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नई अफीम नीति को लेकर किसानों का प्रदर्शन

नई अफीम नीति को लेकर किसानों का प्रदर्शन

प्रदेश के नारकोटिक्स मुख्यालय नीमच में सुबह से ही किसानो का पहुंचना जारी था नीमच मंदसौर और रतलाम के सैकड़ों किसान उपनारकोटिक्स आयुक्त कार्यालय पहुंचे

प्रदेश के नारकोटिक्स मुख्यालय नीमच में सुबह से ही किसानो का पहुंचना जारी था नीमच मंदसौर और रतलाम के सैकड़ों किसान उपनारकोटिक्स आयुक्त कार्यालय पहुंचे

प्रदेश के नारकोटिक्स मुख्यालय नीमच में सुबह से ही किसानो का पहुंचना जारी था नीमच मंदसौर और रतलाम के सैकड़ों किसान उपनारकोटिक्स आयुक्त कार्यालय पहुंचे

    मध्य प्रदेश में नई अफीम नीति को लेकर नीमच में केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के मुख्यालय को किसानों ने घेर लिया और मांग की कि मार्फीन आधार पर अफीम के पट्टे देने के क़ानून में बदलाव किया जाए.

    प्रदेश के नारकोटिक्स मुख्यालय नीमच में सुबह से ही किसानो का पहुंचना जारी था नीमच मंदसौर और रतलाम के सैकड़ों किसान उपनारकोटिक्स आयुक्त कार्यालय पहुंचे. किसानो की आमद के मद्देनजर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था. यह प्रदर्शन शाम तक चला.

    प्रदर्शन करने आए किसानो की मांग थी कि केंद्र की भाजपा सरकार ने मार्फिन प्रतिशत के आधार पर अफीम के पट्टे देने का जो क़ानून बनाया है उसे वापस लिया जाए, क्योकि इस मान से केवल एमपी में करीब सात हज़ार से ज़यादा अफीम किसान अपने पट्टे से हाथ धो बैठेंगे.

    गौरतलब है की सन 2016-17 में जो अफीम नीति आई थी उसमें यह तय किया गया था कि एक हेक्टेयर पर 60 किलो अफीम की औसत देने वाले किसानों को अफीम का पत्ता 2017-18 में दिया जाएगा, लेकिन 20 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने जो अफीम नीति जारी की उसमे यह क़ानून बनाया की एक हेक्टेयर में 5.9 परसेंट मार्फिन पाए जाने पर ही किसान को अफीम का पत्ता दिया जाएगा और किसी भी किसान को एक हेक्टेयर के दसवें हिस्से से अधिक का पट्टा नहीं दिया जाएगा.

    इसी क़ानून को लेकर किसान आक्रोशित हो गए और उप नारकोटिक्स आयुक्त के कार्यालय का घेराव कर लिया. इस मौके पर किसानों को सम्बोधित करते हुए रतलाम के किसान नेता डीपी धाकड़ ने कहा की यह काला क़ानून है किसान कैसे मानक तय करेगा उसके पास कोई यंत्र नहीं है और फिर किस अफीम में कितनी मार्फिन निकलेगी यह किसान के हाथ में नहीं है.

    वहीं जीरन के किसान नेता तरुण बाहेती ने कहा कि सरकार की नई अफीम नीति में प्रति हेक्टेयर 5.9 किलो ग्राम मार्फिन की मात्रा जरूरी है. जो पूर्णतया गलत होने के साथ ही तर्क संगत भी नहीं है. अफीम में मार्फिन की मात्रा मौसम के अनुकूलता एवं प्रतिकूलता के आधार पर घटती-बढती है, जिसमें अफीम उत्पादक किसान का कोई दोष नहीं होता है तथा सबसे बड़ी बात यह कि अफीम में किसी प्रकार की मिलावट करने पर भी मार्फिन की मात्रा पर कोई फर्क नहीं पड़ता है.

    इस मामले में सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार के तमाम आला अफसरों से बात करने के बाद 25 अक्टूबर से होने वाला अफीम पट्टा वितरण रोक दिया गया है.

    बता दें कि, बीते फसल सत्र में एमपी और राजस्थान में करीब 60 हज़ार अफीम के पट्टे जारी किये गए थे और करीब 350 मीट्रिक टन अफीम दोनों राज्यों के किसानो ने सरकार को दी थी नए अफीम क़ानून के हिसाब से एमपी में 7 हज़ार और राजस्थान में करीब 10 हज़ार किसानो के पट्टे कटने की संभावना है.

    Tags: Madhya pradesh news

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