Home /News /madhya-pradesh /

ईंट का कारोबार पर्यावरण के लिए खतरा, प्रशासन की अनदेखी

ईंट का कारोबार पर्यावरण के लिए खतरा, प्रशासन की अनदेखी

नरसिंहपुर में अवैध तरीके से ईंट बनाने का कारोबार पैर पसार रहा है । खास बात ये है कि इस धंधे के चलते सबसे बड़ा नुकसान पर्यावरण को हो रहा है। छोटे छोटे मजदूर तो छोटे पैमाने पर ये काम कर रहे हैं, पर पैसे कमाने की लालच में बडे बडे भी इस काम में चांदी काट रहे हैं ।

नरसिंहपुर में अवैध तरीके से ईंट बनाने का कारोबार पैर पसार रहा है । खास बात ये है कि इस धंधे के चलते सबसे बड़ा नुकसान पर्यावरण को हो रहा है। छोटे छोटे मजदूर तो छोटे पैमाने पर ये काम कर रहे हैं, पर पैसे कमाने की लालच में बडे बडे भी इस काम में चांदी काट रहे हैं ।

नरसिंहपुर में अवैध तरीके से ईंट बनाने का कारोबार पैर पसार रहा है । खास बात ये है कि इस धंधे के चलते सबसे बड़ा नुकसान पर्यावरण को हो रहा है। छोटे छोटे मजदूर तो छोटे पैमाने पर ये काम कर रहे हैं, पर पैसे कमाने की लालच में बडे बडे भी इस काम में चांदी काट रहे हैं ।

अधिक पढ़ें ...
नरसिंहपुर में अवैध तरीके से ईंट बनाने का कारोबार पैर पसार रहा है । खास बात ये है कि इस धंधे के चलते सबसे बड़ा नुकसान पर्यावरण को हो रहा है। छोटे छोटे मजदूर तो छोटे पैमाने पर ये काम कर रहे हैं, पर पैसे कमाने की लालच में बडे बडे भी इस काम में चांदी काट रहे हैं ।

नरसिंहपुर में नदी किनारे ईंट बनाने में लगे ऐसे छोटे बडे हजारों भट्टे हैं जो हर दिन लाखों की तादाद में ईंटें उगल रहे हैं । इन भट्टे से धुआं तो उठता ही है साथ ही नदी किनारे की प्राकृतिक छटा को भी खासा नुकसान इन भट्टे से हो रहा है । जिला मुख्यालय से महज सात किलोमीटर दूरी पर बारूरेवा नदी पर हाईवे किनारे करीब तीन भटटे लगे हैं जहां ईंटें पकाई जा रहीं हैं ।

ये तो वो इलाका है जहां से शहर करीब है ऐसे में इन छोटे मजदूरों को भट्टे में लगने वाले ईंधन के लिये लकडियों को खरीदना इनकी मजबूरी है लेकिन असल नुकसान तो वे लोग पहुंचा रहे हैं जो जंगलों के करीब नदियों पर भट्टे लगाये हैं । जहां न कोई रोकने वाला है और न टोकने वाला । जंगलों का सफाया मिलीभगत से हो रहा है साथ ही मिटटी का उत्खनन भी जोरों पर है । छोटे भट्टे लगाने वाले मजदूरों का ये दर्द भी है कि पेट की खातिर ये तपती दोपहर में ये सब करना पड रहा है तो वहीं गुप चुप तरीके से चल रहे भट्टे में अफसर से लेकर बडे बडे लोग तक चांदी काट रहे हैं ।

इस बारे में प्रशासन के पास कोई ठोस जबाव नजर नहीं आता । जिले के कलेक्टर बताते हैं कि उनका अमला सचेत है लेकिन तस्वीरें साफ बयां कर रहीं हैं के हालात हकीकत के कितने करीब हैं ।

इस विषय को लेकर पीपुल्स फार एनीमल कई बार शिकायतें दर्ज करा चुका है पर हालात हैं कि बदल नहीं रहे। जिले में प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली खनिज संपदा,जल संपदा और वन संपदा इस समय पर्यावरण के नजरिये से काफी बुरे दिन देख रहीं हैं पर ऐसे हाल में भी जब सब कुछ सही होने की बात प्रशासन करेगा तो फिर हालात सुधरें ये मुनासिब नजर नहीं आता ।

आप hindi.news18.com की खबरें पढ़ने के लिए हमें फेसबुक और टि्वटर पर फॉलो कर सकते हैं.

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर