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Analysis: मंदसौर की रैली से क्या मालवा की चुनावी फिजा बदल गए पीएम मोदी?

Madhya Pradesh Election: मालवा वो धरती जिसने किसानों को बेहिसाब फसल तो दी है साथ उसने बीजेपी को बेहिसाब वोट भी दिए. लेकिन डेढ़ साल पहले हुए गोलीकांड ने सियासी समीकरण बदल कर रख दिए थे

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मंदसौर मालवा की वो धरती, जहां करीब डेढ़ साल पहले एक ऐसा आंदोलन हुआ जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया. यूं तो वो एक किसान आंदोलन था लेकिन जैसे-जैसे आंदोलन बढ़ा वो एक गोलीकांड में तब्दील होता चला गया. मालवा वो धरती जिसने किसानों को बेहिसाब फसल तो दी है साथ उसने बीजेपी को बेहिसाब वोट भी दिए. लेकिन डेढ़ साल पहले हुए गोलीकांड ने सियासी समीकरण बदल कर रख दिए थे. छह किसानों की मौत मध्य प्रदेश में ही नहीं देश में सियासत का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया. (इसे पढ़ें- PHOTOS: एक मैसेज से शुरू हुआ किसान आंदोलन कैसे बना था गोलीकांड)

मंदसौर में हुए गोलीकांड के डेढ़ साल होने का आए. 6 जून 2017 को मंदसौर में हुए किसानों के हिंसक प्रदर्शन में शिवराज सरकार बैकफुट पर आ गई थी. किसी ने नहीं सोचा था कि एसएमएस और सोशल मीडिया से शुरू हुआ किसान आंदोलन इतना खतरनाक रूप ले लेगा. उसके बाद पूरे देश में शिवराज सरकार की किरकिरी हुई. केंद्र सरकार ने भी मामले में चुप्पी साधे रखना ही मुनासिब समझा था. गोलीकांड ने शिवराज सरकार के किसान हितैषी चरित्र पर सवालिया निशान खड़े कर दिए थे.

इसी बीच कांग्रेस मालवा की धरती पर नजर गड़ाए हुई थी. मंदसौर नेताओं का राजनीतिक पर्यटन केंद्र बन चुका था. और फिर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के मंदसौर दौरे की पृष्ठिभूमि तैयार हो रही थी. गोलीकांड की बरसी पर मंदसौर पहुंचे राहुल गांधी ने एक ऐसा ऐलान कर दिया जिसने मध्य प्रदेश के किसानों का ध्यान खींच लिया. राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के दस दिन के अंदर किसानों का सारा कर्जा माफ़ किया जाएगा.

यूं तो चुनाव और राजनीति में ऐलान बहुत आम बात है लेकिन राहुल गांधी का ये ऐलान मंदसौर के किसानों के जख्मों पर मरहम लगाता हुआ दिखाई दे रहा था. राहुल गांधी उन छह किसानों के परिजनों से भी मिले जिन्होंने गोलीकांड में अपनी जान गंवा दी थी. परिजनों ने उस रैली में राहुल गांधी के साथ मंच भी साझा किया था.

राहुल गांधी की उस रैली को हुए छह महीने बीत चुके हैं. इतने समय में एक किसान अपनी एक फसल की बुवाई कर उसे काट भी लेता है. इतने समय में मंदसौर के बगल में बह रही सिवना नदी में पानी भी काफी बह गया. स्थान वही, मैदान वही, रैली वही लेकिन राहुल गांधी की जगह इस बार भारत के सियासत के एक और केंद्र बिंदु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे.

मोदी ने शुरुआत तो आधुनिक भारत के शिल्पी कहे जाने वाले सरदार पटेल और उनकी मूर्ति से की साथ ही मंदसौर के लोगों को गुजरात घूमने का निमंत्रण भी दे दिया लेकिन गोलीकांड के बाद के उपजे माहौल को शायद पीएम मोदी दिल्ली से बैठकर महसूस कर रहे थे इसलिए उनको देखने उमड़ी उत्साहित भीड़ को उन्होंने वही सुनाया जो वो सुनाना चाहते थे. अपने करीब आधे घंटे के संबोधन में पीएम मोदी ने किसान और कांग्रेस को केंद में रखा लेकिन गोलीकांड का जिक्र भीड़ से कोसों दूर रहा.

पीएम मोदी ने गांधी-नेहरू परिवार पर किसानों की अनदेखी करने का जमकर आरोप लगाया. राहुल गांधी और सोनिया गांधी की राजनीति पर कई बार प्रश्नचिन्ह उठाए. राहुल के मेड इन मंदसौर के ऐलान का कांग्रेस के घोषणा पत्र में शामिल ना होने पर तंज भी कसे, मध्य प्रदेश में बीजेपी की ध्वज पताका को पिछले 15 सालों से उठाए 'मामा शिवराज' की तरफदारी भी की. मंदसौर की उत्साही भीड़ जिससे वे बार-बार कांग्रेस को वोट ना करने की हामी भरवा रहे थे, उसे वोट की कीमत सूद सहित लौटाने का वादा कर गए.

मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में पीएम मोदी की इस रैली की चर्चाएं तो तेज हैं ही, लेकिन सवाल यह है कि मात्र चार दिन बचे चुनाव के लिए पीएम की यह रैली मंदसौर में बीजेपी के लिए कितनी निर्णायक साबित होगी.

यह पढ़ें- मंदसौर में PM मोदी- पटेल प्रधानमंत्री होते तो किसानों की हालत अच्छी होती

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