रिटायर फौजी को 51 साल से पेंशन का इंतजार, पीएम मोदी से मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति

नरेंद्र मोदी सरकार ने फौजियों के लिए अपना खजाना खोल दिया है. एक पूर्व सैनिक ऐसा भी है, जिसे 51 साल से पेंशन मिलने का इंतजार है. सब दूर से निराश हो चुके इस पूर्व सैनिक ने प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख से गुहार लगाकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है.

नरेंद्र मोदी सरकार ने फौजियों के लिए अपना खजाना खोल दिया है. एक पूर्व सैनिक ऐसा भी है, जिसे 51 साल से पेंशन मिलने का इंतजार है. सब दूर से निराश हो चुके इस पूर्व सैनिक ने प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख से गुहार लगाकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है.

नरेंद्र मोदी सरकार ने फौजियों के लिए अपना खजाना खोल दिया है. एक पूर्व सैनिक ऐसा भी है, जिसे 51 साल से पेंशन मिलने का इंतजार है. सब दूर से निराश हो चुके इस पूर्व सैनिक ने प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख से गुहार लगाकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है.

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नरेंद्र मोदी सरकार ने फौजियों के लिए अपना खजाना खोल दिया है. सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन का लाभ दिया जा रहा है तो रिटायर और ड्यूटी के दौरान विकलांग हुए फौजियों का ख्याल रखा जा रहा है. वहीं, एक पूर्व सैनिक ऐसा भी है, जिसे 51 साल से पेंशन मिलने का इंतजार है. सब दूर से निराश हो चुके इस पूर्व सैनिक ने प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख से गुहार लगाकर इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी है.



पेंशन पाने के लिए फौजी के संघर्ष की दास्तां मध्य प्रदेश के नीमच जिले की है. यहां रहने वाले 78 वर्षीय मोहनदास पिछले 51 साल से पेंशन पाने की कवायद में जुटे हैं. 1996 में कोटा में पदस्थ रहने के दौरान उनका पैर टूट गया, जिसके बाद सेना ने उन्हें डिसएबिलिटी पेंशन के दस्तावेज देकर घर भेज दिया. तब से लेकर अब तक मोहनदास को पेंशन नहीं मिली.



मोहनदास बताते हैं कि कम पढ़े-लिखे होने की वजह से वह ज्यादा कागजी कार्रवाई नहीं कर पाए. उन्होंने छोटी-छोटी कोशिशें जारी रखीं, लेकिन पेंशन शुरू नहीं हो सकी है.





जिंदगी की सांझ में अब उनके लिए दो जून की रोटी का जुगाड़ मुश्किल हो गया है. ऐसे में समाजसेवी गुलाम यजदानी उन्हें पेंशन दिलाने की कोशिश में जुटे हैं. यजदानी बताते है कि मोहनदास उम्र के इस पड़ाव में बहुत अकेले हो गए है. अभी तक किसी तरह काम कर वह अपना भरण-पोषण करते थे, लेकिन अब शरीर जवाब दे रहा, तो परिजन भी मदद नहीं कर रहे हैं. ऐसे में वह दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हो गए हैं.
वहीं, मोहनदास ने यजदानी की मदद से आखिरी कोशिश करते हुए पेंशन के लिए नीमच जिला प्रशासन की मदद से एक आवेदन प्रधानमंत्री और भारतीय सेना के नाम दिया. आवेदन में इस बात का जिक्र है कि पेंशन नहीं दिए जाने पर इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए.



एसडीएम आदित्य शर्मा ने मोहनदास का आवेदन मिलने की बात स्वीकारी है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले को संज्ञान में लेकर उसे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा.
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