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मोदी सरकार के फैसले से एमपी के किसान मायूस, 'दुश्मन' को मिला फायदा

मोदी सरकार के फैसले से एमपी के किसान मायूस, 'दुश्मन' को मिला फायदा

अफीम के पौधे और उन पर लगे डोडे, जिन पर चीरा लगाकर अफीम निकाली जाती है. (फाइल फोटो)

अफीम के पौधे और उन पर लगे डोडे, जिन पर चीरा लगाकर अफीम निकाली जाती है. (फाइल फोटो)

"भाजपा यूं तो चीनी सामान के विरोध का शोर मचाती है. वहीं, मोदी सरकार के ऐसे फैसले से चीन को ही फायदा पहुंचाया जा रहा है."

    मध्य प्रदेश के मालवा और राजस्थान के मेवाड़ में अफीम उत्पादक किसानों के लिए बुरी खबर है. केंद्र सरकार ने चीन से भी पोस्ता आयात शुरू कर दिया है. इसके बाद नीमच में देश की सबसे बड़ी मंडी में पोस्ते के भाव 6 से 8 हजार रुपए गिर गए हैं. किसानों में सरकार के इस फैसले से मायूसी है.

    दरअसल, केंद्र सरकार ने टर्की के बाद अब चीन से पोस्तदाना आयात शुरू कर दिया है. विदेशों से पोस्तदाना आने की खबर से मंडियों में पोस्त के भाव में गिरावट आ रही है. एक महीने में पोस्त के भाव निचले स्तर पर पहुंच गए है. किसानों का कहना है कि अभी केवल विदेश से पोस्ता आने की आहट के बाद दामों में भारी गिरावट है. विदेशी पोस्ता के भारतीय बाजार में आने के बाद दाम में और गिरावट दर्ज होगी.

    किसान कंवरलाल का कहना है कि जनवरी में भाव 58 से 60 हजार रुपए क्विंटल थे. अब बाजार में प्रति क्विंटल दाम 35 से 40 हजार के बीच आ गए है.

    राधेश्याम धनगर का कहना है कि भाजपा यूं तो चीनी सामान के विरोध का शोर मचाती है. वहीं, मोदी सरकार के ऐसे फैसले से चीन को ही फायदा पहुंचाया जा रहा है.

    दरअसल, विदेश से आने वाला पोस्त छना हुआ तथा कम भाव पर मिलता है. मोदी सरकार ने आयात की अनुमति दी तो शिवराज सरकार ने डोडा चूरा विक्रय के नियम के साथ पोस्ता भूसा नियम भी विलोपित कर दिया. इस नियम में व्यापारियों को पोस्तादाना छानने की पात्रता होती थी. यह नियम विलोपित हो जाने से व्यापारियों को डर है कि उन पर एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई ना हो जाए.

    पोस्ता दाना यानी खसखस यूं तो खाद्य मसाला पदार्थ में आती है, लेकिन अफीम से निकलने वाले इस उत्पाद में शिवराज सरकार के एक नियम को विलोपित करने की वजह से व्यापारियों को एनडीपीएस एक्ट में पकड़े जाने का डर सताता है. ऐसे में भारतीय पोस्ता क्वालिटी में विदेशी पोस्ते के सामने टिक नहीं पाता है.

    पोस्ता दाना आखिर होता क्या है...!
    -अफीम के फल डोडे को चीरा लगाकर उसका दूध इकट्ठा किया जाता है. 
    -डोडे से निकला यह दूध ही अफीम होता है.
    -अफीम निकलने के बाद डोडा सूख जाता है और उसमें से पोस्ता दाना या खसखस की प्राप्ति होती है. 
    -खसखस निकालने के बाद बचा हुआ डोडा का चूरा नशा करने वाले लोग उबाल कर चाय की तरह पीते हैं.

    अफीम फसल की पूरी प्रकिया में खसखस ही एकमात्र ऐसा उत्पाद है, जिसे बाजार में बिना लाइसेंस के बेचा या खरीदा जा सकता है.

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