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चंबल ने मुरैना में मचायी तबाही : दो दर्जन गांव जलमग्न, पानी में बही गृहस्थी

बाढ़ अपने साथ दो दर्जन गांव के लिए तबाही लेकर आयी
बाढ़ अपने साथ दो दर्जन गांव के लिए तबाही लेकर आयी

जिला प्रशासन जल्द सर्वे की बात कह रहा है. लेकिन सर्वे दल अभी तक वहां नहीं पहुंचा है. बाढ़ से संक्रामक बीमारियां भी फैलना शुरू हो गयी हैं. डर है कि कहीं महामारी ना फैल जाए

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चंबल नदी में आयी बाढ़ ने मुरैना ज़िले के लगभग दो दर्जन गांवों में तबाही मचा दी है. अम्बाह, पोरसा और सबलगढ़ इलाके के कई गांवों में बाढ़ के कारण सब कुछ नष्ट हो गया है. किसानों की फसल से लेकर सर से छत तक सब बाढ़ में बह गए हैं.
चंबल इस बार मुरैना में भारी तबाही और बर्बादी लेकर आयी. भारी बारिश के कारण चंबल नदी ज़बरदस्त तरीके से उफन पड़ी. ग्रामीण इलाके और निचली बस्तियां पानी में डूब गयीं. इलाके के करीब दो दर्जन गांव बाढ़ के पानी से बुरी तरह घिर गए. यहां रह रहे लोगों की पूरी गृहस्थी का सामान बाढ़ अपने साथ बहा ले गयी. हालात ये हैं कि लोगों के सिर पर अब ना छत बची है ना खाने-पीने के लिए अनाज.

मुरैना में बाढ़


मोटर बोट पर निकलीं कलेक्टर
बाढ़ पीड़ित इलाकों में हालात बद से बदतर हैं. कलेक्टर प्रियंका दास मोटरबोट पर प्रभावित इलाकों के दौरे पर निकलीं और हालात का जायज़ा लिया. कलेक्टर ने प्रत्येक परिवार को फिलहाल 50 किलो गेहूं और 5 लीटर केरोसिन देने की घोषणा की.



कलेक्टर ने किया निरीक्षण


खुले आसमान के नीचे
यूं तो जिले में बारिश काफी कम हुई है लेकिन राजिस्थान के कोटा बैराज से चम्बल में छोड़े गए पानी ने मुरैना जिले के अम्बाह पोरसा इलाकों में बाढ़ ला दी. अब जब नदी का पानी उतरा है तो गांव वाले अपने घरों को लौट रहे हैं. लेकिन सवाल ये है कि वो लौटें कहां. घर, फसल औऱ सारा सामान तो बाढ़ में बह गया. बाढ़ पीड़ित खुले आसमान के नीचे रहने पर मजबूर हैं. खाने की समस्या सभी के सामने है. बिजली सप्लाई भी बाधित हो गई है.
सर्वे के बाद मुआवज़ा
जिला प्रशासन जल्द सर्वे की बात कह रहा है. लेकिन सर्वे दल अभी तक वहां नहीं पहुंचा है. बाढ़ से संक्रामक बीमारियां भी फैलना शुरू हो गयी हैं. डर है कि कहीं महामारी ना फैल जाए.

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