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नवरात्रि : ऐसी है दुधाखेड़ी मंदिर की महिमा, देवी से आंख नहीं मिला पाते भक्त

मंदसौर में दुधाखेड़ी माताजी का प्राचीन मंदिर है. माना जाता है कि यहां लकवा के मरीज ठीक हो जाते हैं.

मंदसौर में दुधाखेड़ी माताजी का प्राचीन मंदिर है. माना जाता है कि यहां लकवा के मरीज ठीक हो जाते हैं.

Mandsaur. यहां दुधाखेड़ी माताजी का नाम से एक प्राचीन मंदिर बना हुआ है. यह इसलिए जाना जाता है क्योंकि यहां आने वाले लकवा ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

माना जाता है कि यहां लकवा के मरीज ठीक हो जाते हैं.
नवरात्रि के नौ दिनों में नौ अलग-अलग रूपों के दर्शन होते हैं.
महारानी अहिल्या देवी से लेकर कई राजाओं ने इस मंदिर में माथा टेका है.

मंदसौर. नवरात्रि का आज नौवां दिन है.  आज हम आपको बताते हैं मंदसौर के दुधाखेड़ी मां के मंदिर की महिमा. लोगों की मान्यता है कि यहां लकवा के मरीज ठीक हो जाते हैं. इसके पीछे रोचक कहानी है. कहते हैं एक लकड़हारा पेड़ काट रहा था. तभी एक पेड़ से दूध की धारा बह निकली और देवी वहां पर प्रकट हुईं उसी समय से इस जगह का नाम दुधाखेड़ी माताजी पड़ गया. यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. इसमें देवी पंचमुखी रूप में विराजित हैं. प्रतिमा के पास ही एक अखण्ड ज्योत जल रही है.

ऐतिहासिक दृष्टि से यहां 13 वीं सदी से निरंतर पूजा-अर्चना का प्रमाण मिलता है. इसके साथ ही मराठाकाल में लोकमाता अहिल्याबाई ने धर्मशाला बनवाई. कोटा के मुहासिब आला, झाला जालिम सिंह की यह आराध्या देवी रहीं. इन्होंने यहां धर्मशाला और ग्वालियर के राजा सिंधिया ने भी यहां धर्मशाला बनवाई. यहां हर दिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. लकवा बीमारी से पीड़ित यहां स्वास्थ्य लाभ लेते देखे जाते हैं.

नवरात्रि में दुधाखेड़ी देवी के नौ रूप
इस मंदिर में पहले बलि भी दी जाती थी लेकिन तकरीबन 40 साल पहले आकाशीय बिजली गिरने से बलि प्रथा हमेशा के लिए बंद हो गई. उसके बाद श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती चली गई. यहां दोनों नवरात्रि के समय मेला लगता है. धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से मालवा अंचल का यह बेजोड़ स्थल है.  दुधाखेड़ी देवी मंदिर भानपुरा से 12 कि. मी. दूर और गरोठ से 16 कि. मी. दूर स्थित है. ऐसा माना जाता है कि नवरात्रि के समय दुधाखेड़ी देवी के नौ रूप देखने को मिलते हैं. रोज नए रूप में देवी अपने भक्तों को दर्शन देती हैं. मान्यता है कि माता की मूर्ति इतनी चमत्कारी है. कोई भी भक्त उनसे आंख नहीं मिला पाता. यहां पर जबसे मंदिर बना है तब से एक अखण्ड जोत भी जल रही है. इस चमत्कार को देखने लोग दूर-दूर से आते हैं.

महारानी देवी अहिल्या ने बनवाया था मंदिर
इंदौर की महारानी अहिल्या देवी ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया था. बताया जाता है कि होलकर स्टेट की सेना जब अंग्रेजी सेना से परस्त होने लगीं, तब देवी अहिल्या ने दुधाखेड़ी माताजी के सामने आकर माथा टेका. माताजी ने स्वयं उन्हें खड़ग तलवार भेंट की. इसके बाद होलकर स्टेट की सेना ने अंग्रेजों को कोलकाता में जाकर हरा दिया.  झालावाड़ के पूर्व महाराजा जालिम सिंह भी यहां पर पूजा करने आते थे.

ऐसे दिए थे देवी ने दर्शन  
आज जहां आज माता का मन्दिर है वहां भयंकर जंगल था. उस जंगल में एक व्यक्ति पेड़ काट रहा था. उसी समय एक महिला की आवाज उसे सुनाई दी. महिला ने कहा हरे पेड़ काटना महापाप है. एक वन काटना 35 लाख मनुष्यों को मारने के बराबर है. लेकिन उसने पेड़ काटने बंद नहीं किए. फिर एक पेड़ से दो धाराएं बहने लगीं. एक खून की और एक दूध की धारा निकली. उस व्यक्ति ने पेड़ काटना बंद कर दिया. उसी समय पश्चिम की ओर से एक वृद्धा आई, उसने कहा बेटा वनों की पूजा करना चाहिए. उस आदमी ने हाथ जोड़े. जब आंखें खोलीं तो महिला वहां से गायब थी. जब मोड़ी वाले दुधा जी रावत ने बात सुनी तो वे भी उस वन में आए. कई लोगों ने इधर-उधर के गांवों से आकर उस वन में बह रही दुध की धार के दर्शन के किए. फिर वहां दुधाखेड़ी माता जी की मूर्ति की स्थापना की गई, धीरे-धीरे यह मंदिर प्रसिद्ध होता चला गया.

लकवा मरीजों की आस्था का केंद्र
महाराज यशवंतराव होलकर की एक तलवार देवी के मंदिर में आज भी रखी हुई है.  पास ही में एक धर्मशाला शिवाजी राव होलकर ने और दूसरी तुकोजी राव होलकर ने बनवाई थी. प्राचीन मान्यता अनुसार माता के दरबार में शारीरिक विकलांग (लकवा) एवं मानसिक व्याधियों से मुक्ति मिल जाती है. हर साल यहां नवरात्रि में चुनरी यात्रा का आयोजन किया जाता है. इसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं, जो 3 किलोमीटर लंबी चुनरी बर्ढ़िया गांव से लेकर दुधाखेड़ी पहुंचते हैं. मान्यता है कि लकवा रोग से पीड़ित मरीज यहां पर प्राचीन बावड़ी का पानी पीने और शरीर पर लगाने से ही ठीक हो जाते हैं.

लकवा मरीजों के लिए अस्पताल
दुधाखेड़ी माता जी का यह मंदिर बेहद प्राचीन है, मंदिर को अब भव्य स्वरूप दिया जा रहा है.  नया भवन तैयार हो रहा है. इसके अलावा यहां पर लकवा रोग से पीड़ित मरीजों के लिए फिजियोथैरेपी सेंटर और आधुनिक अस्पताल भी है. कलेक्टर गौतम सिंह ने बताया इसके अलावा यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अन्य बड़ी धर्मशालाओं का निर्माण भी किया जा रहा है. दुधाखेड़ी माताजी को धार्मिक पर्यटन का केंद्र बनाया जा रहा है. पहले चरण मे चालीस करोड़ की लागत से भव्य मंदिर बनाया जा रहा है.

Tags: Bhavani Devi, Madhya Pradsh News, Mandsaur news, Navratri

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