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करवा चौथ: 70 साल बाद बना शुभ संयोग, पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं को होगा फायदा

Narendra Dhanotiya | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 17, 2019, 11:36 AM IST
करवा चौथ: 70 साल बाद बना शुभ संयोग, पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं को होगा फायदा
इस बार खास है करवा चौथ का पर्व- ज्योतिर्विद रविशराय गौड़

इस बार करवा चौथ (Karva Chauth) पर 70 वर्ष बाद एक खास शुभ संयोग बन रहा है. मंदसौर (Mandsaur) के ज्योतिर्विद रविशराय गौड़ (Jyotirvid Ravisrai Gaur) के मुताबिक रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को खास फायदा होगा.

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मंदसौर. इस बार करवा चौथ (Karva Chauth) का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्‍योंकि 70 वर्ष बाद एक खास शुभ संयोग बन रहा है. इस बार रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग होना करवा चौथ को अधिक मंगलकारी बना रहा है. मंदसौर (Mandsaur) के ज्योतिर्विद रविशराय गौड़ (Jyotirvid Ravisrai Gaur) ने बताया कि रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से मार्कण्डेय और सत्याभामा योग इस करवा चौथ पर बन रहा है. पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत श्रेष्ठ है.

करवा चौथ का पर्व
>>17 अक्तूबर गुरुवार
>>करवा चौथ पूजा मुहूर्त-सायं 05:46 से 07:02.

>>चंद्रोदय- रात्रि 08:20
>>चतुर्थी तिथि आरंभ- 06:48 (17 अक्तूबर)
>>चतुर्थी तिथि समाप्त- 07:28 (18 अक्तूबर)
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करवा चौथ का व्रत
करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन मूल रूप से भगवान गणेश, मां गौरी और चंद्रमा की उपासना होती है. चंद्रमा को मन, आयु, सुख और शांति का कारक माना जाता है. इसलिए चंद्रमा की पूजा करके महिलाएं वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और पति की लम्बी आयु की कामना करती हैं.

पति की लंबी उम्र के लिए सुहागिनों को प्रार्थना के साथ इस मंत्र का उच्‍चारण करना चाहिए.

'ॐ नम: शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम।*
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥'


यही नहीं, करवा चौथ व्रत में पूरे शिव परिवार की पूजा होती है. साथ ही चतुर्थी स्वरूप करवा की भी पूजा होती है. इस दिन खासतौर पर श्री गणेश का पूजन होता है और उन्हें ही साक्षी मानकर व्रत शुरू किया जाता है. गणपति को चतुर्थी का अधिपति देव माना गया है. जबकि करवाचौथ व्रत का छान्दोग्योपनिषद, वामन पुराण, महाभारत एवं अन्य कई जगह ऋषियों के चिंतन में विवरण मिलता है.
पुराणों के अनुसार चंद्रमा नक्षत्रों में रोहिणी नक्षत्र को अत्यधिक प्रेम करता है. उसकी स्थिति इसी नक्षत्र पर होने से वह प्रेम प्रवर्धन की समृद्धि करने वाला योग निर्मित कर रहा है. यह व्रत सुहागिनें अपने पति के मंगल और समृद्धि के लिए करती हैं.

द्रौपती ने किया था व्रत
पांडवों पर घोर विपत्ति का समय आया, तब द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण का आह्वान किया. श्रीकृष्ण ने कहा था कि यदि तुम भगवान शिव के बताए हुए व्रत करवा चौथ को आस्था और विश्वास के साथ संपन्न करोगी, तो समस्त कष्टों से मुक्त हो जाओगी. समृद्धि स्वयं ही प्राप्त हो जाएगी. मगर ध्यान रखना व्रत के दौरान भोजन, पानी वर्जित है.

ये है पौराणिक मान्‍यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवताओं की पत्नियों ने उनकी मंगलकामना और असुरों पर जीत पाने के लिए करवा चौथ जैसा व्रत रखा था, वहीं एक बार असुरों और देवों में युद्ध छिड़ गया. असुर देवताओं पर भारी पड़ रहे थे, तो असुरों को हराने के लिए उनको कोई उपाय नहीं सूझ रहा था. ऐसे में सारे देवता ब्रह्मा जी के पास असुरों को हराने का उपाय जानने गए. ब्रह्मा जी ने देवताओं की समस्या को पहले से जानते थे. उन्होंने देवताओं से कहा कि वो अपनी-अपनी पत्नियों से कहें कि वो अपने पति की मंगलकामना और असुरों पर विजय के लिए व्रत रखें. इससे निश्चित ही देवताओं को विजय प्राप्त होगी. इसके बाद जब देवियों ने ये व्रत किया तो देवता विजयी हो गए.

सत्यवान और सावित्री
राजा सत्यवान और उसकी पत्नी थी सावित्री. राजा ने युद्ध में सब कुछ खो दिया और अपने प्राण भी गंवा दिए. जब मृत्यु उसे लेने आयी, तब उसकी पत्नी ने प्रार्थना की और उसका संकल्प इतना शक्तिशाली था कि उसने अपने पति को पुनर्जीवित कर दिया, जो आत्मा शरीर छोड़कर चली गयी थी, वह वापस शरीर में आ गयी. इसी को करवा चौथ कहते हैं. ऐसी ही और बहुत सी प्राचीन कथाएं हैं. उसने कहा कि आज सूर्य उदय नहीं होगा और वास्तव में सूर्य बहुत दिनों तक उगा ही नहीं. करवा चौथ ऐसा ही त्यौहार है.
यह पर्व विश्वास और आपसी स्नेह, प्यार को बनाए रखता है. द्वापर युग से लेकर आज कलियुग के पांच हजार से अधिक वर्ष बीत जाने पर भी यह पर्व उतनी ही आस्था और विश्वास से मनाया जाता है जैसा द्वापर युग में मनाया जाता था. सुहागन महिलाएं चन्द्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं. जबकि ऋषियों के चिंतन में वैज्ञानिक आधार भी निहित्त है.
जब आप व्रत रखते हैं, तब आपका पूरा शरीर शुद्ध हो जाता है. जब शरीर से विषैले पदार्थ निकल जाते हैं, तब मन तीक्ष्ण होता है. ऐसी अवस्था में आप जो भी इच्छा करते हैं या जिस भी लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, वह पूरा होता है. यह श्रद्धा है, नियम भी है और इसका वैज्ञानिक आधार भी है.

मन में रहती है एक इच्‍छा
लेकिन व्रत के साथ-साथ आपको मन की संकल्प शक्ति को भी बढ़ाना होगा। करवा चौथ के पूरे दिन, आपके मन में बस एक ही इच्छा रहती है कि आपके पति या पत्नी का कल्याण हो. पुराने दिनों में, लोग केवल इसी एक इच्छा के साथ व्रत करते थे. ये और कुछ नहीं केवल हमारे मन की शक्ति है, लेकिन यदि आपका मन कहीं और है और आप केवल भोजन नहीं कर रहे हैं, तब उसका उतना फायदा नहीं होगा. हां, शरीर को आराम ज़रूर मिल जाएगा. हमारा लीवर अनवरत काम करता है. व्रत करने से उसे थोड़ा आराम तो मिल ही जाता है.

करवा चौथ व्रत की पूजा विधि
>> सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं. सरगी के रूप में मिला हुआ भोजन करें पानी पीएं और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें. करवाचौथ में महिलाएं पूरे दिन जल-अन्न कुछ ग्रहण नहीं करे फिर शाम के समय चांद को देखने के बाद दर्शन कर व्रत खोले.
>> पूजा के लिए शाम के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना कर इसमें करवे रखें.
>>एक थाली में धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर रखें और घी का दीपक जलाएं.
>> पूजा चंद्रोदय निकलने के एक घंटे पहले शुरू कर देनी चाहिए आज के दिन महिलाओं का एक साथ मिलकर पूजा करना श्रेष्ठ हैं.
>> पूजन के समय करवा चौथ कथा जरूर सुनें या सुनाएं.
>> चन्द्रमा को छलनी से देखने के बाद अर्घ्य देकर चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए.
>> चांद को देखने के बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलना चाहिए.
इस दिन बहुएं अपनी सास को थाली में मिठाई, फल, मेवे, रुपये आदि देकर उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्राप्त करें.

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First published: October 17, 2019, 11:24 AM IST
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