घाटों पर गंदगी और बदबूदार पानी, बस यही है अब शिवना की पहचान
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घाटों पर गंदगी और बदबूदार पानी, बस यही है अब शिवना की पहचान
शिवना में प्रदूषण

मंदसौर की जीवनदायिनी कही जाने वाली शिवना नदी दम तोड़ रही है. नदी में इतना प्रदूषण है कि उससे उठने वाली दुर्गंध से सब परेशान हैं. मंदसौर के सारे गंदे नालों का पानी बरसों से शिवना नदी में डाला जा रहा है.

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मंदसौर की जीवनदायिनी कही जाने वाली शिवना नदी दम तोड़ रही है. नदी में इतना प्रदूषण है कि उससे उठने वाली दुर्गंध से सब परेशान हैं. मंदसौर के सारे गंदे नालों का पानी बरसों से शिवना नदी में डाला जा रहा है.

मंदसौर को धार्मिक नगरी घोषित किया गया है. और शिवना नदी को पवित्रता हीर कहा जाता है. लेकिन इसमें पवित्रता कहीं-से-कहीं तक नज़र नहीं आती है. नदी तो निर्मल जल लेकर आती है लेकिन यहां आते ही उसमें शहर भर के नाले-नालियों का पानी डाल दिया जाता है. इसलिए शहर में प्रवेश करते ही नदी का पानी सड़ गया है, उसमें से दुर्गंध उठ रही है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत इसी दुर्गंध और प्रदूषित जल से होता है.

श्रद्धालु पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन करने से पहले घाट पर स्नान करते हैं लेकिन पानी इतना गंदा हो चुका है कि अब इसमें स्नान तो दूर, लोग निकलने से भी कतराने लगे हैं.



शिवना नदी की सफाई के लिए हर साल लाखों रुपए का बजट आता है. ये पैसा शुद्धीकऱण के लिए आता है. लेकिन नदी शुद्ध कैसे हो. पूरे शहर के नाले-नालियों का पानी इसमें बहाया जा रहा है. गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था बदलने के लिए कोई प्लान इनके पास नहीं है. नेता और अफसर सब बदलते रहते हैं लेकिन शिवना नदी का हाल कोई नहीं बदल रहा. (नरेन्द्र दडोतिया की रिपोर्ट)
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