अपना शहर चुनें

States

खत्म हुई VIP कैदी की मौज-मस्ती, फिर पहुंचा सलाखों के पीछे

करोड़ो के गबन के आरोपी मंयक पोरवाल के जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर मौज-मस्ती करने के मामले में कलेक्टर के जांच के आदेश के बाद आरोपी को वापस जेल भेज दिया गया है.

  • Share this:
करोड़ो के गबन के आरोपी मंयक पोरवाल के जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर मौज-मस्ती करने के मामले में कलेक्टर के जांच के आदेश के बाद आरोपी को वापस जेल भेज दिया गया है.


इलाज के नाम पर नीमच जिला अस्पताल में मजे से रह रहे आरोपी मयंक पोरवाल की खबर ईटीवी पर प्रमुखता से दिखाए जाने पर जिला कलेक्टर रजनीश श्रीवास्तव ने अपने तेवर कड़े कर लिए हैं.

उन्होंने इस पूरे मामले में एसडीएम नीमच आदित्य शर्मा को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है. एसडीएम शर्मा खबर को संज्ञान में लेकर अपना जांच प्रतिवेदन जिला कलेक्टर को सौंपेंगे.
इसी बीच मंयक पोरवाल को अस्पताल से डिस्चार्ज करवा कर वापस जेल भेज दिया गया है. जिसके बाद से वो अब दूसरे कैदियों की तरह ही रहेगा.



क्या है मामला ?

दरअसल,जिला सहकारी बैंक में 12 करोड़ के गबन का आरोपी और 10 हजार के इनामी मयंक पोरवाल को अक्टूबर में गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के बाद तकरीबन एक महीने जेल में रहने के बाद ही मयंक के वकील ने उसे दिल का मरीज बताते हुए अस्पताल में भर्ती करने की मांग की.

कोर्ट से आज्ञा मिलते ही मयंक को पुलिस की निगरानी में जिला अस्पताल में भर्ती कर दिया गया. लेकिन यहां ये दिल का मरीज पुलिस के सामने ही आराम से सिगरेट के कश मारते नजर आ रहा है. जबकि दिल की बीमारी और सिगरेट पीना दोनों एक-दूसरे के विपरीत बात हैं.

इतना ही नहीं मयंक तो अस्पताल में आराम से मोबाइल पर बातचीत भी करता है और फाइलें भी पढ़ता है. बावजूद इसके डॉक्टर उसके हार्ट पेशेंट होने का दावा करते नजर आते हैं.


गौरतलब है कि आरोपी मयंक पोरवाल के खिलाफ 12 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में 420, 467, 468, 471 और 129 बी के तहत तीन मुकदमे दर्ज हैं. आरोप सामने आने के बाद मयंक एक साल तक फरार रहा.

उसे 25 अक्‍टूबर को मुंबई से गिरफ्तार किया गया था और 30 अक्टूबर को कनावटी उपजेल भेज दिया गया. जहां से 9 दिसंबर को इलाज के बहाने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कर दिया गया. जहां वो आराम से अपनी रोजमर्रा की जिन्दगी जीता नजर आ रहा था.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज