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NRC-NPR के डर से लोग नहीं दे रहे दस्‍तावेज, सरकारी सर्वे अटके

शासकीय योजनाओं के लिए दस्‍तावेज नहीं दे रहे लोग.

शासकीय योजनाओं के लिए दस्‍तावेज नहीं दे रहे लोग.

नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) आने के बाद मध्य प्रदेश में आम लोगों ने शासकीय योजनाओं (Government Schemes) के लिए होने वाले सर्वे में जरूरी दस्तावेज देने से इंकार कर दिया है. इस वजह से प्रशासन को काफी परेशानी हो रही है.

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नीमच. नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) आने के बाद मध्य प्रदेश में आम लोगों ने शासकीय योजनाओं (Government Schemes) के लिए होने वाले सर्वे में जरूरी दस्तावेज देने से इंकार कर दिया है. उनको डर है कि ये दस्तावेज देने के बाद उनकी नागरिकता खत्म कर दी जाएगी. इसी वजह से प्रशासन सर्वे के कार्य नहीं कर पा रहा है. जबकि लाख समझाने के बावजूद आम लोग सामने नहीं आते और बहाने बनाकर शासकीय टीम से मुंह मोड़ लेते हैं.

ये है पूरा मामला
मामला राजस्थान की सीमा से लगे पश्चिमी मध्य प्रदेश के नीमच जिले के मुजावर मोहल्ला का है. यहां आंगनवाड़ी सहायिका मीना सागर खाद्य पर्ची और बीपीएल राशन कार्ड के सर्वे के लिए आईं हैं, लेकिन उन्‍हें कोई अपना आधार कार्ड और कूपन देने को तैयार नहीं है. जबकि पूर्व पार्षद खुर्शीद बानो ने कहा कि सीएए और एनआरसी आने के बाद आम लोगों में दहशत है. हमें डर है कि अगर दस्तावेज और जानकारी दी तो हमारी नागरिकता खत्म कर दी जाएगी.

कमोबेश यही आलम नीमच शहर के माधव गंज मोहल्ले का है, जहां करीब 400 मुस्लिम परिवार रहते हैं. रहवासी हाजी भूरा कुरैशी कहते हैं कि जिला प्रशासन की और से शासकीय कर्मचारी रोज आ रहे हैं, लेकिन आम लोग नागरिकता संशोधन क़ानून के बाद डरे हुए हैं.
30 हजार की मुस्लिम आबादी और...


नीमच शहर की बात करें तो करीब 12 से ज़्यादा मोहल्लो में करीब तीस हज़ार की मुस्लिम आबादी है. आंगनवाड़ी सहायिका यूनियन की अध्यक्ष वीणा पथरोड़ ने कहा कि इस समय पूरे प्रदेश के साथ नीमच में भी खाद्य पर्ची और बीपीएल राशन कार्ड सर्वे का कार्य चल रहा है, लेकिन जब हम मुस्लिम मोहल्लों में जा रहे हैं तो मुस्लिम परिवार आधार कार्ड, राशन कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेज देने को तैयार नहीं हैं. उनको लगता है कि उनकी नागरिकता छिन जाएगी. जब हम उन्हें समझाते हैं कि आपकी नागरिकता नहीं छिनेगी तब भी वे दस्तावेज देने को तैयार नहीं होते और न ही वे किसी भी प्रकार की जानकारी देते हैं.

यही नहीं, गरीब बस्तियों और मोहल्लों में सामाजिक सेवा का कार्य करने वाले किशोर जवेरिया ने कहा कि नागरिकता बिल आने के बाद वर्ग विशेष में डर का माहौल है. उनमें यह भ्रान्ति है, यदि दस्तावेज या जानकारियां दी तो उनकी नागरिकता खतरे में पड़ जाएगी.



अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने कही ये बात
इस मामले में अतिरिक्त जिला कलेक्टर विनय कुमार धोका ने कहा कि शासन के विभिन्न प्रकार के सर्वेक्षण चलते रहते हैं. इस समय खाद्य पर्ची और बीपीएल राशन कार्ड के सर्वे का कार्य चल रहा है. उसके बाद जनगणना का कार्य चलेगा. सर्वे के आधार पर ही शासन अपनी नीति बनाता है. यदि आम लोग दस्तावेज और जानकारी नहीं देंगे तो नीतियां कैसे बनेंगी और उन्हें शासकीय सुविधाओं का लाभ कैसे मिलेगा. मुझे जानकारी मिली है कि लोग दस्तावेज नहीं दे रहे है. इस मामले को हम दिखवा रहे हैं.



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