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विधानसभा चुनाव 2018 : मंदसौर-नीमच में बीजेपी की राह मुश्किल कर सकते हैं ये मुद्दे

आकली गांव में ऐसे पोस्‍टर जगह-जगह लगे हैं.

आकली गांव में ऐसे पोस्‍टर जगह-जगह लगे हैं.

मंदसौर जिले की 4 सीटों में से 3 बीजेपी और एक कांग्रेस के पास जबकि नीमच जिले की तीनों सीटें बीजेपी के पास हैं. लेकिन अगर आने वाले विधानसभा चुनाव की बात करें तो हालात बीजेपी के पक्ष में उतने बेहतर दिखाई नहीं देते.

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मध्‍यप्रदेश में वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव से बीजेपी लगातार सत्‍ता में है. प्रदेश का मालवा क्षेत्र बीजेपी का गढ़ माना जाता है. इस क्षेत्र में आने वाले 10 जिलों की 48 विधानसभा सीटों में से 44 पर बीजेपी और मात्र 4 पर कांग्रेस काबिज है. इसी मालवा क्षेत्र के मंदसौर जिले की 4 सीटों में से 3 बीजेपी और एक कांग्रेस के पास जबकि नीमच जिले की तीनों सीटें बीजेपी के पास हैं. लेकिन अगर आने वाले विधानसभा चुनाव की बात करें तो हालात बीजेपी के पक्ष में उतने बेहतर दिखाई नहीं देते.

इस संवाददाता ने दोनों जिलों के नीमच, जावद, मनासा, गरोठ, सुवासरा, मल्‍हारगढ़ और मंदसौर विधानसभा क्षेत्रों का भ्रमण किया. इनमें से मात्र एक सीट सुवासरा पर कांग्रेस के विधायक हैं, जबकि शेष सभी बीजेपी के कब्‍जे में हैं. भ्रमण के दौरान यह पाया कि इन दोनों जिलों में कुछ ऐसे प्रमुख मुद्दे हैं, जो बीजेपी की राह में मुश्किल पैदा कर सकते हैं.

जनप्रतिनिधियों से पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी
पहला मुद्दा है पार्टी के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों यानी मंत्री, विधायकों और सांसदों से आम जनता के साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी का. पार्टी के ही लोग अपने चुने हुए नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर बोलने लगे हैं. गत 29 अगस्त को मंदसौर जिले की सीतामऊ तहसील के गांव देवरिया विजय में सांसद सुधीर गुप्ता को पार्टी के ही लोगों ने घेर लिया. उन्हें आधे घंटे तक जमकर खरी-खोटी सुनाई. गांव के युवक पंकज जोशी ने सांसद गुप्ता से पूछा कि आप चार साल बाद आए हैं. आपने गांव के लिए क्या काम किया? ऐसी ही घटना 30 अगस्त को नीमच जिले के सिंगोली में घटी, जहां लोग सांसद से सवाल करते दिखे. और तो और, 2 अगस्त को तो सुवासरा में कुछ लोगों ने सांसद का पुतला भी फूंका.

सुवासरा क्षेत्र में विरोधस्‍वरूप सांसद का पुतला फूंका गया.


नीमच जिले के कद्दावर बीजेपी नेता अनिल नागोरी कहते हैं कि स्थानीय नेताओं ने बीजेपी के संगठन को छिन्न-भिन्न कर दिया है. संगठन जेबी हो गया है. यदि हालात नहीं सुधरे तो लात-घूंसे चलेंगे. इनकी नाराज़गी पद पर बैठे विधायक और जिलाध्यक्ष को लेकर है. इसी तरह बीजेपी के पुराने और बड़े नेता जिनेंद्र डोसी कहते हैं कि पार्टी में कार्यकर्ताओं की उपेक्षा तो हुई है. पदों पर बैठे लोग अब कार्यकर्ताओं की पूछपरख नहीं करते.

एससी-एसटी बिल में संशोधन के चलते सवर्णों-पिछड़ों की नाराजगी
बीजेपी की शुरूआती पहचान ब्राह्मण-क्षत्रिय और वैश्‍यों की पार्टी के रूप में रही है. इसी जमात ने बीजेपी को पल्लवित-पोषित किया, लेकिन हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा एससी-एसटी एक्‍ट में किए गए संशोधन ने उसके इस मजबूत वोट बैंक को हिला दिया है.

नीमच जिला मुख्‍यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर गांव है रेवली देवली, जो नीमच विधानसभा क्षेत्र में आता है. यह पूरा गांव मेनारिया ब्राह्मणों का है और खांटी बीजेपी समर्थक है. इस गांव में 1400 वोटर हैं. गांव के डॉ. मोहन नागदा कहते हैं कि इस बार हम गांव में किसी नेता को घुसने नहीं देंगे. इस गांव के लोगों ने नारा दिया है- 'अपना सिक्का निकला खोटा, वोट फॉर नोटा.'

एससी-एसटी एक्‍ट में संशोधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन.


इसी तरह जावद विधानसभा क्षेत्र में आने वाला और जिला मुख्यालय से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव आकली में 750 वोटर हैं. यहां बीजेपी से जुड़े गिरिराज सिंह कहते हैं कि यह पूरा बेल्ट राजपूतों का है. राजपूत शत-प्रतिशत बीजेपी के वोटर हैं, लेकिन इस बार यहां कोई पार्टी को वोट नहीं करेगा. हम लोग संकल्प पत्र भरवा रहे हैं और पीले चांवल बांटकर नोटा का बटन दबाएंगे.

इस संवाददाता ने गांव का चक्कर लगाया तो देखा कि यहां करीब 20 से अधिक बैनर लगे हैं, जिन लिखा है- 'यह गांव सामान्य और पिछड़े वर्ग का है, इसलिए कोई भी वोट मांगने नहीं आए'. सबसे खास बात यह है कि यह अभियान नीमच से शुरू हुआ था और अब समूचे मालवा में फैलता जा रहा है.

कुल मिलाकर आठों विधानसभा क्षेत्रों में सवर्णों की नाराजगी हर जगह देखने को मिली. सार यह है कि जो सवर्ण वोट बैंक बीजेपी का था, वह खिसकता दिखाई रहा है. अपने इस वोट बैंक को बनाए रखना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती है.

एससी-एसटी वर्ग भी छोड़ रहा साथ
मालवा का एससी-एसटी वर्ग भी देशभर की तरह हिंदुत्व के आसरे बीजेपी के साथ चला गया था. इस बड़े वोट बैंक के चले जाने से मालवा में कांग्रेस का सफाया मालवा में हो गया था, लेकिन आरएसएस के आरक्षण पर विरोधाभासी बयान, भीमा-कोरेगांव की घटना जैसे मामलों के चलते दलितों ने 'जय भीम' कहना शुरू कर दिया और उनकी वापसी उनके मूल दलों में होने लगी.

नीमच में देवेश यादव का परिवार पूरी तरह बीजेपी से जुड़ा है. इनके भाई संघ में अहम पद पर हैं. वे कहते हैं कि मैं एक दिन उपनगर नीमच के यादव मोहल्ले में  गया था, जहां लोग अब 'जय भीम' बोलने लगे हैं. इससे लगता है कि आम लोगों का मानस बदल रहा है और वे बीजेपी से विमुख दिखाई दे रहे हैं. इस बात की चिंता लम्बे समय से संघ और संगठन की बैठकों में भी बीजेपी करती रही है. पिछले एक साल के भीतर मालवा में अजाक्स के आंदोलन ने भी तेजी पकड़ ली है. अजाक्स से जुड़े लोग खुले तौर पर बीजेपी के खिलाफ बोलते दिखते हैं.

किसानों पर गोलीचालन और पाटीदार समाज की नाराजगी
किसान आंदोलन के दौरान मंदसौर में गोलीचालन में मारे गए 6 किसानों में से 5 का पाटीदार होना पाटीदार नेता हार्दिक पटेल की मालवा में जमीन तैयार कर गया, क्योंकि मालवा पाटीदार बहुल क्षेत्र है. यहां हार्दिक पटेल बीजेपी के खिलाफ अब तक तीन बड़ी रैलियां कर चुके हैं. गौरतलब है कि आमतौर पर पाटीदार बीजेपी के वोटर माने जाते हैं. यदि यह वोट बैंक टूटता है तो निश्चित ही बीजेपी को नुकसान है.

पाटीदार समाज के प्रदेशाध्यक्ष और हार्दिक पटेल की किसान क्रांति सेना के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र पाटीदार भोपाल के मिसरोद को छोड़कर मंदसौर में पिछले 6 माह से डेरा डाले हैं. वे अपने परिवार के साथ यहीं रह रहे हैं. इसका मतलब साफ है कि हार्दिक पटेल विधानसभा चुनावों में बीजेपी के खिलाफ गोलबंदी में लगे हैं. महेंद्र पाटीदार कहते हैं कि बीजेपी नेताओं को किसानों की नाराजगी का अंदाजा आचार संहिता लगने के बाद लगेगा, क्योंकि किसान अभी भय के कारण नहीं बोल रहा है.

इन सबके इतर एक खास बात और देखने में आई कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद क्षेत्र में व्‍यापार-व्‍यवसाय मंदी का शिकार हो गया. 2008 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का दामन थामने वाले युवा प्रिंस पाटीदार कहते हैं कि हमने पि‍छले साल मार्च में खली 1650 रुपए के भाव से खरीदी थी, जो अप्रैल में 1100 रुपए क्विंटल रह गई और साल के अंत में 850 क्विंटल के भाव से बेचनी पड़ी. अब आप बताइए कि हम क्या करें. उनका कहना था कि कमोबेश यही हाल सभी जिंसों का है.

क्षेत्र में भ्रमण करते हुए सांसद सुधीर गुप्‍ता.


सारे मामलों का मिल-बैठकर हल निकाल लेंगे : हेमंत हरित
इन सब मुद्दों को लेकर जब बीजेपी के नीमच जिलाध्यक्ष हेमंत हरित से बात की गई तो उनका कहना था कि हम समन्वय से काम करेंगे और मिल-बैठकर सारे मामलों का हल निकाल लेंगे. सांसद सुधीर गुप्ता का भी कहना था कि बीजेपी सबको साथ लेकर चलने वाली पार्टी है और हम सबको साथ लेकर ही चलेंगे. बीजेपी पिछले विधानसभा चुनाव से भी बेहतर प्रदर्शन करेगी और मंदसौर-नीमच लोकसभा क्षेत्र की सभी आठ सीटें जीतेगी.

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