राजघाट में नर्मदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर, प्रशासन अलर्ट
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राजघाट में नर्मदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर, प्रशासन अलर्ट
राजघाट में नर्मदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर

​मालवा-निमाड़ और सीमावर्ती महाराष्ट्र में पिछले दो दिनों में हुई बारिश के चलते बड़वानी के राजघाट में नर्मदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है.

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​मालवा-निमाड़ और सीमावर्ती महाराष्ट्र में पिछले दो दिनों में हुई बारिश के चलते बड़वानी के राजघाट में नर्मदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है. जिसको देखते हुए प्रशासन अलर्ट हो गया है. वहीं बुधवार को ही नर्मदा बचाओ आंदोलन की नर्मदा न्याय यात्रा भी राजघाट पहुंची है. नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने नर्मदा नदी और विस्थापन को लेकर सरकार पर निशान साधा है.

जानकारी के अनुसार बड़वानी के राजघाट में नर्मदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है. राजघाट में खतरे का निशान 123.280 है. वर्तमान में जलस्तर 123.500 के आंकड़े को पार कर गया है. इसे देखते हुए प्रशासन हाई अलर्ट पर है.

उधर राजघाट पहुंची मेधा पाटकर ने ग्रामीणों को संबोधित करने के बाद मीडिया से चर्चा में प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा. पाटकर ने कहा कि सरकार खुद बिजली उत्पादन कर सकती है. लेकिन खुद के हाइड्रो पावर और थर्मल पावर प्लांट का उपयोग न करते हुए निजी कंपनियों से महंगी दरों पर बिजली खरीद रही है. जबकि खुद के संसाधनों से कम से कम कीमत में बिजली का उत्पादन कर सस्ती दरों पर आम जनता को बिजली दी जा सकती है. थर्मल पावर प्लांट को लेकर मेधा ने कहा कि सरकार पास्को जैसे साउथ कोरिया के पावर प्लांट को सस्ती दरों पर कोयला उपलब्ध कराते हैं और उनसे महंगी दरों पर बिजली खरीदते हैं. यही कारण है कि प्रदेश में बिजली के दरों में लगातार इजाफा हो रहा है.
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