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इस दीवार पर कभी ‘बापू’ ने किए थे दस्तखत, प्रशासन की लापरवाही से होती रही पुताई

Ashish Jain | News18 Madhya Pradesh
Updated: January 26, 2019, 10:25 PM IST

बापू ने खुद अपने हाथों से नरसिंहपुर की पाठशाला की दीवार पर लिखा था "सत्य और अहिंसा के सम्पूर्ण पालन की भरसक कोशिश करो.... बापू का आशीर्वाद".

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 73 साल पहले अपने जन्मदिन पर देशवासियों को जहां से सत्य और अहिंसा का जो संदेश दिया. उसे सहेजने में न तो हमारी सियासत ने रुचि दिखाई और न ही अफसरशाही ने. 73 साल पहले बापू ने खुद अपने हाथों से नरसिंहपुर की पाठशाला की दीवार पर लिखा था- "सत्य और अहिंसा के सम्पूर्ण पालन की भरसक कोशिश करो.... बापू का आशीर्वाद". समय के साथ इस लिखावट पर पुताई  रही और लोग भूलते गए. न्यूज़18 ने जब इस मामले को उठाया तो अब प्रशासन इसे उपलब्धि बताते हुए सहेजने की बात कह रहा है.

जिसे आज गर्व का विषय होना था, वह दुर्दशा का शिकार है. नरसिंहपुर की इस शासकीय शाला की नींव 1844 में रखी गई थी. बताया जाता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 1945 में यहां आए थे. 3 अक्टूबर 1945 को बापू इस स्कूल में रुके और यहां के एक कमरे की दीवार पर उन्होंने सत्य और अहिंसा का संदेश लिखा था. शिक्षकों की मानें तो बापू यहां अपने जन्मदिन के अवसर पर पहुंचे थे और उन्होंने यहां एक रात बिताई थी.

पिछले साल दिसंबर में यहां आए नए प्रिंसिपल सीएल ठाकुर को जब बापू के आशीर्वाद के बारे में पता चला तो उन्होंने इसकी खोजबीन शुरू की. फिर छात्रों की मदद से दीवारों की धुलाई और सफाई कराई. स्कूल के स्तर पर इस धरोहर को सहेजने के छोटे-मोटे प्रयास जरूर किए गए पर प्रशासन या शासन सहित राजनीति का कोई भी नुमाइंदा यहां नहीं पहुंचा. वर्तमान प्रिंसिपल ने इस धरोहर के बारे में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी जानकारी दी, लेकिन किसी अधिकारी ने यहां पहुंचने की जहमत भी नहीं उठाई.

बताया जाता है कि बापू के यहां आने के बाद से स्कूल में बच्चों में गांधी टोपी पहनने का चलन शुरू हो गया था, जो आज भी जारी है. बापू के सिद्धांत पर चलकर इस शाला के तीन प्रिंसिपल राष्ट्रपति पुरस्कार पा चुके हैं. वहीं यहां से पढ़ाई करने के बाद शिक्षक बने एक छात्र को भी राष्ट्रपति पुरस्‍कार से सम्मानित किया जा चुका है. यहां पढ़ाने और पढ़ने वालों के सहयोग ने इस स्कूल को आज तक जीवंत बनाए रखा है, पर सरकार की ओर से बापू की इस अनमोल धरोहर को सहेजने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया.

पिछले 32 सालों से यहां पढ़ा रहे शिक्षक सूबेदार पांडेय ने बताया कि स्कूल में कभी 600 से 800 बच्चे हुआ करते थे, लेकिन अब महज 168 बच्चे रह गए हैं. इस बारे में न्यूज़18 ने प्रशासन के आला अधिकारियों से बात की तो अब अधिकारी मामले को संज्ञान में लेने की बात कह रहे हैं.

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First published: January 26, 2019, 3:18 PM IST
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