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मालवा की नीमच-मंदसौर सीट मानी जा रही भाजपा के लिए सेफ

मालवा की नीमच-मंदसौर सीट मानी जा रही भाजपा के लिए सेफ

मालवा की नीमच-मंदसौर सीट भाजपा के लिए सेफ मानी जा रही है  और भाजपा कई नेता यहां से चुनाव लड़ने के लिए यहां से टिकट की मांग कर रहे हैं.

मालवा की नीमच-मंदसौर सीट भाजपा के लिए सेफ मानी जा रही है और भाजपा कई नेता यहां से चुनाव लड़ने के लिए यहां से टिकट की मांग कर रहे हैं.

मालवा की नीमच-मंदसौर सीट भाजपा के लिए सेफ मानी जा रही है और भाजपा कई नेता यहां से चुनाव लड़ने के लिए यहां से टिकट की मांग कर रहे हैं.

    हर चुनाव में मालवा राजनीतिक पैंतरेबाजों के लिए बड़ा अखाड़ा होता है. ये इलाका संघ की नर्सरी माना जाता है क्योकि जनसंघ के जमाने में पहले दो सांसदों में से एक उमाशंकर त्रिवेदी यही से सांसद थे. भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाव ठाकरे, पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा, वीरेंद्र कुमार सखलेचा और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ.लक्ष्मीनारायण पांडेय भी यही से आते थे. इन दिवंगत नेताओं के कारण धीरे- धीरे यह आरएसएस का गढ़ बन गया.

    भाजपा के लिए सेफ सीट है नीमच-मंदसौर

    मालवा में सबसे ख़ास क्षेत्र नीमच-मंदसौर संसदीय सीट है. यह वह इलाका है जहां से भाजपा के दो मुख्यमंत्री और एक प्रदेशाध्यक्ष निकले. आज की बात की जाए तो इस संसदीय सीट की 8 सीटों में से 7 पर भाजपा का कब्जा है, जबकि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है. ऐसी स्थिति में यह सीट भाजपा के लिए सेफ सीट है और यहाँ से भाजपा के ही सुधीर गुप्ता सांसद हैं, जिन्होंने पिछले चुनाव में राहुल गांधी की करीबी मीनाक्षी नटराजन को 3 लाख से अधिक मतों से हराया था.

    टिकट मांगने वालों की लंबी लाइन

    हाल की बात करें तो सांसद गुप्ता पार्टी में ही कमजोर दिखाई देते हैं और यहां से राज्यसभा के पूर्व सदस्य रघुनन्दन शर्मा, पूर्व मंत्री कैलाश चांवला, प्रदेश भाजपा महामंत्री बंशीलाल गुर्जर और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष स्व.लक्ष्मीनारायण पांडेय के बेटे सुरेंद्र पांडेय पूरे दम ख़म से टिकट मांग रहे हैं. हाल ही में रघुनंदन शर्मा को तो नागपुर तलब किया गया था. बताते हैं कि वहां उन्होंने दो टूक कहा कि भले मुझे टिकट मत दीजिए  पर सुधीर गुप्ता लड़ेंगे तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ेगा.

    कैलाश विजयवर्गीय के नाम की भी चर्चा 

    इन नेताओ के इतर एक ताकतवर नाम भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का है. उनके समर्थक खुले तौर पर कहते सुने जा रहे हैं कि विजयवर्गीय जी नीमच-मंदसौर से चुनाव लड़ने आ रहे हैं. उनकी आमद की खबर से भाजपाई हलके में हड़कंप है, क्योकि उनका नाम आने के बाद कोई उम्मीदवारी नहीं कर सकता. इसलिए अंदर खाने टिकट के दावेदार नेता यह खबर निकालने में लगे हैं कि क्या कैलाश विजयवर्गीय सही में चुनाव लड़ेंगे. वैसे जानकार बताते है कैलाशजी की पहली पसंद भोपाल है और दूसरी पसंद नीमच-मंदसौर सीट. यदि कैलाशजी इस सीट से उम्मीदवार होते हैं तो यहां चुनावी दंगल बड़ा रोचक होगा. इस मामले में जब किसी भाजपा नेता से अधिकृत तौर पर बयान देने की कहने पर पार्टी लाइन बीच में आ जाती है वे बोलने से कतराने लगते हैं.

    कांग्रेसी उम्मीदवारों में मीनाक्षी नटराजन का नाम सबसे ऊपर 

    कांग्रेस की बात करें तो मैदान में ताकतवर नाम मीनाक्षी नटराजन का दिखता है. वैसे के के सिंह कालूखेड़ा, राजेंद्र सिंह गौतम, पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा के नाम भी उम्मीदवारी के लिए सुनाई पड़ते हैं लेकिन यदि नटराजन लड़ती हैं तो फिर शायद किसी की उम्मीदवारी में ज़्यादा दम न रखे.

    नटराजन ने खुद को तैयार बताया 
    इन स्थितियों के चलते यदि नटराजन चुनाव में आती है तो उनके लिए मैदान मारना टेढ़ी खीर होगी क्योंकि नटराजन के विश्वस्त माने जाने वाले नीमच जिला कांग्रेस अध्यक्ष अजीत कांठेड़ के खिलाफ कांग्रेस में बगावत चल रही है और कांग्रेस नेताओं ने एक मीटिंग गांधी भवन में कर कांठेड़ को हटाने का प्रस्ताव पास कर लिया. कांग्रेस कमलनाथ, सिंधिया और दिग्विजय सिंह के गुटों में बंटी है और संगठन का विस्तार नीचे तक नहीं है. जब हमने इस मामले में मीनाक्षी नटराजन से बात की तो उनका कहना था में तैयार हूँ आगे पार्टी जो फैसला करे.

    अजीत कांठेड़ को हटाने की मांग

    इस मामले में जब हमने नीमच जिला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार अहीर से बात की तो उनका कहना था लोकसभा चुनाव अहम चुनाव है जिसमे राहुल गांधी को पीएम बनाने का सपना कांग्रेस ने संजोया है ऐसे में अजीत कांठेड़ जैसे निष्क्रिय जिलाध्यक्ष को तुरंत हटा देना चाहिए, क्योकि उनको कमलनाथ सरकार की ओर से 80 दिन में पूरे किए गए 82 वचन पत्रों को संगठन के माध्यम से गांव- गांव  ले जाना था लेकिन उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया. जब लोकसभा उम्मीदवार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने दो टूक कहा की शक्ति एप्प के माध्यम से जो राय कार्यकर्ता राहुल गांधी जी को दे रहे हैं उस हिसाब से आम कार्यकर्ताओं और किसानों की पसंद का उम्मीदवार देना चाहिए, फिर कांग्रेस जो तय करे उसका काम करेंगे. उन्होंने अपनी पूरी बातचीत में मीनाक्षी नटराजन का नाम नहीं लिया.

    भाजपा के बड़े नेता के उतरने पर कॉंग्रेस को होगी मुश्किल

    भाजपा में पोलिंग बूथ तक पहरेदारी है, संगठन एक फरमान पर काम कर रहा है, और सबसे ख़ास बात यह है कि विधानसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र में भाजपा के पास 77 हज़ार वोटों की लीड है ऐसे में यदि भाजपा ने किसी बड़े नेता को मैदान में उतार दिया तो कांग्रेस के लिए जमीन पर लड़ाई बेहद कठिन हो सकती है. हमने इस मामले में क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार अाकाश चौहान से बात की तो उनका कहना था भाजपा सांसद अपने कार्यकाल में कोई बड़ी उपलब्धि इस क्षेत्र को नहीं दिला पाए. न कोई कॉलेज आया न बड़ी इंडस्ट्री यहाँ तक के किसान आंदोलन की इस धरती के किसानों द्वारा उपजाई जाने वाली अफीम की सरकारी खरीद का भाव भी नहीं बढ़ा. पत्रकार चौहान कहते हैं  कि जब सुधीर गुप्ता चुनाव जीते थे तब मोदी लहर थी लेकिन अब तो चुनाव मुद्दों पर होगा.

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    Tags: Parliament, नीमच

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