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New Reaserch: मृत देह के स्पर्म से मिलेगी नई जिंदगी, एम्स भोपाल ने शुरू किया शोध

New Reaserch: मृत देह के स्पर्म से मिलेगी नई जिंदगी, एम्स भोपाल ने शुरू किया शोध

रिसर्च के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किसी युवा पुरुष की मौत के बाद में कब तक स्पर्म जिंदा रहते हैं. (सांकेतिक तस्वीर) Photo-shutterstock

रिसर्च के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किसी युवा पुरुष की मौत के बाद में कब तक स्पर्म जिंदा रहते हैं. (सांकेतिक तस्वीर) Photo-shutterstock

New Reaserch: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने भोपाल एम्स (AIIMS) को मृत शरीर के स्पर्म को डोनेट कर संतानोत्पत्ति पर शोध का काम सौंपा है. ऐसा करने वाला भोपाल एम्स देश का पहला संस्थान है.

    भोपाल. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर, ICMR) ने भोपाल के एम्स (AIIMS Bhopal) को मृत शरीर के स्पर्म (Sperm) को डोनेट कर संतानोत्पत्ति की संभावनाओं पर शोध का काम सौंपा है. इस रिसर्च के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किसी युवा पुरुष की मौत के बाद में कब तक स्पर्म जिंदा रहते हैं.
    शोध में यह पता भी लगाया जाएगा कि क्या स्पर्म को नि:संतान दंपति या मृत पुरूष की पत्नी को डोनेट कर संतानोत्पत्ति संभव है? यदि हां तो यह कैसे संभव होगा? भोपाल एम्स देश का पहला संस्थान होगा, जो इस तरह की रिसर्च करेगा. तीन साल तक चलने वाली इस रिसर्च की रिपोर्ट आईसीएमआर को सौंपी जाएगी. भारत में फिलहाल इस तरह के सवालों पर कोई रिसर्च नहीं हुई है. कुछ वेस्टर्न देशों में इसे लेकर गाइडलाइन बनाई जा चुकी हैं.

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    रिसर्च के लिए मिला 35 लाख रुपए का बजट

    एम्स में इस रिसर्च के लिए फिलहाल तकनीकी उपकरण खरीदी की प्रक्रिया की जा रही है. आईसीएमआर ने 35 लाख रुपए का बजट भी स्वीकृत किया है. आईसीएमआर ने इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2020 में ही मंजूरी दे दी थी, लेकिन कोरोना संक्रमण (Corona) के कारण प्रोजेक्ट जनवरी 2022 में शुरू हो सका है. एफएमटी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राघवेंद्र विदुआ, डॉ. अरनीत अरोरा और एडिशनल प्रोफेसर पैथोलॉजी डॉ. अश्वनि टंडन ने इस पर रिसर्च शुरू कर दी है. इसके लिए दो जूनियर रिसर्च फैलो भी लिए गए हैं.

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    रिसर्च की इसलिए पड़ी जरूरत

    किसी सड़क हादसे में युवा व्यक्ति की जान चली गई, लेकिन परिवार उसी से अपने कुनबे को आगे बढ़ाना चाहता है. ऐसी परिस्थिति में मृत व्यक्ति के स्पर्म की मदद से संतानोत्पत्ति की जा सकेगी. वहीं, रिसर्च के लिए लिक्विड नाइट्रोजन सिलेंडर भी खरीदे जा रहे हैं. इससे वाजिब टेंपरेचर भी पहचाना जाएगा, जिस पर स्पर्म को जीवित और कारगर रखा जा सके. इस प्रोजेक्ट के बाद भोपाल एम्स में स्पर्म बैंक बनाने पर भी योजना बनाई जाएगी.

    Tags: AIIMS, Aiims doctor, AIIMS Study, ICMR

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