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सेंसर बोर्ड ने 'पीके' को कैसे दिया सर्टिफिकेट, सीबीआई करे जांच: स्वरुपानंद

Agencies
Updated: January 7, 2015, 7:20 AM IST
सेंसर बोर्ड ने 'पीके' को कैसे दिया सर्टिफिकेट, सीबीआई करे जांच: स्वरुपानंद
ज्योतिष और शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वरुपानंद सरस्वती ने विवादित फिल्म पीके के दृश्यों और संवाद पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सलाहकार सदस्य द्वारा आपत्ति दर्ज कराए जाने के बावजूद यूए प्रमाण पत्र (सार्टिफिकेट) दिए जाने की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की मांग की है।

ज्योतिष और शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वरुपानंद सरस्वती ने विवादित फिल्म 'पीके' के दृश्यों और संवाद पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सलाहकार सदस्य द्वारा आपत्ति दर्ज कराए जाने के बावजूद यूए प्रमाण पत्र (सार्टिफिकेट) दिए जाने की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की मांग की है।

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  • Last Updated: January 7, 2015, 7:20 AM IST
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ज्योतिष और शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वरुपानंद सरस्वती ने विवादित फिल्म 'पीके' के दृश्यों और संवाद पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सलाहकार सदस्य द्वारा आपत्ति दर्ज कराए जाने के बावजूद यूए प्रमाण पत्र (सार्टिफिकेट) दिए जाने की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने की मांग की है।

बोर्ड के सलाहकार सदस्य सतीश कल्याणकर द्वारा उनके सामने अपना पक्ष रखे जाने के बाद सोमवार को झोतेश्वर के आश्रम में शंकराचार्य ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि बोर्ड के सलाहकार सदस्य ने फिल्म के दृश्यों व संवाद पर आपत्ति जाहिर करते हुए उसे पुन: निरीक्षण के लिए भेजने की सिफारिश की थी। जब उनकी आपत्ति को दरकिनार कर दिया गया तो सदस्य ने बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) व भारत सरकार के सूचना एव प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर उक्त मांग की थी।

शंकराचार्य ने आगे कहा कि जिस अधिकारी ने संवाद व दृश्यों पर अपत्ति दर्ज कराई थी उसका फिल्म को जारी किए गए प्रमाण पत्र में नाम ही नहीं है। लिहाजा इस प्रमाण पत्र को जारी किए जाने के मामले की सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि फिल्म 'पीके' में कई दृश्य आपत्तिजनक हैं और सनातन धर्म से जुड़े लोगों को आहत करने वाले हैं। सनातन धर्म में प्राण प्रतिष्ठा के बाद मूर्ति का पूजन होता है। पान थूकने वाले पत्थर का पूजन नहीं होता है, जैसा फिल्म में दिखाया गया है। सनातन धर्म में भूखे को रोटी तथा प्यासे को पानी देना पुण्य का काम है। गाय को रोटी इसलिए दी जाती है क्योंकि वह मीठा दूध देती है, खाद के लिए गोबर देती है और उसका मूत्र भी दवाई के लिए काम आता है।

उन्होंने आगे कहा कि फिल्म में भगवान शंकर को ऑटो में भागते व बाथरूम में छुपते बताया गया है। इसके अलावा दीवारों पर भगवान की तस्वीर लगाने का कारण भी कुछ और बताया गया है।

उन्होंने कहा कि ईसाई, मुस्लिम व यहूदी लोग हिंदुओं को समाप्त करना चाहते हैं, जबकि सबसे पुराना धर्म सनातन धर्म है। जिन प्रदेशों में 'पीके' फिल्म को टैक्स फ्री किया गया है, वहां की सरकारें वोट बैंक की राजनीति कर रही हैं। मुस्लिम वर्ग की ताकत से वह देश में राज नहीं कर सकते हैं, देश में एक अरब हिंदू हैं।

फिल्म में आतंकियों का पैसा लगे होने तथा पाकिस्तान के एक चौनल की हिस्सेदारी होने की खबरों के संबंध में उन्होंने कहा कि फिल्म के दृश्य व संवाद को देख व सुनकर यह असंभव नहीं लगता है।प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नववर्ष पर शिर्डी यात्रा के संबंध में उन्होंने कहा कि सांईं जन्म व कर्म से मुस्लिम थे। उनका जन्म वर्ष 1838 में हुआ था और मृत्यु वर्ष 1918 में हुई थी। नवरात्रि का उपवास रखने वाले तथा नर्मदा भक्त प्रदेश के मुख्यमंत्री शिर्डी में जिन्न का आशीर्वाद लेने गए होंगे।

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First published: January 6, 2015, 11:10 AM IST
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