डोडाचूरा को एनडीपीएस एक्‍ट से बाहर करने के लिए मंदसौर एसपी ने भेजा प्रस्‍ताव

मंदसौर एसपी मनोज कुमार सिंह.
मंदसौर एसपी मनोज कुमार सिंह.

मंदसौर जिले के एसपी मनोज कुमार सिंह ने डोडाचूरा को एनडीपीएस एक्ट से बाहर करने के लिए सरकार को एक प्रस्‍ताव भेजा है. इसमें उन्‍होंने बताया है कि डोडाचूरा में मॉर्फिन की मात्रा एनडीपीएस एक्ट के तय प्रावधानों (0.2 प्रतिशत) से कम होती है.

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मध्‍यप्रदेश में मंदसौर जिले के एसपी मनोज कुमार सिंह ने एक बड़ी पहल करते हुए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है कि डोडाचूरा को एनडीपीएस के कड़े प्रावधानों से बाहर किया जा सकता है. उन्होंने एक पॉवर पॉइंट प्रेज़ेंटेशन भेजकर लिखा है कि डोडाचूरा के लिए एनडीपीएस एक्ट में संशोधन किया जाए, क्योकि इसमें मॉर्फिन की मात्रा एनडीपीएस एक्ट के तय प्रावधानों (0.2 प्रतिशत) से कम है.

एसपी मनोज कुमार सिंह ने अपने 29 पेज के इस प्रेज़ेंटेशन में अफीम की उत्पत्ति से लेकर अब तक बने तमाम कानूनों का ज़िक्र किया है, वहींं इसमें उन्होंने कोर्ट की कार्यवाहियों का भी हवाला देते हुए साबित किया है कि डोडाचूरा को एनडीपीएस के कड़े प्रावधानों से मुक्त किया जा सकता है. इसके अलावा उन्‍होंने मामले से जुड़े सभी पहलुओं को अपने प्रेजेंटेशन में विस्‍तार से शामिल किया है.

उन्‍होंने बताया है कि विदेशों में पूरे पौधे को मशीन में डालकर अफीम निकाली जाती है. वहां डोडाचूरा में मार्फिन का प्रतिशत अधिक होता है, जबकि हमारे देश में आज भी अफीम की खेती चीरा पद्धति से होती है, जिसमे अफीम के डोडे में 6 से 8 चीरे लगाकर उसमे से अफीम निकाली जाती है. अफीम निकाले जाने के बाद डोडे में मॉर्फिन की मात्रा एनडीपीएस एक्ट के तय प्रावधानों यानी 0.2 परसेंट से कम होती है. इसलिए इसको इस एक्ट के कड़े प्रावधानों से बाहर किया जा सकता है.



क्‍या होता है डोडाचूरा
भारत दुनिया में अफीम के सबसे ज्‍यादा वैध उत्‍पादन वाला देश है. मध्‍यप्रदेश के मालवा और राजस्थान के मेवाड़ के साथ उत्तरप्रदेश के कुछ हिस्सों में अफीम की वैध खेती होती है. अफीम जिस फल में से निकलती है, उसे डोडा कहते हैं. पौधे पर लगे कच्‍‍‍‍चे फलों पर चीरा लगाकर अफीम निकाल ली जाती है और पकने के बाद इसके दाने (खसखस या पोस्‍तदाना).

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अफीम के पौधे और उन पर लगे डोडे, जिन पर चीरा लगाकर अफीम निकाली जाती है. (फाइल फोटो)


उसके बाद यह डोडा जब टुकड़े हो जाता है तो यह डोडाचूरा कहलाता है. इसे लोग पानी में भिगोकर नशे के लिए सेवन करते है. इसका अधिकांश उपयोग राजस्थान, पंजाब और हरियाणा राज्यों में होता है. इसकी दो साल पहले सरकारी खरीद होती थी और दुकानों पर बेचा जाता था, लेकिन दो साल पहले केंद्र सरकार ने इसकी बिक्री बंद करते हुए इसको नष्ट करने के आदेश दे दिए.

डोडाचूरा का अवैध परिवहन भी होता है. इसमें जो लोग पकड़े जाते हैं, उन्हें एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/18 के तहत गिरफ्तार किया जाता है. डोडाचूरा की तस्करी के मामले में 10 से लेकर 20 साल तक की सजा होती है. इस तरह के मामलों में  हजारों लोग एमपी, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और दीगर राज्यों की जेलों में बंद हैं.

सियासत गरमाई
मध्यप्रदेश और राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनावों के ठीक पहले मंदसौर के एसपी मनोज कुमार सिंह के इस प्रेज़ेंटेशन से क्षेत्र की सियासत गरमा गई है. संभव है कि दोनों ही राज्यों में यह मुद्दा जोर पकड़े. इस मामले में कांग्रेस नेता सुरेंद्र सेठी का कहना है कि एसपी मनोज कुमार सिंह को अपना प्रेज़ेंटेशन संसद की स्टेंडिंग कमिटी को देना चाहिए. प्रदेश कांग्रेस के सचिव उमराव सिंह गुर्जर ने कहा कि प्रदेश में और देश में भाजपा की सरकार है. ऐसे में उनके आईपीएस अफसर के इस प्रस्ताव के बाद डोडाचूरा केस में बंद किसानों को फौरन जेल से रिहाई मिलनी चाहिए और सरकार उन्‍हें हर्जाना भी दे.

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