यहां खून चढ़ाते ही मरीजों की हो जाती है मौत, स्वास्थ्य विभाग बेखबर

नीमच जिला अस्पताल में मरीजों को खून चढ़ाने के बाद हुए रिएक्शन से पिछले एक माह में पांच लोगों की मौत हो गई.

नीमच जिला असपताल हमेशा से ही अपने डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाहियों को लेकर सुर्खियों में बना रहता है

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मध्य प्रदेश के नीमच जिला अस्पताल में मरीजों को खून चढ़ाने के बाद हुए रिएक्शन से पिछले एक माह में पांच लोगों की मौत और कुछ मरीजों के ज्यादा बीमार हो जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है.

दरअसल, जिला असपताल हमेशा से ही अपने डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाहियों को लेकर सुर्खियों में बना रहता है. ताजा मामला खून चढ़ाए जाने के बाद हुए इंफेक्शन का है, जिसमें पांच मौते भी देखने को मिली हैं, इसके साथ ही कुछ लोगों को खून चढ़ाने पर हुए इंफेक्शन की वजह से दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा.

इस मामले में जिला अस्पताल संघर्ष समिति के संयोजक तरुण बाहेती और सदस्य संदीप राठौड़ का कहना है कि नीमच की यादव मंडी निवासी गौरव पिता राधेश्याम यादव उम्र 18 वर्ष के परिजन मामूली तबियत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल ले गए थे, लेकिन वहां जब उसे खून चढ़ाया गया तो उसकी तबीयत ज्यादा ही बिगड़ गई राहुल की हालत ज्यादा ख़राब होते देख डॉक्टरों ने भी उससे रेफर किया लेकिन अचानक परिजन उसे व्यवस्था कर ले जाते उससे पहले ही उसने दम तोड़ दिया.

ठीक इसी प्रकार गोपीलाल शर्मा उम्र 80 साल की मौत भी ब्लड चढाने के बाद हुई और रामपुरा की बसंती बाई बंजारा भी ब्लड चढाने के बाद जीवित नहीं बची.

खून चढ़ाए जाने के बाद हुए रिएक्शन से हुई मौतें और मरीजों की हालत बिगड़ने के मामले में रेडक्रॉस ब्लड बैंक के प्रभारी सत्येंद्र राठौर का कहना है कि उनके यहाँ से तो खून को पूरी जाँच के बाद ही परिजनों को सौंपा गया था हमारे यहाँ से कोई चूक नहीं हुई है.

जबकि इस मामले पर सीएमएचओ डॉ पंकज शर्मा का कहना है की मौतें तो जिला अस्पताल में हुईं हैं लेकिन वे खून के रिएक्शन से ही हुई हों, ये नहीं कहा जा सकता है. जो मौतें हुई हैं, उनमे कैंसर या हेपेटाइटिस और उम्र ज्यादा हो जाने के चलते हुई हैं.

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