MP: स्क्रैप पालिसी को लेकर मप्र में भी हलचल, सड़कों से हटेंगे 20 साल पुराने लाखों वाहन

केंद्र सरकार की नई स्क्रैप पॉलिसी का असर मध्य प्रदेश में भी दिखाई देगा.

केंद्र सरकार की नई स्क्रैप पॉलिसी का असर मध्य प्रदेश में भी दिखाई देगा.

केंद्र की नई वाहन स्क्रैप पॉलिसी (Vehicle Scrap Policy) का असर मध्य प्रदेश(Madhya Prdesh) में दिखाई देगा. इस पालिसी के तहत 20 साल पुराने निजी वाहन (Private vehicle) और 15 साल पुराने कामर्शियल वाहनों को कबाड़ याने कंडम घोषित किया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 2, 2021, 10:36 PM IST
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भोपाल. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने सोमवार को संसद में पेश आम बजट में नई वाहन स्क्रैप पॉलिसी (Vehicle Scrap Policy) लाने का ऐलान किया. इस पालिसी के तहत 20 साल पुराने निजी वाहनों और 15 साल पुराने कामर्शियल वाहनों को कबाड़ याने कंडम घोषित करते हुए सड़कों से हटाया जाएगा.

केंद्र की इस पॉलिसी का मध्य प्रदेश पर भी सीधा असर पड़ने वाला है. एक अनुमान के मुताबिक राज्य के भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में ही इतने पुराने यात्री और कामर्शियल वाहनों की संख्या 3 लाख से ऊपर बताई जा रही है, जिन्हें सड़कों से हटाया जाने वाला है. यातायात विभाग ने ऐसे वाहनों के बारे में जिलों से जानकारी जुटाना भी शुरू कर दिया है, लेकिन एक सवाल का जवाब अभी सामने आना बाकी है कि जिन कामर्शियल वाहनों को हटाया जाएगा, उनसे जुड़े लोगों की रोजी-रोटी का क्या होगा? सरकार उनके लिए क्या इंतजाम करने जा रही है?

बता दें कि शहरों में बढ़ते प्रदूषण की समस्या को देखते हुए पुराने वाहनों को कबाड़ घोषित कर सड़कों से हटाने के लिए यह योजना लेकर आई है. पर्यावरणविद भी मानते हैं कि कुल वायुप्रदूषण का 70 फीसदी तो यातायात के कारणों से होता है, सर्वाधिक वायु प्रदूषण पुराने वाहनों से होता है, जिनसे निकलने वाले हैवीमैटल और गैसें स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होती है. पर्यावरणविद सुभाष सी पांडे की मानें तो अकेले भोपाल में ही करीब 10 फीसदी तक 30-30 साल पुराने वाहन हैं, जो सड़कों पर दौड़ रहे हैं और प्रदूषण फैला रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि पुराने वाहन सड़कों पर हटाने से प्रदूषण में 30 प्रतिशत तक कमी आएगी.

सड़कों पर दौड़ रहे लाखों पुराने वाहन
नई पालिसी के मुताबिक अब पुराने वाहनों को सड़कों पर चलाने से पहले फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा. राज्य के बड़े शहरों में 15 से 20 साल पुराने वाहनों का जो आंकड़ा सामने आया है, उसके मुताबिक अकेले भोपाल में 50 हजार से ज्यादा, इंदौर में करीब 75 हजार, ग्वालियर में लगभग 25 हजार और जबलपुर में लगभग 40 हजार वाहन 15 साल या उससे अधिक पुराने हैं. इनमें कामर्शियल वाहनों में यात्री और माल ढुलाई वाले वाहनों के अलावा सरकारी महकमों में लगे वाहन भी शामिल हैं.

जब प्रदेश के चार शहरों में वाहनों की इतनी बड़ी तादाद है, तो पूरे मध्य प्रदेश में कितनी बड़ी संख्या में 15 से 20 साल पुराने वाहन चल रहे हैं, इसकी संख्या अभी सामने आनी बाकी है. नई पालिसी के बारे मे चर्चा तो पहले से ही चल रही थी. स्वयं ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी इसके बारे में चर्चा करते रहे हैं. अब आम बजट में नई स्क्रैप पालिसी घोषित होने के बाद मप्र में पालिसी पर अमल को लेकर सक्रियता बढ़ गई है. ट्रांसपोर्ट कमिश्नर मुकेश जैन के मुताबिक 15 साल पुराने वाहनों के बारें में जानकारी जुटाई जा रही है. इस दिशा में काम शुरू किया जा चुका है.

लोगों की रोजी-रोटी का क्या होगा?



यात्री और कामर्शियल वाहनों को सड़कों से हटाने की स्थिति में बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो जाएंगे, उनकी रोजी-रोटी का सहारा छिन जाएगा, ऐसे में सवाल यह है कि वह अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे, क्योंकि इस बारे में अभी कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है. बता दें कि आम बजट सामने आने से पहले इस मुद्दे पर एक चर्चा में आल इंडिया मोटर कांग्रेस के अध्यक्ष कुलतारण सिंह अटवाल ने कहा था कि सरकार पुराने वाहनों को कबाड़ घोषित करे, लेकिन नए वाहन की खरीद पर इंसेंटिव की बजाय रिट्रोफिट स्कीम (Retrofit Scheme) लेकर आए यानी पुरानी गाड़ी को बदलने की बजाय इंजन, फ्यूल और पाइप को बदलने का विकल्प रखे. मध्यप्रदेश के ट्रांसपोर्टरों ने इस काम में लगे लोगों की आजीविका को लेकर अपनी चिंता जताई है, क्योंकि उनकी रोजी-रोटी के बारे में सरकार ने क्या योजना बनाई है, इसकी कोई तस्वीर सामने नहीं आई है.
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