लाइव टीवी

EXCLUSIVE: इन तस्वीरों को देखने के बाद आप गुड़ खाना छोड़ देंगे

Ashish Jain | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: April 15, 2015, 3:15 PM IST
EXCLUSIVE: इन तस्वीरों को देखने के बाद आप गुड़ खाना छोड़ देंगे
कहते हैं कि करेली आओ तो यहां का जायकेदार गुड़ खाना न भूलना पर बाहर से मुनाफा कमाने आये चंद लोगों ने गुड़ में मिलावट कर मुंह का जायका बिगाड रखा है.  नरसिंहपुर के गुड़ के जायके के देश में मुरीद कम नहीं.  सारे देश में जिले की करेली का गुड़ उसके नाम से हाथों हाथ बिक जाता है, लेकिन अब इस जायके पर सेंधमारी हो रही है. जिले में उत्तरप्रदेश और बिहार से बडी संख्या में लोग गुड़ बनाने आते हैं, जो मुनाफे कमाने के चलते गुड़ की मिठास में कडवाहट घोलने में कोई कमी नहीं छोड रहे.

कहते हैं कि करेली आओ तो यहां का जायकेदार गुड़ खाना न भूलना पर बाहर से मुनाफा कमाने आये चंद लोगों ने गुड़ में मिलावट कर मुंह का जायका बिगाड रखा है.  नरसिंहपुर के गुड़ के जायके के देश में मुरीद कम नहीं.  सारे देश में जिले की करेली का गुड़ उसके नाम से हाथों हाथ बिक जाता है, लेकिन अब इस जायके पर सेंधमारी हो रही है. जिले में उत्तरप्रदेश और बिहार से बडी संख्या में लोग गुड़ बनाने आते हैं, जो मुनाफे कमाने के चलते गुड़ की मिठास में कडवाहट घोलने में कोई कमी नहीं छोड रहे.

  • Share this:
कहते हैं कि करेली आओ तो यहां का जायकेदार गुड़ खाना न भूलना पर बाहर से मुनाफा कमाने आये चंद लोगों ने गुड़ में मिलावट कर मुंह का जायका बिगाड रखा है.  नरसिंहपुर के गुड़ के जायके के देश में मुरीद कम नहीं.  सारे देश में जिले की करेली का गुड़ उसके नाम से हाथों हाथ बिक जाता है, लेकिन अब इस जायके पर सेंधमारी हो रही है. जिले में उत्तरप्रदेश और बिहार से बडी संख्या में लोग गुड़ बनाने आते हैं, जो मुनाफे कमाने के चलते गुड़ की मिठास में कडवाहट घोलने में कोई कमी नहीं छोड रहे.



गन्ने की भरपूर पैदावार को देखते हुये उत्तरप्रदेश के मुजफफरनगर जिले से फतेह सिंह इन दिनों जिले में गुड़ बनाने का काम कर रहे हैं. करेली तहसील के बघुवार गांव में उन्होनें गुड़ भटटी को पूरे सीजन के लिये किराये पर उठाया है.  फतेह सिंह बताते हैं कि वे यहां धंधा करने आये हैं अगर पारंपरिक तरीके से गुड़ बनायेंगे तो नफा नहीं नुकसान में पड जायेंगे.



फतेह सिंह परदेश में दो पैसे कमाने के लिये यहां आये हैं, ऐसे हालात में गुड़ की गुणवत्ता से कम उसके उत्पादन से ज्यादा मतलब रखते हैं. कहीं भिंडी पानी के नाम पर उसे पैरों से टैंक में मिलाया जा रहा है तो कहीं रसायन डालकर आपकी सेहत से खेलकर मुनाफा कमाने की होड मची है.



पारंपरिक तरीके से बनाये जाने वाले गुड़ की मांग आज भी कम नहीं पर गुड़ मंडियों में देशी तरीके से बना गुड़ कम और यूपी तरीके से बन रहे गुड़ की तादाद ज्यादा है, जिससे बाहर से आ रहे व्यापारियों का भी करेली के गुड़ से भरोसा उठता जा रहा है.पारंपरिक तरीके में एक कढाई में गन्ने के रस को घंटों पकाकर देशी गुड़ तैयार किया जाता था पर अब नये तरीके से तीन कढाई में चंद मिनिटों में गुड़ तैयार हो जाता है.  ऐसा गुड़ जो कच्चा होता है और जल्द खराब हो जाता है.

जानकार बताते हैं कि उत्तरप्रदेश के कारीगरों और जिले के किसानों के गुड़ बनाने की तकनीक बिल्कुल अलग है. पारंपरिक गुड़ बनाने में लंबे समय से काम करने वालों का मानना है कि बाहर से आने वाले लोगों ने यहां के गुड़ के नाम को खराब करने में कोई कमी नहीं छोडी. ऐसे हाल में बाहर वालों ने मीठे गुड़ में कडवाहट घोल दी है.

यहां के देशी गुड़ का सेवन गर्भवती महिलाओं के लिये बहुत ही अहम माना जाता साथ ही कई प्रकार की औषधियों में इसका प्रयोग वर्षों से होता चला आ रहा है. वर्तमान में गुड़ की गुणवत्ता पर आया संकट सेहत के लिये नुकसानदेह हो सकता है.

जिले का खाद्य एवं औषधि विभाग भी इस बात को मानता है कि बाहर से आने वालों ने जब से गुड़ बनाने का काम किया है तब से गुड़ में मिलावट के किस्से आम हो गये हैं.  डाक्टर भी गुड़ के रंग को निखारने के लिये उपयोग किये जा रहे रसायन को बेहद खतरनाक बता रहे हैं.

आप hindi.news18.com की खबरें पढ़ने के लिए हमें फेसबुक और टि्वटर पर फॉलो कर सकते हैं.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नरसिंहपुर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 15, 2015, 3:15 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर