इनके लिए हर दिन दशहरा है, लोगों को ये रोज़ खिलाते हैं सम्मान का प्रतीक पान
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इनके लिए हर दिन दशहरा है, लोगों को ये रोज़ खिलाते हैं सम्मान का प्रतीक पान
इनके लिए सम्मान का प्रतीक है इसलिए लोगों को रोज़ खिलाते हैं पान

गाडरवारा (Gadarwada) के शांतिनाथ श्वेताम्बर जैन मंदिर (Shantinath Jain Shvetambar Mandir) के संचालक ज्ञानचंद डागा पिछले करीब 40 सालों से रोजाना लोगों को पान (Pan) खिला रहे हैं. वे इसे सम्मान का प्रतीक मानकर लोगों को खिलाते हैं. उनका ये पान लोगों के जीवन में मिठास घोल रहा है

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नरसिंहपुर. हमारे देश में दशहरा (Dashahara) पर पान खाने (Pan) और खिलाने का रिवाज है. हम मिलाने जा रहे हैं नरसिंहपुर (Narsinghpur) के एक ऐसे शख्स से जिनके लिए रोजाना दशहरा है, वजह भी है, ये शख्स हर दिन दर्जनों पान लोगों को खिलाते हैं और खुद भी पान के बड़े शौकीन हैं. गाडरवारा के शांतिनाथ श्वेताम्बर जैन मंदिर (Shantinath Jain Shvetambar Mandir) के संचालक ज्ञानचंद पिछले करीब 40 सालों से रोजाना लोगों को पान खिलाने के दस्तूर को निभाते हैं. हर दिन 40-50 पान खाने वाले डागा पान को सम्मान का प्रतीक मानते हैं और सभी के सम्मान को बरकरार रखने और सम्मान देने के नजरिये से वे लोगों को पान खिलाते हैं.

हर दिन दशहरा
पान के शौकीन बुजुर्ग, बच्चे सभी डागा के पान के मुरीद हैं. जैन मंदिर के सामने सड़क किनारे सुबह से यूं ही डागाजी की पान की महफ़िल सजती है और देर शाम तक पान खाने का ये सिलसिला चलता है. पान के शौकीन बताते हैं कि पान के लिहाज से उनका हर दिन दशहरा से कम नहीं. दशहरा पर पान ख़िलाने की परंपरा कई सालों से हमारे देश में कायम है. पान के शौकीन भी इस दिन जमकर पान खाते खिलाते हैं. लोग बताते हैं कि डागा जी के इस शौक के चलते वे भी पान के शौकीन हो गए हैं. उनके लिए पान का खासा धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व है.

News - पिछले करीब 40 सालों से रोजाना लोगों को पान खिलाने के दस्तूर को निभा रहे हैं
पिछले करीब 40 सालों से रोजाना लोगों को पान खिलाने के दस्तूर को निभा रहे हैं

इस पान की खासियत


डागा के पान की खासियत ये है कि ये गिलौरी यानी छोटे से पान के रूप में लगता है. मुंह मे डालते ही घुल जाता है. डागा के प्रेम की वजह से इस गिलौरी की मिठास और भी बढ़ जाती है. इसे बनाने वाले बताते हैं कि ये गिलौरी, बड़े बड़े पान को फीका कर रही है. असत्य पर सत्य की विजय की खुशी में पान का जायका आज बहुत लोग लेते हैं और जब पान खुशी का ही प्रतीक है तो क्यों न इसे हर दिन खिलाकर लोगों में खुशियां बांटी जाएं. इन्हीं खुशियों को कायम रखने के मकसद से ज्ञानचंद डागा हर दिन लोगों की जिंदगी में सम्मान और प्रेम भरी पान की गिलौरी से मिठास घोल रहे हैं.

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