MP चुनाव: BJP में बागी सुर, कहीं तालाबंदी तो कहीं आडवाणी के सहारे अंजाम भुगतने की चेतावनी

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

बीजेपी द्वारा जारी हुई पहली सूची के खिलाफ मालवा में विरोध के स्वर उठाई दिखाई दिए हैं. सूची में अधिकांश जगह मौजूदा विधायकों पर ही पार्टी ने भरोसा जताया है

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मध्य प्रदेश में बीजेपी द्वारा जारी हुई पहली सूची के खिलाफ मालवा में विरोध के स्वर उठाई दिखाई दिए हैं. शुक्रवार को जारी हुई सूची में अधिकांश जगह मौजूदा विधायकों पर ही पार्टी ने भरोसा जताया है, जिसके चलते एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर प्रभावी रूप से दिखाई देने लगा है. (इसे पढ़ें- Inside Story: राजा और महाराजा की लड़ाई, जानिए उस रात क्‍या हुआ था)

दरअसल, नीमच-मंदसौर की बात करें तो बीजेपी ने इन दो जिलों की सात विधानसभा सीटों में से छह पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, जिसमें जावद से ओम प्रकाश सकलेचा को चौथी बार और नीमच से दिलीप सिंह परिहार को तीसरी बार मौका दिया गया. इनकी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद न तो कोई सैलाब उमड़ा न पार्टी कार्यालय पर हुजूम देखा गया, उलटा पाटीदार समाज ने सोशल मीडिया पर एक पम्पलेट जारी कर कहा कि नीमच से पाटीदार समाज के व्यक्ति को उम्मीदवार नहीं बनाए जाने का खामियाजा पार्टी भुगतने के लिए तैयार रहे. वे पाटीदार समाज के गांवों में वोट मांगने न आएं.

गौरतलब है कि यहां से पवन पाटीदार उम्मीदवारी कर रहे थे. ऐसा ही एक पम्पलेट सिंधी समाज ने भी जारी किया है और उसमें कहा है कि एक भी सिंधी को प्रदेश में उम्मीदवार नहीं बनाए जाने का खामियाजा पार्टी भुगतने के लिए तैयार रहे इस पम्पलेट पर एलके आडवाणी की फोटो लगी है.




वहीं मनासा से पार्टी ने सिटिंग विधायक कैलाश चावला को हटाकर संघ के करीबी कहे जा रहे माधव मारु को उम्मीदवार बना दिया. माधव मारु पिछले दस साल से पार्टी के खिलाफ बागी चुनाव लड़ रहे थे. उन्होंने मनासा में नगर पंचायत, मंडी और जिला पंचायत जैसी संस्थाओं में भी बीजेपी के खिलाफ उम्मीदवार खड़े किए जिसका परिणाम यह हुआ की उम्मीदवारी की घोषणा होते ही बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और नेता मनासा में पार्टी कार्यालय पर पहुंचे और वहा तालाबंदी कर दी. उन्‍होंने टिकट वापस लो के जमकर नारे लगाए. इनका कहना था जिस नेता ने दस साल तक भाजपा का बेंड बजाया उसे क्यों उम्मीदवार बनाया गया.

उधर मंदसौर की बात करें तो वहां से तीसरी बार यशपाल सिसौदिया को मौका मिला है. यहां से प्रदेश बीजेपी महामंत्री बंशीलाल गुर्जर लाइन में थे. किसान नेता होने के साथ वे बड़े गुर्जर नेता हैं और इस संसदीय क्षेत्र से एक भी गुर्जर को विधानसभा की उम्मीदवारी नहीं मिलने से गुर्जरों में खासी नाराज़गी देखी जा रही है. दोनों जिलों में गुर्जर, गायरी, धनगर मिलाकर करीब दो लाख वोट हैं. अकेले मनासा विधानसभा में करीब 35 हज़ार गुर्जर वोट हैं.

मंदसौर जिले की सुवासरा सीतामऊ सीट से पार्टी ने पुराने हारे हुए नेता राधेश्याम पाटीदार को पुनः उम्मीदवार बना दिया यह राजपूत बाहुल्य सीट है और यहां करीब 50 हज़ार राजपूत मतदाता हैं. राजपूत को उम्मीदवार नहीं बनाए जाने से सोशल मीडिया पर विरोध खड़ा हो गया है.

आगे बढ़ें तो रतलाम जिले की जावरा विधानसभा सीट से एक बार फिर राजेंद्र पांडेय को उम्मीदवार बनाए जाने से यहां के बड़े बीजेपी नेता और पिपलोदा नगर पंचायत के अध्यक्ष श्याम बिहारी पटेल ने मोर्चा खोल दिया है. पटेल के समर्थकों का दावा है कि हम निर्दलीय लड़ेंगे.

जानकारों के अनुसार इस सीट पर 90 ग्रामों और 52 पंचायतों वाले पिपलौदा क्षेत्र को बीजेपी का गढ़ माना जाता है, जहां श्याम बिहारी पटेल का खासा प्रभाव है. उधर उज्जैन उत्तर पर कबीना मंत्री पारस जैन को पुनः उम्मीदवार घोषित होते ही फेसबुक पर भाजपाइयों ने पारस जैन निपटाओ समिति बना दी.

वहीं बीजेपी ने जो टिकट जारी किए उसे गहराई से जांचा जाए तो इसमें कारोबारी जमात और सवर्णों को तवज्जो दी गई है जिसके चलते पिछड़ों में नाराज़गी देखी जा रही है. जिसमें पाटीदार, गुर्जर, गायरी, धनगर, बंजारा, पटेल, कुल्मी जैसी और जातियां हैं जो मालवा में भरी पड़ी है.

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