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अभियोजन अधिकारी ने किसानों के नाम पर निकलवाए दो करोड़, CBI ने मारा छापा

अभियोजन अधिकारी ने किसानों के नाम पर निकलवाए दो करोड़, CBI ने मारा छापा

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के लोक अभियोजक राजेंद्र पोरवाल के निवास पर सीबीआई भोपाल से आई एक जांच टीम ने करीब तीन घंटे तक जांच पड़ताल की

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के लोक अभियोजक राजेंद्र पोरवाल के निवास पर सीबीआई भोपाल से आई एक जांच टीम ने करीब तीन घंटे तक जांच पड़ताल की

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के लोक अभियोजक राजेंद्र पोरवाल के निवास पर सीबीआई भोपाल से आई एक जांच टीम ने करीब तीन घंटे तक जांच पड़ताल की

    नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के लोक अभियोजक राजेंद्र पोरवाल के निवास पर सीबीआई भोपाल से आई एक जांच टीम ने करीब तीन घंटे तक जांच पड़ताल की. सीबीआई के अफसरों ने बताया कि यह पड़ताल बैंक ऑफ़ बड़ौदा की नीमच शाखा में हुए ऋण घोटाले से सम्बंधित शिकायत में की गई है.

    प्राप्त जानकारी के अनुसार आज सुबह 8 बजे करीब एडवोकेट पोरवाल के विकास नगर स्थित निवास पर भोपाल से आई सीबीआई अफसरों की एक टीम पहुंची और उन्होंने करीब तीन घंटे तक एडवोकेट पोरवाल के निवास और वहीं स्थित दफ्तर पर गहन पड़ताल की. पड़ताल के बाद मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में अफसरों ने कहा कि बैंक ऑफ़ बड़ौदा शाखा नीमच को लेकर एक शिकायत हुई है, जिसमें बेनामी तरीके से ऋण देने का मामला है.

    गौरतलब है कि पूर्व शासकीय लोक अभियोजक छगन नरवाड़िया ने एक मई 2017 में एक शिकायत सीबीआई दिल्ली को भेजी थी कि पुस्तक बाजार स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में लोन के नाम पर पर करोड़ों रुपए की हेराफेरी का मामला उठाया था और कहा था कि बैंक के एडवोकेट रहते हुए राजेंद्र पोरवाल की मिलीभगत से बैंक ऑफ बड़ौदा में 2013-14 में करीब दो करोड़ रूपए से अधिक का लोन बेनामी किसानों के नाम से ले लिया गया.

    बाद में जब रिकवरी की बात आई तो पता चला कि जिन किसानों के नाम पर लोन लिए गए न तो उनके नाम जमीन है और ना ही उन्हें पता है कि उनके नाम लोन लिया गया है.

    बांटे गए फर्जी लोन में एडवोकेट छगनलाल नरवाड़िया ने सीबीआई दिल्ली और भोपाल के अलावा तत्कालीन नीमच कलेक्टर रजनीश श्रीवास्तव को भी शिकायत की थी. कलेक्टर ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए थे. जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा था. लेकिन बैंक प्रबंधन ने कलेक्टर के आदेश को कोई तवज्जो नहीं दी.

    एडवोकेट नरवाड़िया ने बताया कि ऐसे दर्जनों किसान है जिनके नाम का उपयोग किया गया और करोड़ो रूपए लोन ले लिया गया, जबकि इन किसानों के नाम पर न तो जमीन है और न ही इनको पता है की इनके नाम पर लोन लिया गया इस घोटाले में राजस्व विभाग के कर्मचारी भी शामिल है जिन्होंने फर्जी पावती और खसरे खाते की नकले दी वही इस पूरे खेल में बैंक के अफसरों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता

    यह पूरा मामला सीबीआई की पड़ताल में आ चुका है, उम्मीद की जा रही है कि अब इस मामले की परतें खुलेगी. इस मामले में नीमच शाखा प्रबंधक ओम प्रकाश गौड़ ने ज्यादा बोलने से इनकार कर दिया है.

    Tags: Neemuch news

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