हत्या मामले में मंत्री का नाम आने पर राजनीति गरमाई, इस्तीफे का दबाव
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हत्या मामले में मंत्री का नाम आने पर राजनीति गरमाई, इस्तीफे का दबाव
मध्य प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता.

कांग्रेस विधायक माखनलाल जाटव हत्याकांड में सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री लालसिंह आर्य को आरोपी बनाए जाने के बाद से मध्य प्रदेश की राजनीति में गरमा गई है. कांग्रेस की ओर से आर्य के इस्तीफे की मांग को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने खारिज कर दिया है.

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कांग्रेस विधायक माखनलाल जाटव हत्याकांड में सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री लालसिंह आर्य को आरोपी बनाए जाने के बाद से मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. कांग्रेस की ओर से आर्य के इस्तीफे की मांग को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने खारिज कर दिया है.

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आर्य को मंत्री पद से इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है और न ही वह इस्तीफा देंगे.

हालांकि, पूर्व मंत्री और सांसद अनूप मिश्रा का हवाला देकर मंत्री लाल सिंह आर्य पर इस्तीफा देने का नैतिक दबाव बनता नजर आ रहा है.



दरअसल, 8 साल पहले बेलागांव हत्याकांड में परिजन का नाम सामने आने के बाद तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री अनूप मिश्रा ने इस्तीफा दिया था.
23 जून 2010 को बहुचर्चित बेलागांव कांड में रास्ता विवाद को लेकर भीकम नाम के युवक की हत्या कर दी गयी थी. इस गांव के पास तत्कालीन मंत्री अनूप मिश्रा के परिजनों का कॉलेज था.

भीकन की हत्या में अनूप मिश्रा और उनके परिजनों का नाम सामने आया था जिसे लेकर मिश्रा को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. वैसे, करीब एक साल बाद ही कोर्ट ने मई 2011 में सबूतों के अभाव में बेलागांव हत्याकांड के पांचों आरोपियों को बरी कर दिया था.

बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय ने मंत्री आर्य का पक्ष लेते हुए कहा कि मंत्री अनूप मिश्रा से पार्टी ने इस्तीफा नहीं मांगा था बल्कि उन्होंने खुद इस्तीफा दिया था. लालसिंह आर्य का मामला बेलागांव कांड से पूरी तरह से अलग है और प्रथम दृष्टया आर्य दोषी नहीं दिख रहे हैं.
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