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दीपावली और धनतेरस में इस राशि के लोगों को होगा बंपर फायदा, जानिए क्या कहते हैं ग्रह-नक्षत्र

Narendra Dhanotiya | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 20, 2019, 8:27 PM IST
दीपावली और धनतेरस में इस राशि के लोगों को होगा बंपर फायदा, जानिए क्या कहते हैं ग्रह-नक्षत्र
इस बार दीपावली पर बनेगा ये खास शुभ संयोग.

दीपावली (Deepawali) का उत्‍सव हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है. जबकि मंदसौर के ज्योतिर्विद रविशराय गौड़ (Jyotirvid Ravisrai Gaur) के मुताबिक इस बार यह पर्व कुछ राशियों (zodiac signs) के लिए खास फायदेमंद साबित होगा. साथ ही उन्‍होंने खरीदारी और निवेश के शुभ अवसर भी बताए हैं.

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मंदसौर. दीपावली (Deepawali) पर 'दीपदान' से शारीरिक एवं आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है. जहां सूर्य (Sun) का प्रकाश नहीं पहुंच सकता है, वहां दीपक का प्रकाश पहुंच जाता है. दीपक को सूर्य का भाग 'सूर्यांश संभवो दीप:' कहा जाता है. भगवान की पूजा और त्‍योहार उत्‍सव हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है. हमें अच्छे कार्यों को करने के प्रयासों के लिए शक्ति देता है यानी देवत्व के करीब लाता है. घर के चारों ओर दिये प्रज्वलित किए जाते हैं. मंदसौर के ज्योतिर्विद रविशराय गौड़ (Jyotirvid Ravisrai Gaur) ने बताया कि भगवान श्री राम अपने घर अयोध्या लौटते हैं तो पूरे राज्य के लोग उनके आने की खुशी में रात्रि के समय दीप जलाते हैं और खुशियां मनाते हैं. तब से यह दिन दीपावली के नाम से जाना जाता है. जबकि इस दौरान कई राशियों (zodiac signs) पर खास प्रभाव रहेगा. वहीं इस बार धनतेरस (Dhanteras)  पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. इस योग में खरीदी करना शुभ रहेगा.

ये हैं अन्‍य मान्‍यताएं
>>महाभारत के अनुसार इसी कार्तिक अमावस्या को वो 5 पांडव (युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव) 13 वर्ष के वनवास से अपने राज्य लौटे थे. उनके लौटने के खुशी में उनके राज्य के लोगों नें दीप जला कर खुशियां मनाई थी.
>>सिखों के 6वें गुरु गोविंद सिंह सहित 52 राजाओं को ग्वालियर के किले में बंदी बनाया था. गुरू गोविंद सिंह के कहने पर राजाओं को भी कैद से रिहाई मिली थी. इसलिए इस त्योहार को सिख समुदाय के लोग भी मनाते हैं.

>>भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया और सभी देवी कन्याओं को उसके चंगुल से छुड़ाया.
>>समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी ने सृष्टि में अवतार लिया था. उन्‍हें धन और समृद्धि की देवी माना जाता है. इसीलिए हर घर में दीप जलने के साथ-साथ हम माता लक्ष्मी की पूजा भी करतें हैं. यह भी दीपावली मनाने का एक मुख्य कारण है.
>>राजा विक्रमादित्य प्राचीन भारत के एक महान सम्राट थे. वे एक बहुत ही आदर्श राजा थे. इसी कार्तिक अमावस्या को उनका राज्याभिषेक हुआ था.
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>>वामन ने राजा बलि से दान में तीन कदम भूमि मांग ली और विराट रूप लेकर तीनों लोक ले लिए. इसके बाद सुतल का राज्य बलि को प्रदान किया. सुतल का राज्य जब बलि को मिला तब वहां उत्सव मनाया गया, तब से दीपावली की शुरुआत हुई.
>>एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था. इसी दिन से दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है.

ओर भी हैं कई कारण दीपोत्सव मनाने के
>>इस बार दीपावली के पावन पर्व से पूर्व कई दिव्य योग बन रहे हैं, जिससे यह और अत्यधिक लाभप्रद हो रहा है यह दीपावली पर्व.
>>खरीदारी का महामुहूर्त पुष्य नक्षत्र दीपावली के पूर्व दो दिन रहेगा.
>>साथ ही बन रहा है लक्ष्मीनारायण योग.
>>कई वर्षों पश्‍चात दीपावली के पूर्व खरीदी के शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, इस कारण दीपावली पर बाजारों में अच्छी रौनक रहेगी. खरीदारी का महामुहूर्त पुष्य नक्षत्र दो दिन रहेगा. यह मुहूर्त 21 अक्टूबर से प्रारंभ होकर मंगलवार की शाम 4.45 बजे तक रहेगा. इसके साथ ही दोनों दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा. इसके चलते वाहन, भूमि, भवन, एवं कृषि क्षेत्र के लिए यह शुभ माना जा रहा है.
>>दीपावली के पूर्व पुष्य नक्षत्र में की गई प्रत्येक वस्तु की खरीदारी अक्षय फल देती है. लाभ प्रद रहेगी जो लंबे अरसे तक चलेगी. पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है, जो दीर्घ काल तक रहने वाला ग्रह है. इसलिए इस नक्षत्र में की गई खरीदी लंबे समय तक साथ रहती है.

खरीदारी का महामुहूर्त पुष्य नक्षत्र दीपावली के पूर्व दो दिन रहेगा


>>21 अक्टूबर को सोम पुष्य के शुभ योग में सोना, चांदी और अन्य कीमती चीजों की खरीदी करना उत्तम रहेगा. वहीं 22 अक्टूबर यानी मंगल पुष्य को भूमि, मकान, धातु की खरीदी के लिए श्रेष्ठ समय है.
>>अंक ज्योतिष के हिसाब से भी शुभ पुष्य नक्षत्र के दौरान चंद्रमा कर्क राशि में रहेगा, जो राशि क्रम में 4 नंबर पर है. पुष्य 8वां नक्षत्र है. अंक ज्योतिष में 4 और 8 अंक का स्वामी शनि है. इसलिए पुष्य स्वामी शनि, अंक ज्योतिष से भी दिनांक के स्वामी रहेंगे. इस तरह यह सुखद संयोग लाभ दिलाने वाला होगा.
>>धनतेरस की शाम को यमराज और भगवान धन्वन्तरि की पूजा करने का महत्व है. इसलिए ये पर्व 25 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा. इस बार धनतेरस पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. इस योग में खरीदी करना शुभ रहेगा.
>>सोम और भौम पुष्य नक्षत्र में शिवजी के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करके खरीदे गए आभूषण अथवा जमीन-जायदाद के कागजात अर्पित करें. दिवाली के दिन भी उन वस्तुओं को पूजा में अर्पित करने से घर में बरकत बढ़ेगी.
>>इस बार धनतेरस से पहले दो दिन तक पुष्य नक्षत्र के संयोग में खरीदारी कर सकेंगे. इस दौरान की गई हर खरीदी चिर स्थायी होगी.
>>इस मुहूर्त को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है. इस महामुहूर्त में किए गए सभी काम पूरे तो होते ही है, साथ ही बहुत जल्दी उनके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते है. इस मुहूर्त में हर काम सिद्घ हो जाते हैं.
>>खरीदी गई वस्तु प्राप्त चिरकाल तक शुभ फल प्रदान करती है.
>>कार्तिक कृष्ण पक्ष की 21 अक्टूबर सोमवार की शाम 5.31 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र है. इसके पश्चात पुष्य नक्षत्र लग रहा है जो सोमवार को शाम 5.35 बजे से पुष्य नक्षत्र का आरंभ होगा और मंगलवार को शाम 4.45 बजे तक रहेगा. 23 घंटे का पुष्य नक्षत्र प्रभावकारी है.
>>शाम का समय प्रदोष काल होता है और इस समय पुष्य नक्षत्र लग रहा है. अतः यह सोम पुष्य योग होगा. पुष्य नक्षत्र जो है वह शनि प्रधान नक्षत्र है लेकिन उसकी प्रकृति बृहस्पति, गुरु जैसी होती है. पुष्य को अमरेज्य भी कहा जाता है अर्थात वह नक्षत्र जिसमें खरीदी गई हर वस्तु अमरता को प्राप्त करती है.
>>पुष्यनक्षत्र का नक्षत्र सम्राट मना गया गया है. इसके स्वामी शनि तथा उप स्वामी बृहस्पति हैं. पुष्य नक्षत्र का प्रभाव शनि तथा बृहस्पति से जुड़े क्षेत्रों पर दिखाई देगा. सोमवार व मंगलवार को यह नक्षत्र होने से चंद्र तथा मंगल का क्षेत्र में भी उठाव आने से बाजार में तेजी नजर आएगी.

ये बन रहे है दिव्य संयोग?
21 अक्टूबर- सोम पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि.
22 अक्टूबर- मंगल पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि.
25 अक्टूबर- धनतेरस और सर्वार्थ सिद्धि.
27 अक्टूबर- दीपावली
28 अक्टूबर- गोवर्धनपूजा
29 अक्टूबर- भाईदूज

दीपावली पर राशियों पर रहेगा यह प्रभाव
>>मेष- कार्य रुके हुए थे, वे पूरे होने लगेंगे. व्यापार और नौकरी में लाभ प्राप्त होगा. इष्ट मित्रों के सहयोग से मन प्रसन्न होगा.
>>वृष- पराक्रम में वृद्धि, जिस भी कार्य में आपके पराक्रम के बल पर सफलता मिलनी होगी. धैर्य रखना अति आवश्यक है. लेन-देन के मामलों में भी सतर्कता जरूरी है. सुकून प्राप्त होगा. मन पर दबाव कम रहेगा.
>>मिथुन- धनआगमन अथवा धन आने के मार्ग की रुकावटें दूर होंगी. मान-प्रतिष्ठा एवं कार्य कुशलता से संतोष प्रदान करेगा.
>>कर्क- नए कार्यों को क्रियान्वित करने का योग है. धन लाभ, आशानुकूल सफलता, लाभदायक योजना की प्राप्ति और इष्ट मित्रों का सहयोग आपके मनोबल को ऊंचा रखेगा. अनुकूल समय का लाभ अवश्य उठाएं.

>>सिंह - खर्च सोच-विचार कर ही करें अन्यथा हानि उठानी पड़ सकती है. प्रयास और प्रयत्न की सार्थकता के बावजूद महत्वपूर्ण कार्यों में विलंब हो सकता है. धन का लाभ होने से लंबित समस्याएं दूर होंगी. व्यापार में नई योजनाएं सफल होंगी और परिवार की समस्याएं सुलझेंगी.
>>कन्या- इष्ट मित्रों के सहयोग से लाभ प्राप्त होगा. जबकि विचाराधीन योजनाओं को क्रियान्वित करने का प्रयास करें. व्यवसायिक क्षमता का विस्तार होगा. प्रतिकूल परिस्थिति आएगी जिसका मुकाबला करना ही आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगा.
>>तुला- तेजी से आपके कार्य बनेंगे. समय आपके साथ है. क्रियान्वित किए सभी कार्य सफलता प्रदान करेंगे. नई योजनाएं फलीभूत होंगी. लेन-देन के मामले में सतर्कता रखनी होगी, स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतें.
>>वृश्चिक- खुशियों की सौगात. भाग्य का आपको भरपूर साथ प्राप्त होगा. कार्यों में सफलता, मन में उत्साह, धन का लाभ, आय के नवीन साधन और रुके हुए सभी कार्य पूर्ण होंगे. मनोबल ऊंचा रहेगा. इससे आपके कार्य करने की क्षमता में वृद्धि होगी. नौकरी करने वालों को नौकरी में पदोन्नति, व्यापारियों को व्यापार में लाभ और समीप-दूर की यात्राएं लाभदायक रहेंगी.
>>धनु- वाहन सावधानीपूर्वक चलाएं. स्वास्थ्य के प्रति भी सचेत रहने की आवश्यकता है. भाग्य का साथ मिलेगा, मन भटकेगा नहीं और कार्यों को पूर्ण करने में लगेगा. लाभ अवश्य प्रदान होगा. अतः उत्साह बनाए रखें.
>>मकर- शुभ कार्यों में रुकावट, कार्य की प्रबलता रहेगी तथा भाग्य का साथ भी प्राप्त होगा. शारीरिक शिथिलता एवं मानसिक उलझनों से बचना ही आपके लिए अच्छा होगा. सुखद रहेगा और कुछ खास मिलेगा.
>>कुम्भ - मिश्रित फल. लाभ की आशाएं बलवती रहेंगी, शत्रुओं और रोगों से छुटकारा मिलेगा. मनोरंजन कार्यों में समय व्यतीत होगा और जीवनसाथी का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा. हालांकि यात्रा में सावधानी रखें.
>>मीन- पारिवारिक दृष्टिकोण से अति उत्तम रहेगा. दूर समीप की यात्राओं का योग बन रहा है जो लाभ प्रदान करेगा. मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, बिगड़े कार्य बनेंगे. सोचे हुए कार्य सम्पन्न होंगे और शत्रु निर्बल रहेंगे. स्वास्थ्य के प्रति ध्यान देने की आवश्यकता है. सुख-समृद्धि के साधन बढ़ेंगे, मान-प्रतिष्ठा एवं कार्य कुशलता से संतोष प्राप्त होगा.

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First published: October 20, 2019, 8:18 PM IST
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