जीवाजीराव शुगर मिल जमीन मामला : HC के आदेश के बाद तेज हुई राजनीतिक हलचल
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जीवाजीराव शुगर मिल जमीन मामला : HC के आदेश के बाद तेज हुई राजनीतिक हलचल
जीवाजीराव शुगर मिल

मध्‍यप्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने आंजना कंस्ट्रक्शन के पक्ष में जीवाजीराव शुगर मिल की जमीन का नामांतरण करने के आदेश दे दिए. इसके बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है.

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मंदसौर की जीवाजीराव शुगर मिल की बेशकीमती जमीन का नामांतरण करने के मध्‍यप्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच के आदेश के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. एक तरफ कांग्रेस के बड़े नेता भी इस जमीन की नीलामी को गलत बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा अब गरीबों का साथ देने की बात कर रही है. दरअसल लगभग 500 करोड़ रुपए कीमत की इस जमीन की नीलामी केवल सिंगल टेंडर में 5 करोड़ रुपए में कर दी गई थी. इसका नामांतरण रोकने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी.

शासन ने लीज पर दी थी जमीन
मध्‍यप्रदेश शासन ने  मंदसौर क्षेत्र की मशहूर जीवाजीराव शुगर मिल (दलौदा शुगर मिल) को कभी यह जमीन लीज पर दी थी. जब तक मिल चलता रहा, तब तक जमीन उसके आधिपत्य में रही. वर्ष 1994 में जीवाजीराव शुगर मिल हमेशा के लिए बंद हो गई. इसके बाद नियमानुसार यह जमीन शासन की हो जानी थी, लेकिन मिल पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के करोड़ों रुपए बकाया थे. इसके चलते मिल ने यह जमीन बैंक के पास बंधक रख दी थी.

बैंक ने कर 5 करोड़ में कर दी नीलाम
अपनी बकाया राशि की वसूली के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने एक विज्ञप्ति निकाली और यह जमीन नीलाम कर दी. आंजना कंस्ट्रक्शन ने अपने सिंगल टेंडर पर नीलामी में यह जमीन केवल 5 करोड़ में खरीद ली थी. यह कंपनी राजस्‍थान कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और विधायक उदयलाल आंजना की है.



विधानसभा में उठा था मामला
उस समय रतलाम जिले की जावरा सीट से विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेंद्र सिंह कालूखेड़ा ने यह मामला मध्‍यप्रदेश विधानसभा में उठाया था. उन्‍‍‍‍‍‍होंने कहा था कि करीब 500 करोड़ रुपए की यह जमीन 5 करोड़ रुपए में नीलाम कैसे कर दी गई. तब तत्कालीन उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा में यह कहा था कि इस मामले में एक समिति बनाई जाएगी और पूरे मामले की जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी.

नामांतरण रोकने  के लिए लगाई थी याचिका
उस समय तो प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन बाद में प्रशासन हरकत में आया और जमीन के नामांतरण पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई. तब तक बहुत देर हो चुकी थी और मध्‍यप्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने आंजना कंस्ट्रक्शन के पक्ष में जमीन का नामांतरण करने के आदेश दे दिए.

हाईकोर्ट की डबल बेंच के आदेश के बाद प्रशासन अब बैकफुट पर नजर आ रहा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उद्योग मंत्री नरेंद्र नाहटा ने इसे पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की कमजोरी बताया है. उन्होंने कहा कि सरकार की कमजोरी के कारण ही यह जमीन हाथ से निकल गई. वहीं भाजपा ने खुद को गरीबों के पक्ष में बताया है.

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