मप्र: बिहार के मधेपुरा में तैयार हुआ देश का पहला स्‍वदेशी इंजन आज पहुंचा हबीबगंज, जानें क्‍या है खास
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मप्र: बिहार के मधेपुरा में तैयार हुआ देश का पहला स्‍वदेशी इंजन आज पहुंचा हबीबगंज, जानें क्‍या है खास
मेक इन इंडिया मिशन के तहत देश में तैयार पहला स्‍वदेशी रेल इंजन.

मोदी सरकार (Modi Government) के पहले कार्यकाल में सुरेश प्रभु (Suresh Prabhu) के रेल मंत्री रहते हुए इंजन को मेक इन इंडिया (Make In India) के तहत बनाने की नींव रखी गई थी.

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भोपाल. मेक इन इंडिया (Make in India) मिशन के तहत तैयार किया गया देश का पहला रेल इंजन (Rail Engine) और मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) के हबीबगंज रेलवे स्‍टेशन (Habibganj) पर पहुंचा. बिहार (Bihar) के मधेपुरा (Madhepura) में देश का पहला स्वदेशी इंजन तैयार किया गया है. 12000 हॉर्स पावर के इस शक्तिशाली इंजन को WAH12 नाम दिया गया है. साथ ही, इंजन अत्‍याधुनिक आईजीबीटी तकनीक पर आधारित यह इंजन 3-फेज ड्राइव भी है. फिलहाल इस इंजन की पहचान के लिए 60027 नंबर दिया गया है.

इंजन की खासियत
भारतीय रेलवे के वरिष्‍ठ अधिकारी के अनुसार, पूरी तरह से देश में निर्मित यह इंजन का 180 टन वजनी है और यह इंजन 100 से 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम है. 35 मीटर लंबा यह इंजन 5400 लोड बिना बैंकर लगाए खींचने में सक्षम है. वहीं, 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फुल लोड लेकर इंजन चल सकता है. 122.5 टन के एक्सल लोड के ट्विन बो-बो डिजाइन वाले इंजन को 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के साथ 25 टन तक अपग्रेड किया जा सकता है. इंजन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए कोयला रेलगाड़ियों की आवाजाही के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा. इसमें लगे हुए सॉफ्टवेयर और एंटीना के माध्यम से इंजन पर जीपीएस के जरिए नजर रखी जा सकती है.

800 देशी इंजन किए जा रहे तैयार
बिहार के मधेपुरा में यह पहला रेल इंजन तैयार किया गया है. रेलवे के इस कारखाने में इस तरह के 800 स्वदेशी इंजन तैयार किए जा रहे हैं. फिलहाल, यह इंजन ट्रायल पर है. यह जबलपुर से होते हुए भोपाल पहुंचा है और अब यह भोपाल से  देश के अलग-अलग रेल मंडल में पहुंचेगा. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में सुरेश प्रभु के रेल मंत्री रहते हुए इंजन को मेक इन इंडिया के तहत बनाने की नींव रखी गई थी, जो कि अब 2020 में जाकर तैयार हुआ है.



एयरकंडीशन सुविधा वाले लोको केबिन 
इस इंजन की खासियत यह है कि इसमें दुर्घटना की आशंका लगभग ना के बराबर है. वहींं, इंजन में लोको केबिन सर्व सुविधायुक्त है. यानी, लोको पायलट का कैबिन एयर कंडीशंड है. जबकि, अब तक दूसरे इंजन में एसी सुविधा नहीं है. जिसके चलते गर्मियों में लोको पायलट को मालगाड़ियों के संचालन में खासी दिक्कत होती है.
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