लगातार दूसरी बार चुनाव नहीं जीतता मुरैना का विधायक, इस बार भी नहीं टूटा मिथक

सांकेतिक फोटो.
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मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में विधानसभा (Assembly) की 28 सीटों पर उपचुनाव (By-Election) के नतीजे घोषित होने के बाद अब समीक्षा का दौर है.

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मुरैना. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में विधानसभा (Assembly) की 28 सीटों पर उपचुनाव (By-Election) के नतीजे घोषित होने के बाद अब समीक्षा का दौर है. उपचुनाव के बाद मुरैना (Morena) जिले ने एक बार फिर दो मिथक कायम रखे हैं. एक तो यह कि मुरैना सीट से कोई भी विधायक लगातार दूसरी बार विधायक नहीं बना है. 2018 में रघुराज कंषाना बने तो इस बार वह चुनाव हारे और कांग्रेस के राकेश मावई चुनाव जीते. हालांकि एक ही पार्टी के चुनाव चिह्न वाले को 2018 के मुख्य चुनाव और 2020 के उपचुनाव में जीत मिली है. क्योंकि 2018 में कषाना कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े थे.

मुरैना में दूसरा बड़ा मिथक यह है कि मुरैना जिले में अगर कोई मंत्री बनने के बाद चुनाव लड़ा है तो वह हारा ही है. इस बार भी सुमावली से पीएचई मंत्री एदल सिंह कंषाना 11 हजार मतों से हारे. यहां कांग्रेस के अजब सिंह कुशवाहा जीते हैं. वही दिमनी से राज्यमंत्री गिर्राज दंडोतिया 27 हजार के लगभग चुनाव हारे, जिन्हें कांग्रेस के रविन्द्र सिंह तोमर ने हराया. यहां सबसे पहले पीडब्ल्यूडी मंत्री जबर सिंह तोमर रहे जनता दल के समय. इसके बाद जाहर सिंह शर्मा, मुंशीलाल, भाजपा से मंत्री रहे और अपना अगला चुनाव हारे.

इनको भी मिली हार
कीरत राम सिंह कंषाना कांग्रेस से मंत्री रहे अगला चुनाव हारे. रुस्तम सिंह बीजेपी सरकार में दो बार मंत्री रहे, लेकिन दोनों बार अगला चुनाव हारे. एदल सिंह कंषाना पहले कांग्रेस में मंत्री रहे अगला चुनाव हारे अभी वर्तमान में भी चुनाव हार गए. बता दें कि उपचुनाव की कुल 28 सीटों में से बीजेपी को 19 और कांग्रेस को 9 सीटों पर जीत मिली है.
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