के नौ दिन हो चुके है लेकिन शिक्षा विभाग के अफसरों की नींद इसके बाद भी नहीं खुली है।

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शासन लाख दावें करे, लेकिन मध्यप्रदेश के कुछ ऐसे भी गांव है जो आज भी शिक्षा व्यवस्थाओं से वंचित बने हुए हैं। ऐसा ही गांव है पखवार जहां अव्यवस्थाओं से नाराज ग्रामीणों ने शासकीय स्कूल में ताला जड़ दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि जब तक स्कूल में व्यवस्था में सुधार नहीं होगा तब तक स्कूल में तालाबंदी रहेगी। इस स्कूल में दो शिक्षक पदस्थ है जो 26 जनवरी बाद से आए ही नहीं। वही तालाबंदी के नौ दिन हो चुके है लेकिन शिक्षा विभाग के अफसरों की नींद इसके बाद भी नहीं खुली है।

नाराज ग्रामीण ने स्कूल पर डाला ताला:

जिला मुख्यालय से 132 किमी दूर पखवार ग्रामपंचायत के वनग्राम सठिया के प्राथमिक शाला में शिक्षकों की गैर मौजूदगी के चलते आक्रोशित ग्रामीणों ने स्कूल में ताला जड दिया है। स्कूल में ताला लगे होने के नौ दिन बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को छात्रों के भविष्य की कोई परवाह नही है।

आखिरी बार शिक्षक 26 जनवरी को आए थे:

ग्रामीणों की मानें तो आखिरी बार शिक्षक 26 जनवरी को स्कूल आये थे जिसके बाद शिक्षकों का कोई अता पता नही है। हैरत की बात यह है कि आगामी दिनों में प्राथमिक शालाओं में वार्षिक परीक्षा होने वाली है, लेकिन शिक्षक महीनों से लापता है। बच्चे रोज शिक्षकों के इंतजार में स्कूल आते थे मगर अब स्कूल में ताला जड़े होने के कारण निराश होकर घर को लौट जाते हैं। शिक्षकों की मनमानी की शिकायत ग्रामीणों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से कई बार की है, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।

अब तक नहीं पहुंचा अधिकारी सुध लेने:

किसी प्रकार की कार्यवाही नही होते देख तंग आकर ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत मे प्रस्ताव पारित कर स्कूल में तालाबंदी करने का फैसला लिया। इसके बाद तालाबंदी करने की लिखित जानकारी अधिकारियों को दी लेकिन नौ दिन गुजरने के बाद भी स्कूल की सुध लेने कोई अधिकारी मौके पर नही पहुंचा है।

नहीं आते शिक्षक स्कूल:

गौरतलब यह है कि सठिया स्कूल में दो नियमित शिक्षकों की पदस्थापना है। दोनों शिक्षक छोटेलाल मरावी और ब्राजबहादुर आर्मो को शासन से हर महीने आच्छा खासा वेतन मिलता है, लेकिन ये शिक्षक महीनों से स्कूल नही आ रहे है।

बड़ा वेतन लेने के बावजूद शिक्षकों की अनदेखी:

ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षकों का विकासखंड शिक्षाधिकारी और कार्यालय के बाबुओं से सांठगाठ है। इसलिये शिक्षक महीनों स्कूल नहीं आते और उन्हें हर महीने वेतन मिल जाता है। विकासखंड के शिक्षा अधिकारी जांच के बाद शिक्षकों के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही और वेतन रोकने की बात कही।

प्रदेश सरकार ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिये करोडों रूपये खर्च कर तरह-तरह की योजनाएं संचालित करने करती है। स्कूल चलें हम, सर्वशिक्षा अभियान, सब पढें-सब बढें जैसी योजनाओं का प्रदेशवासियों को खासा फायदा पहुंचने के दावे किए जाते हैं। लेकिन आज भी ऐसे कई गांवों के सरकारी स्कूल हैं जहां इन सरकारी अभियानों की योजना केवल कागजों तक सिमट कर रह गई है।

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