पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन को बेहोश कर पहनाया गया रेडियो कॉलर

टाइगर की सुरक्षा खतरे में न हो इसके लिए पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने चंद्रनगर रेंज में बीते 2 बर्ष से अकेले रहवासी क्षेत्र की ओर घूम रही एक बाघिन को पकड़कर रेडियो कॉलर पहनाया है.

Sanjay Tiwari | News18 Madhya Pradesh
Updated: March 16, 2019, 2:55 PM IST
Sanjay Tiwari
Sanjay Tiwari | News18 Madhya Pradesh
Updated: March 16, 2019, 2:55 PM IST
मध्य प्रदेश में पन्ना टाइगर रिजर्व के बहुत से बाघ अपना रहवास छोड़कर इंसानी आबादी की और भाग रहे हैं. इससे उनके जीवन में खतरा पैदा हो गया है. टाइगर की सुरक्षा खतरे में न हो इसके लिए पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने चंद्रनगर रेंज में बीते 2 बर्ष से अकेले रहवासी क्षेत्र की ओर घूम रही एक बाघिन को पकड़कर रेडियो कॉलर पहनाया है. विशेषज्ञों की टीम ने पहले इस बाघिन को बेहोश किया फिर गले में रेडियो कॉलर पहनाया. इससे अब उसकी 24 घंटे निगरानी की जाएगी. इसके लिए विशेष दल भी लगा दिया गया है.

दरअसल, पन्ना टाइगर रिजर्व में 9 साल पहले बाघ पूरी तरह से खत्म हो गए थे. वीरान हो चुके बुंदेलखंड के इस जंगल में टाइगर को फिर से बसाने के लिए दुनिया का पहला सफल प्रयोग भी किया गया, जिसमें बाहर से लाकर 5 टाइगर को छोड़ा गया. इसकी संतान बढ़कर अब 40 हो गई है. यह बाघ अब अपना रहवास छोड़कर बाहरी इलाकों में घुमने लगे हैं, जिससे उनकी जीवन को खतरा पैदा हो गया था.

बहरहाल, टाइगर को रेडियो कॉलर पहनाने के बाद अब उसकी 24 घंटे निगरानी होगी. इससे बाघ की हर मूवमेंट को लगातार देखा जा सकेगा. बता दें कि रेडियो कॉलर से 24 घंटे जीपीएस और पल्स से उसकी निगरानी की जाती है. पूरी जानकारी कंट्रोल रूम में उपलब्ध होती है और एक टीम उसके पीछे निगरानी करती है. ऐसे में अब बाघों की सुरक्षा और सख्त हो गई है.

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First published: March 16, 2019, 1:55 PM IST
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