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साइंटिफिक एविडेंस ने मंदसौर गैंगरेप के दरिंदों के लिए पुख्ता की फांसी की सज़ा

साइंटिफिक एविडेंस ने मंदसौर गैंगरेप के दरिंदों के लिए पुख्ता की फांसी की सज़ा

सांकेतिक तस्वीर.

सांकेतिक तस्वीर.

दिल्ली के निर्भया कांड के बाद दूसरा मामला था. जिसने पूरे देश में गुस्से और आक्रोश की लहर पैदा कर दी थी. आरोपी इरफान और आसिफ पुलिस की गिरफ्त में तो आ चुके थे लेकिन उनके अपराध को पाक्सो एक्ट की विशेष अदालत में साबित करना इतना आसान नहीं था

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    मेरी भी 11 साल की दो जुड़़वा बेटियां हैं. उस 7 साल की मासूम के साथ हुई दरिंदगी और हैवानियत, मैं संवेदना के स्तर पर जाकर भी न सिर्फ महसूस कर रहा था बल्कि कई बार खुद को असहाय भी पा रहा था. यह कहना है मंदसौर एसपी मनोज कुमार सिंह का. जिन्होंने 56 दिन में गैंगरेप के जघन्य अपराधियों को फांसी की सज़ा दिलवाने तक अपनी ज़िम्मेदारी निभायी.

    पाक्सो एक्ट में साबित करना

    दरअसल यह दिल्ली के निर्भया कांड के बाद दूसरा मामला था. जिसने पूरे देश में गुस्से और आक्रोश की लहर पैदा कर दी थी. आरोपी इरफान और आसिफ पुलिस की गिरफ्त में तो आ चुके थे लेकिन उनके अपराध को पाक्सो एक्ट की विशेष अदालत में साबित करना इतना आसान नहीं था. पुलिस के लिए बड़ी समस्या सांप्रदायिक सद्भभाव बना रहे यह भी थी. किसी भी तरह हालात काबू में रहे और अपराधी सलाखों के पीछे जाए. इसलिए जिला प्रशासन और पुलिस को अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ी.

    एक चुनौती सद्भाव बना रहे.

    इरफान और आसिफ गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने दोनों वर्ग के नुमाइंदों को बुलाया और चर्चा की. कई लोगों के घरों में रातों रात दबिश डाल कर पत्थर और छोटे मोटे हथियार बरामद किए. मुस्लिम समुदाय ने जघन्य अपराध करने वालों का एक तरह से बहिष्कार की घोषणा की. इसका असर यह रहा कि माहौल शांत रहा. अपराध को साबित करने के लिए कई गवाह और सहयोगी सामने आ गए.

    कोई गवाह नहीं

    अधिकारी बताते हैं कि इसमें सबसे मुश्किल दो बातें थीं. एक तो बच्ची की उम्र और दूसरा किसी चश्मदीद गवाह का नहीं होना. इसलिए तय किया गया कि पूरी मेडिकल टीम साथ लेकर जितने भी साइंटिफिक एविडेंस हैं उन्हें पुख्ता किए जाए. एक स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम ऑफिसर सीएसी आरएन शुक्ला के नेतृत्व में बना दी गई. इसमें महिला इंस्पेक्टर्स भी शामिल थीं.

    94 लोगों से पूछताछ

    18 जुलाई को 350 पेज की चार्जशीट कोर्ट में पेश की गयी. 94 लोगों से पूछताछ के आधार पर इसे तैयार किया गया था. एसआईटी इंचार्ज सीएसपी शुक्ला बताते हैं कि घटना का पता चलते ही 24 घंटे के भीतर पुलिस ने झाड़ियों वाली उस जगह को पूरा कवर लिया. इससे फायदा यह हुआ कि वहां से बाल, ब्लड सेंपल और मिट्‌टी के टुकड़े तक बरामद कर लिए गए. चूंकि वह पूरा क्षेत्र लोगों की आवाजाही का नहीं था, इस कारण आसानी से फिंगर प्रिंट्स भी मिल गए. इसने पूरे प्रकरण को कानूनी तौर पर मज़बूत किया.

    भयावह दौर

    वह मासूम एक भयावह दौर से गुज़री थी. जहां उसका विजाइना और एनस एक हो गया था. मौका एक वारदात पर जितना भी लिक्विड था उसे डॉक्टर्स की टीम ने इक्ट्ठा किया और सबसे बड़े साक्ष्य के तौर पर पुलिस ने इसे कोर्ट में साबित किया. पुलिस किसी भी तकनीकी स्तर पर कमजोर न पड़े इसकी पूरी तैयारी कर ली थी.

    37 लोगों ने गवाही दी

    वह मासूम किस तरह ठीक होती है. वह कितना सहयोग कर पाती है इसका कोई भरोसा उस वक्त उसकी हालत देखकर नहीं कह सकते थे. जिंदगी उस पर मेहरबान रही और वह कोर्ट में अपने बयान दे पाई. बावजूद इसके पुलिस ने 37 लोगों की कोर्ट में गवाही करवाई. आखिरी गवाह के बतौर स्कूल के एक बच्चे का भी बयान हुआ जिसने उसे आखिरी बार स्कूल से जाते हुए देखा था.

    पहचान लिया

    सारे गवाह और सबूत के बाद जब उस मासूम ने उन दोनों गुनहगारों को कोर्ट के सामने पहचान लिया तब यकीन हो गया कि अब इन्हें फांसी की सज़ा से कोई रोक नहीं सकता.

    असर पूरे मंदसौर में 

    मंदसौर एसपी मनोजकुमार सिंह ने न्यूज 18 को बताया कि इस घटना का असर पूरे मंदसौर में है. हमने हर थाने में ऐसे लोगों को अब लिस्ट करना शुरू कर दिया है जो रात में अपने घर नहीं जाते हैं. उनके मां – बाप को बताया जा रहा है कि वे बच्चों पर ध्यान दें और उनसे पूछताछ करें. हम स्कूलों में भी पैरेंट्स टीचर्स मीटिंग में कह रहे हैं कि बेटियों को हर तरह की जानकारी दें. ताकि वे धोखे का शिकार न हो. बच्चों को स्कूल में देर तक कोई लेने नहीं आए तो स्कूल प्रशासन बच्चे के आईडी कार्ड पर दिए नंबर पर बात करे. एक तरह से सुरक्षित बचपन हमारा मकसद है.

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    Tags: Rape convict

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