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new education policy option of easy math paper will be available in 10th kuld

नई शिक्षा नीति: 10 वीं में गणित का आसान व सरल पेपर का विकल्प मिलेगा, कमजोर छात्र भी ला सकेंगे अच्छे अंक

प्रश्नपत्र में अब सब्जेक्टिव-ऑब्जेक्टिव के 40-40% और एनालिटिकल के 20% अंक होंगे. (फाइल फोटो )

प्रश्नपत्र में अब सब्जेक्टिव-ऑब्जेक्टिव के 40-40% और एनालिटिकल के 20% अंक होंगे. (फाइल फोटो )

नई शिक्षा नीति के तहत मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल परीक्षा पद्धति में बदलाव कर रहा है. बोर्ड परीक्षा में छात्र खुद की काबिलियत परखेंगे. सेल्फअसेसमेंट के अंक मिलेंगे.

भोपाल. नई शिक्षा नीति के तहत मध्य प्रदेश में बोर्ड परीक्षा यानी 10 वीं और 12 वीं की परीक्षा के तरीके में बदलाव होगा. 10 वीं में पहली बार गणित के लिए छात्रों को दो प्रश्न पत्र (Question Paper) के विकल्प मिलेंगे. पहला वाला पेपर आसान होगा जबकि दूसरा वाला कठिन. यही नहीं छात्र अपनी काबिलियत सेल्फ असेसमेंट के जरिए खुद तय करेंगे.
मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल (MP Board of Secondary Education) वर्तमान शैक्षणिक सत्र यानी वर्ष 2022-23 से परीक्षा पैटर्न में बड़े फेरबदल कर रहा है. मंडल के सचिव श्रीकांत बनोठ ने बताया कि 10 वीं की परीक्षा में छात्रों को हर विषय के प्रश्नपत्र में बेसिक और स्टैंडर्ड होंगे. बेसिक उनके लिए जो आगे चलकर यह विषय नहीं पढ़ना चाहते हैं. सिर्फ उन्हें बेसिक नॉलेज देने के लिए विषय पढ़ाया जाएगा. जबकि आगे चलकर यानी 11 वीं में गणित, विज्ञान आदि विषयों में ही पढ़ाई करने का इरादा है तो वे स्टैंडर्ड प्रश्न पत्र का विकल्प चुन सकते हैं. हालांकि यह कम्पलसरी नहीं होगा. यानी इस तरह के छात्र भी अच्छे अंक लाने के लिए चाहे तो बेसिक पेपर दे सकते हैं. फिलहाल गणित के लिए 10वीं की बोर्ड परीक्षा में बतौर पायलट प्रोजेक्ट लागू कर दिया है.
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यह होगा फायदा
10 वीं में गणित, विज्ञान जैसे विषयों की वजह से कई छात्रों का मूल्यांकन प्रभावित होता है. सिलेबस में कई ऐसी चीजें शामिल हैं, जिनकी छात्रों को जरूरत नहीं होती है. यह अध्याय सिर्फ भविष्य में गणित पढ़ने वालों के लिए ही उपयोगी है. लिहाजा, अलग-अलग पेपर बनने से छात्रों की पढ़ने में रुचि बढ़ेगी और वे अच्छे अंक ला सकेंगे. रटने की आदत भी घटेगी.
दोबारा परीक्षा भी दे सकेंगे
किसी छात्र ने गणित के लिए बेसिक चुना है और वह परीक्षा पास कर लेता है तो अपने स्तर को सुधारने के लिए एक ओर इम्तिहान देकर अपने स्तर को सुधार सकता है. इस कवायद का मकसद छात्र का गणित में लेवल सुधारना है.
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दोस्त भी देंगे अंक, विदेशी भाषा भी पढ़ सकेंगे
छात्र और उसके दोस्त सेल्फ असेसमेंट कर सकेंगे. साथ ही टीचर भी छात्रों की काबिलियत के हिसाब से अंक देंगे. इसके लिए 25 प्रतिशत अंक रखे गए हैं. वहीं प्रश्नपत्र में अब सब्जेक्टिव-ऑब्जेक्टिव के 40-40%, एनालिटिकल के 20%अंक होंगे. नए पैटर्न में तेलगु, कन्नड़, मलयालम जैसी भाषा जुड़ गई है. वहीं जर्मन, स्पेनिश, फ्रेंच पढ़ने का मौका भी रहेगा. हालांकि इन विषयों के शिक्षकों की भर्ती को लेकर स्थिति साफ नहीं है.
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 सेमेस्टर सिस्टम की हो रही समीक्षा
नई शिक्षा नीति में प्रस्तावित सेमेस्टर मॉडल के लिए मंडल समीक्षा कर रहा है. इसके लिए आतंरिक कमेठी गठित की गई है. अभी तक की समीक्षा के मुताबिक सेमेस्टर सिस्टम लागू करने से परीक्षा खर्च दोगुना हो जाएगा. दसवीं-बारहवीं परीक्षा पर अभी 50 से 60 करोड़ रुपए खर्च होते है. लिहाजा, इस पर बाद में फैसला लिया जाएगा.

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