Mahashivratri 2021: नर्मदा किनारे आकर खुद बस गए थे ‘जबरेश्वर महादेव,’ इस वजह से महिलाएं लगाती हैं गले

नरसिंहपुर के जबरेश्वर महादेव के लिए लोगों में अटूट आस्था है.

नरसिंहपुर के जबरेश्वर महादेव के लिए लोगों में अटूट आस्था है.

Mahashivratri 2021: ‘जबरेश्वर महादेव’ भगवान शंकर के वह रूप हैं जिनकी जबरदस्त आस्था है. महिलाएं संतान के लिए इनके पास मन्नत लेकर आती हैं. इन्हें गले लगाती हैं. मान्यता है कि इसके बाद महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है.

  • Last Updated: March 11, 2021, 12:14 PM IST
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नरसिंहपुर. नरसिंहपुर में आस्था और भक्ति का अद्भुत स्थान है ‘जबरेश्वर महादेव.’ भगवान शंकर के इस रूप का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि संतान चाहने वाली महिलाएं यहां आकर उनके गले लगती हैं और उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है. महाशिवरात्रि पर तो भोलेनाथ की कृपा कई गुना बढ़ जाती है.

किवदंती है कि ‘जबरेश्वर महादेव’ न यहां स्थापित किए और न ही नर्मदा से निकले. शंकर नर्मदा किनारे आकर खुद बस गए. जब से महादेव यहां आकर विराजित हुए हैं तब से इनका स्वरूप पहले से अब तक काफी बढ़ चुका है. कहते हैं कि ये शिवलिंग हर साल करीब एक इंच बढ़ जाता है. बताया जाता है कि करीब दो सौ साल पहले किसी राजा को स्वप्न आया था और वो राजा नरसिंहपुर के पास बसे बचई गांव के जंगल में भगवान शिव के स्वरूप को खोजने निकले और भगवान शिव का यह शिवलिंग खुद उनके तंबू के पास लुढ़कते हुए आ गया.

धीरे-धीरे ऐसे आ पहुंचे नर्मदा किनारे

ये देख राजा ने वहीं उनकी कर राजा अपने साथ चलने का आग्रह किया और भगवान शंकर धीरे-धीरे खुद चलते-चलते करीब तीन साल में नर्मदा के किनारे इस जगह आ पहुंचे. इनकी स्थापना के बाद न ये आगे ना बढ़े और न कहीं और गए. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि लोग भगवान शिव से अपनी मुरादें मांगने यहां पहुंचे हैं. महादेव का यह स्वरूप संतान सुख की प्राप्ति के लिए बेहद खास है. जो भी यहां झोली फैला कर आता है उसकी झोली जबरेश्वर महादेव भरने में कोई कमी नहीं छोड़ते. यही वजह है की महिलाओं के लिए यह बेहद खास महादेव हैं.
इस तरह की परंपरा है यहां

महिलाएं यहां आकर उनसे गले लग जाती हैं. मंदिर की दीवारों पर महिलाएं अपनी हथेलियों की छाप छोड़ती हैं. जब संतान मांगने लोग यहां आते हैं तो सीधे हाथ से निशान लगा जाते हैं और संतान प्राप्ति के बाद भगवान महादेव का आभार व्यक्त करने फिर आते हैं और उल्टे हाथ से निशान लगा उनका शुक्रिया अदा करते हैं. रश्मि देवी बताती हैं कि कई सालों से लोग महादेव के स्वरूप के दर्शन करते आ रहे हैं और उन्होंने महादेव को छोटे से बड़े होते हुए तक देखा है. भगवान शंकर के इस स्वरूप की मान्यता यही है कि यहां से कोई भक्त खाली नहीं जाता.

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