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मालवा में फिर सुलग सकती है चिंगारी, सरकार से इन मुद्दों पर नाराज है किसान

Mustafa Hussain | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 18, 2019, 5:50 PM IST
मालवा में फिर सुलग सकती है चिंगारी, सरकार से इन मुद्दों पर नाराज है किसान
अफीम को लेकर केंद्र सरकार की नीति से नाराज़ है किसान

मालवा (Malwa) के किसान (Farmer) नाराज हैं. राज्य सरकार से कृषि ऋण (Agriculture loan), फसल बीमा (Crop insurance) को लेकर तो केंद्र की अफीम नीति उन्हें रास नहीं आ रही. सूत्रों के मुताबिक बाढ़ के नुकसान के बाद अफीम नीति की मार से आक्रोशित किसान आंदोलन की राह पर निकल सकता है.

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नीमच.  राज्य सरकार से फसल बीमा (Crop insurance) का मुआवज़ा (compensation) नहीं मिलने और केंद्र सरकार द्वारा जारी नई अफीम नीति (opium policy) से किसानों (farmer) की नाराज़गी के चलते फिर मालवा सुलगने की राह पर है. आए दिन किसान ज्ञापन और धरना दे रहे हैं. माहौल को देखते हुए लगता है, यदि सरकारों ने किसानों के मामलों पर गंभीरता से नहीं सोचा तो मालवा में 2016 जैसे हालात बन जाएंगे.

गौरतलब है कि नीमच में आई बाढ़ के बाद करीब एक लाख 25 हज़ार हेक्टेयर में लगी सोयाबीन और करीब 32 हज़ार हेक्टेयर में लगी चना, उड़द और मूंग की फसल तबाह हो गई, लेकिन इन किसानों को अभी तक न तो मुआवजा मिला न ही फसल बीमा की राशि ही मिली है. साथ ही कर्ज माफी का काम अधर में लटकने से किसानों में जमकर गुस्सा है.

केंद्र और राज्य दोनों से नाराज़ है किसान
इस मामले में किसान नेता अर्जुन सिंह बोराना कहते हैं कि प्रदेश की कमलनाथ सरकार की कर्जमाफी छलावा साबित हुई है, जसके चलते कई किसान आज बैंकों में डिफाल्टर घोषित हो चले हैं. ऐसे में किसानों को बीमे तक का लाभ नहीं मिल पाया है. वहीं केंद्र सरकार की नई अफीम नीति से भी किसान खुश नहीं है. किसानों को लगता है कि दोनों ही मामलों में सरकार किसानों के हित में नहीं सोच रही है.

किसानों में खासा आक्रोश है और जल्द मुआवजा,  बीमा राशि और कर्जमाफी को लेकर MP सरकार और अफीम नीति पर केंद्र सरकार विचार नहीं करती है तो किसानों को आंदोलित होकर सड़क पर आना पड़ेगा. अधूरी कर्जमाफी, मुआवजा और फसल बीमा नहीं मिलने से नाराज किसानों को नई अफीम नीति ने और अधिक आक्रोशित कर दिया है.

News - बारिश बाढ़ से फसल बर्बाद होने और केंद्रीय की अफीम नीति ने किसान को तोड़कर रख दिया है.
बारिश से फसल बर्बाद होने और केंद्र की अफीम नीति ने किसान से नाराज किसान आंदोलन की राह पर निकल सकता है


क्या है केंद्र की नई अफीम नीति
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>> केंद्र सरकार द्वारा जारी अफीम नीति में ये प्रावधान है कि 4.5 प्रतिशत मॉर्फिन प्रति हेक्टेयर जिन किसानों की अफीम में पाई गई है, उन्हें ही इस फसल स्तर के लिए पट्टे जारी किये जाएंगे

>> जिन किसानों की अफीम में इससे कम मॉर्फिन निकली है, उनके पट्टे काट दिए जाएंगे.

>> इस आधार पर पट्टे जारी हुए तो करीब 5 हजार किसानों को पट्टे नहीं मिलेंगे, जबकि मालवा और मेवाड़ में अफीम का पत्ता किसान की इज्जत होता है.

ये है किसानों की परेशानी
ऐसे में किसान मांग कर रहे हैं कि पट्टा औसत के पुराने नियम के आधार पर दिया जाएं और केंद्र सरकार नीति में परिवर्तन करे. अफीम किसान मोहन नागदा कहते हैं कि किसान कैसे पता करें कि अफीम में कितनी मॉर्फिन है और अफीम में मॉर्फिन का पर्सेंटेज कम या ज्यादा किसान के हाथ में नहीं, कुदरत के हाथ में है. वहीं इस मामले में भाजपा प्रदेश कार्य समिति के सदस्य करण सिंह परमाल कहते हैं कि किसान कमलनाथ सरकार को सबक सिखाने के लिए तैयार है और जल्द कोई आंदोलन इसके लिए खड़ा होगा जबकि कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार अहीर कहते हैं कि नई अफीम नीति किसान विरोधी है. केंद्र सरकार किसानों की दुख की घड़ी में मदद को तैयार नहीं है.

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First published: October 18, 2019, 5:24 PM IST
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