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मां की दर्दनाक मौत पर बिलख उठी बेटी, चीख-चीख कर कहती रही ये बातें, 10 हजार में खरीदा था रेमडेसिविर इंजेक्शन

नरसिंहपुर में एक मां की मौत पर पूरा परिवार बिलख उठा.

नरसिंहपुर में एक मां की मौत पर पूरा परिवार बिलख उठा.

कोरोना के खौफ में नरसिंहपुर जिला. मां की मौत पर बेटी बेसुध होकर चीखने लगी. चीख-चीख कर कहने लगी जब दवा ही नहीं है तो इलाज किस बात का कर रहे. परिवार ने ब्लैक में खरीदा था रेमडेसिविर इंजेक्शन.

  • Last Updated: April 9, 2021, 11:39 AM IST
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नरसिंहपुर. नरसिंहपुर से दिल को झकझोर देने वाली खबर आई है. यहां एक मां की कोरोना वायरस से मौत हो गई तो बेटी जोर-जोर बिलख उठी. बेटी को बेसुध बिलखता देख परिजन भी बिलखने लगे. विलाप करते परिजनों को देखकर कोरोना वायरस का खौफ समझा जा सकता है.

बिलखते परिजनों का यह मामला जिला अस्पताल के कोविड केयर सेंटर परिसर का है. आमगांव की महिला का कोरोना वायरस का इलाज चल रहा था. लेकिन, उसने दम तोड़ दिया. परिजनों ने बताया कि 700 का रेमडेसिविर जबलपुर से 10 हजार रुपए से ज्यादा में मंगवाया. बिलखती बेटी ने कहा- मां की जान का सवाल था, पर इंजेक्शन ही नहीं लग पाया. इलाज के अभाव में मां ने दम तोड़ दिया. बिलख-बिलख कर बेटी प्रशासन से कहती रही जब दवा नहीं तो इलाज क्यों कर रहे?

बेटे का आरोप- मां को नहीं मिला सही इलाज



कोविड केयर सेंटर की हालत बेहद खराब है. यहां कभी किसी पेशेंट को निगेटिव बता दिया जाता है तो कभी किसी को पॉजिटिव. इस महिला की मौत के मामले में जब जिम्मेदारों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इलाज में देरी और लंग्स की खराबी से मरीज की मौत हो गई. वहीं महिला के बेटे ने आरोप लगाया कि इलाज में देरी, इंजेक्शन लगाने में पीपीई किट पहनने का हवाला दिया गया जिससे उसकी मां को सही इलाज नहीं मिल सका और उन्होंने दम तोड़ दिया.
ये है जबलपुर की हालत 

कोरोना (Corona) मरीज़ों के इलाज के लिए महत्वपूर्ण रेमडेसिविर इंजेक्शंस के लिए कई जगह मारामारी मच गयी है. जबलपुर में अस्पतालों में इसकी किल्लत बतायी जा रही है, वहीं स्टॉकिस्ट कह रहे हैं इंजेक्शन की कोई कमी नहीं है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जानबूझकर इंजेक्शन की किल्लत बनाई जा रही है.

950 से लेकर 5400 रुपये कीमत 
कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में बेहिसाब वृद्धि ने फिर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है. कहने को जिलेभर में तमाम निजी और सरकारी अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन पर्याप्त संख्या में होने का दावा किया जा रहा है. लेकिन इलाज में इस्तेमाल होने वाले रेमेडिसिविर इंजेक्शंस के लिए जानबूझकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जिससे कालाबाजारी फल फूल सके.
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