मासूम की दर्दनाक कहानी बनी शॉर्ट फिल्म की प्रेरणा, दे रहे बेटी बचाओ का सन्देश

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के कलाकारों ने दो साल पहले मंदसौर में 5 साल की बालिका को कचरे में फेंके जाने की घटना से प्रेरित होकर बेटी बचाओ का संदेश देने के मकसद से मम नामक शॉर्ट फिल्म तैयार की. जिसे हाल ही में कलकत्ता में आयोजित इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट शॉर्ट फिल्म के अवार्ड से नवाजा गया.

ETV MP/Chhattisgarh
Updated: August 14, 2017, 5:33 PM IST
मासूम की दर्दनाक कहानी बनी शॉर्ट फिल्म की प्रेरणा, दे रहे बेटी बचाओ का सन्देश
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के कलाकारों ने दो साल पहले मंदसौर में 5 साल की बालिका को कचरे में फेंके जाने की घटना से प्रेरित होकर बेटी बचाओ का संदेश देने के मकसद से मम नामक शॉर्ट फिल्म तैयार की. जिसे हाल ही में कलकत्ता में आयोजित इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट शॉर्ट फिल्म के अवार्ड से नवाजा गया.
ETV MP/Chhattisgarh
Updated: August 14, 2017, 5:33 PM IST
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के कलाकारों ने दो साल पहले मंदसौर में 5 साल की बालिका को कचरे में फेंके जाने की घटना से प्रेरित होकर बेटी बचाओ का संदेश देने के मकसद से मम नामक शॉर्ट फिल्म तैयार की. जिसे हाल ही में कलकत्ता में आयोजित इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट शॉर्ट फिल्म के अवार्ड से नवाजा गया.

उत्साहित कलाकार अब आगे भी इसी तरह सामाजिक मुद्दों पर संदेश देने वाली शॉर्ट फिल्म बनाने की बात कह रहे हैं.

दो साल पहले मंदसौर जिले में 5 वर्षीय बालिका को राख में लपेट कर कचरे में फेंक दिया गया था, बगल से गुजर रही एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के वजह से बालिका की जान बच गई थी. इस घटना का प्रभाव बुरहानपुर के कलाकारों पर इतना असर कर गया कि उन्होने बेटी बचाओं का संदेश देने के मकसद से शॉर्ट फिल्म बनाने की ठान ली.

13 मिनट की मम नाम इस फिल्म में शहर की गुन मिहानी नामक 8 वर्षीय बालिका का लीड रोल है जो फिल्म में बिना मां की बच्ची है लेकिन ममत्व की भावना को वह अपनी स्कूल में सहपाठियों व शिक्षकों को बालिका को बचाने का संदेश देती नजर आ रही है.

हाल ही में कोलकता में आयोजित इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म को खूब सराहना मिली है. फेस्टिवल में मम फिल्म को बेस्ट शॉर्ट फिल्म के अवार्ड से नवाजा गया. अब 5 सितंबर को महाराष्ट्र के लोनावाला में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इस फिल्म का थियेटर प्रीमियर होगा. कलाकारों को उम्मीद है इस फेस्टिवल में भी फिल्म को पसंद किया जाएगा.

जानकारी के अनुसार देश में हर साल 60 हजार बच्चे लावारिस छोड़ दिए जाते हैं, जिन में 54 हजार के आस पास बालिकाएं होती हैं.
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