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MP चुनाव: तो क्या बदलाव का मन बना चुके हैं मालवा के मतदाता!

MP चुनाव: तो क्या बदलाव का मन बना चुके हैं मालवा के मतदाता!

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ (File Photo)

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ (File Photo)

आठों सीटों पर चुनावी रण सज चुका है और दोनों प्रमुख राजनैतिक दल बीजेपी और कांग्रेस पूरी तरह मोर्चा संभाल चुके हैं. मतदाता खामोश है. जमीन पर कोई लहर नहीं है कि ऊंट किस करवट बैठेगा

मध्य प्रदेश में है मालवा और मालवा में बसता है नीमच - मंदसौर संसदीय क्षेत्र जिसमें आठ विधानसभा सीटें आती हैं. इन आठों सीटों पर चुनावी रण सज चुका है और दोनों प्रमुख राजनैतिक दल बीजेपी और कांग्रेस पूरी तरह मोर्चा संभाल चुके हैं. मतदाता खामोश है. जमीन पर कोई लहर नहीं है कि ऊंट किस करवट बैठेगा. (इसे पढ़ें- कुछ लोग जीतते छिंदवाड़ा में हैं और दुकान गाजियाबाद में खोलते हैं: पीएम मोदी)

दरअसल, इन आठों सीटों का जायजा लेने के बाद एक ख़ास बात जो सामने आई वह यह की जमीन पर किसानों का मुद्दा हावी है. यह क्षेत्र मूलतः खेती किसानी वाला इलाका है. यह अफीम, इसबगोल, सोयाबीन, लहसून और प्याज की खेती के लिए जाना जाता है और यहां प्रदेश की बड़ी कृषि उपज मंडी नीमच, मंदसौर और जावरा है. यहां से करीब चालीस देशो में विभिन्न प्रकार की जिंसे सप्लाई होती है.

इन आठों सीटों के जिस किसी गांव में जाओ किसान कहते हैं फसलों के दाम नहीं मिल रहे हैं, दूध के दाम गिर गए हैं. पोस्तादाना का भाव नहीं मिल रहा, डोडा चूरा की खरीदी सरकार ने बंद कर दी है.

यह वो जगह है जहां से किसान आंदोलन शुरू हुआ था और पुलिस की गोली से 6 किसान मारे गए थे. ऐसे में कांग्रेस इसे मुद्दा बना रही है. मंदसौर विधानसभा क्षेत्र के गांव डेहरी में कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र नाहटा कहते है कि यह वो ज़मीन है जहां किसानों का खून बहा, गांव के हालात बिगड़े हैं, किसानो को इस सरकार ने कहीं का नहीं छोड़ा. (इसे पढ़ें- एमपी चुनाव में अब RSS संभालेगी मोर्चा, उतरेगी स्वयंसेवकों की फौज)

वहीं नीमच जिले की मनासा विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी उमराव गुर्जर बताते हैं कि सरकार में जेलें किसानों से भर गईं. किसानों ने जब पानी मांगा तो उनपर झूठे मुकदमे लगा दिए गए. एमपी के आखिरी छोर पर बसे सिंगोली घाट पर जावद विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार अहीर का कहना है कि किसानों पर अत्याचार की इंतेहा हो गई है. किसान बदलाव का मन बना चुके हैं.

ज़मीन पर खामोशी और कांग्रेस के हमलों के बीच बीजेपी उम्मीदवार विकास को अपना मुद्दा बनाये हुए हैं. जावद विधानसभा सीट से कद्दावर नेता और चौथी बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे पूर्व सीएम स्व. वीरेंद्र कुमार सखलेचा के बेटे ओमप्रकाश सखलेचा राजनगर गांव में जनसम्पर्क कर रहे थे. वे बोले हमने विकास को गाँव तक पहुंचाया है. डिजिटल इंडिया को गांव तक ले गए हैं. बिजली गांव में पहुंचाई है, कांग्रेस किसानों को 60 साल में बिजली, पानी और सड़क नहीं दे सकी.

वहीं मंदसौर विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी यशपाल सिसोदिया दो टूक बोले कि किसान आंदोलन और किसानों का गुस्सा कांग्रेस के दिमाग में है जमीन पर ऐसी कोई बात नहीं.

यदि बड़े नेताओं की बात करें तो फ़ार्म वापसी के बाद चुनाव के इस पहले चरण में कांग्रेस के चुनाव प्रचार समिति के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया यहां दो सभाएं कर चुके हैं. उन्होंने अपने भाषण में कहा जलियावाला बाग़ हत्याकांड के बाद मंदसौर में किसानों की मौत सबसे बड़ा नरसंहार है, जबकि बीजेपी की तरफ से सीएम शिवराज सिंह चौहान मोर्चा सम्भाले हुए हैं. उन्होंने यहां तीन आम सभाएं की और कांग्रेस के हमलों के जवाब में कहा जो काम हमने किसानों के लिए वो कांग्रेस आज तक नहीं कर पाई.

कुल मिलाकर जमीन पर मुकाबला कांटे का है, पर मतदाता चुप हैं और आमतौर पर मतदाताओं की चुप्पी सत्ता पक्ष के खिलाफ मानी जाती है. फिर भी राजनैतिक दलों के दावों की सच्चाई का पता 28 नवम्बर को चलेगा कि वक्त बदलाव का है या नहीं.

यह पढ़ें- एमपी के चुनावी रण में मनमोहन सिंह, 21 नवंबर को इंदौर में करेंगे जनसभा

Tags: Assembly Election 2018, Jyotiraditya Madhavrao Scindia, Kamal nath, Madhya pradesh elections, Madhya pradesh news

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