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मप्र: अब बोतल से बाहर आया पैरामेडिकल छात्रवृत्ति घोटाले का जिन्न

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 31, 2019, 3:54 PM IST
मप्र: अब बोतल से बाहर आया पैरामेडिकल छात्रवृत्ति घोटाले का जिन्न
कुछ कॉलेज की तरफ से भेजे गए जवाब में दस्‍तावेजों के खोने या जलने की बात कही गई है.

छात्रवृत्ति घोटाले (scholarship scam ) को लेकर मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) लोकायुक्‍त अब तक करीब 100 एफआईआर (FIR) दर्ज कर चुकी है. हालांकि यह बात दीगर है कि अब तक इस मामले में एक भी शख्‍स की गिरफ्तारी (Arrest) नहीं हुई है.

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जबलपुर: मध्‍य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) की माफिया विरोधी मुहिम ने एक बार फिर पुराने पन्नों को पलटा है. इस मुहिम का ही असर है कि बीते दिनों शिक्षा (Education) माफिया के विरुद्ध की गई एक शिकायत के बाद अरबों रुपए के घोटाले की बात सामने आई है. दरअसल, यह पूरा मामला पैरामेडिकल कालेज (paramedical College ) के छात्रों (Students) को मिलने वाली छात्रवृत्ति (Scholarship) से जुड़ा हुआ है. आरोप है कि पैरामेडिकल कॉलेजों के नाम पर निकाली गई छात्रवृत्ति कभी छात्र-छात्राओं तक पहुंची ही नहीं. छात्रवृत्ति के नाम पर आए करोड़ों रुपए घोटाले (Scam) की भेंट चढ़ गए.

उल्‍लेखनीय है कि पैरामेडिकल कालेज की तरह पहले इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी छात्रवृत्ति के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला हो चुका है. इन घोटालों को लेकर मध्यप्रदेश लोकायुक्‍त अब तक करीब 100 एफआईआर दर्ज कर चुकी है. हालांकि यह बात दीगर है कि अब तक इस मामले में एक भी शख्‍स को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जा सका है. वहीं, घोटाले की बात सामने आने के बाद कागजों में खुले पैरामेडिकल कालेजों को बंद करने की कवायद भी शुरू हो गई है.

जानकारी के अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए शुरू की गई छात्रवृत्ति योजना छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई थी. सरकार की यह योजना पर मध्‍य प्रदेश में सक्रिय शिक्षा माफिया की निगाह टेढ़ी हो गई. इसके बाद, प्रदेश में पनपा छात्रवृत्ति घोटाले का जाल जमकर फला और फूला और अब इस फर्जीवाड़े की हकीकत पन्नों में दर्ज रहकर थम गई है. कुछ ऐसा ही खुलासा मध्यप्रदेश शासन को की गई एक शिकायत में भी हुआ है.

शिकायतकर्ता इंजीनियरिंग छात्र विशाल बागरी के अनुसार, उन्‍होंने इस घोटाले से जुड़े तमाम दस्तावेजों को एकत्रित कर सीएम हेल्पलाइन और अब माफिया विरोधी मंच में इसकी शिकायत की है। उन्‍होंने बताया कि फर्जीवाड़े की बहती गंगा पर सैकड़ों ने अपने हाथ धोए और जब काम निकल गया तो पेपर पर खुले इन कॉलेजों को बंद कर दिया गया. आज जो कॉलेज चल रहे हैं और इस फर्जीवाड़े में शामिल थे, उनकी दलील भी अजीबो गरीब है. उन्‍होंने बताया कि घोटाले में शामिल कई कॉलेजों को शासन की तरफ से नोटिस जारी हुए लेकिन किसी भी कालेज ने इसका जवाब देना ठीक नहीं समझा.

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First published: December 31, 2019, 3:49 PM IST
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