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पन्ना में एक गांव ऐसा भी जहां अधिक्तर परिवारों में हैं विधवा महिलाएं

DILIP KUMAR | News18 Madhya Pradesh
Updated: April 16, 2018, 5:54 PM IST
पन्ना में एक गांव ऐसा भी जहां अधिक्तर परिवारों में हैं विधवा महिलाएं
मनोर ग्राम के गुड़ियाना टोला की विधवाएं

पन्ना जिले से महज 15 से 20 किलोमीटर दूर बसे मनोर ग्राम के गुड़ियाना टोला की 100 में 80 परिवारों में विधवा महिलाएं हैं. सबसे अनोखी बात तो यह है कि एक ही परिवार में सास बहू और बेटी भी विधवा हैं. वहीं महिलाओं में ऐसी धारणा है कि गांव को ऐसा श्राप है जिसके कारण गांव में मर्दों की जल्दी मृत्यु हो जाती है.

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पन्ना जिला यूं तो पूरे बुंदेलखंड में सबसे पिछड़ा जिला है लेकिन यहां के गांव में जिस तरह के अंधविश्वास और धारणाएं हैं, वह लोगों को हैरानी में डाल देती हैं. यहां एक ऐसा अनोखा गांव है जिसमें अधिकतर महिलाएं विधवा हैं.

दरअसल इस गांव के लोग रोजगार ना होने की वजह से पत्थर खदानों में काम किया करते थे. जिस वजह से उन्हें टीबी और सिलिकोसिस जैसी घातक बीमारियां हो गईं और धीरे-धीरे पुरुषों की मौत होने लगी. इसके चलते लगभग 80% महिलाएं विधवा हो गईं हैं.

अब गांव में अपने अपने पूरे परिवारों की जिम्मेदारी यह विधवा महिलाएं उठा रही हैं.यह महिलाएं जंगल से लकड़ी लाकर और महुआ बीनकर बेचा करती हैं. तब जाकर उन्हें और उनके बच्चों को दो वक्त की रोटी नसीब होती है. अब गांववासी अपनी बच्चियों की शादी करने से भी डरते हैं. उन्हें यह डर सताता है कि कहीं उनकी बच्चियां भी विधवा ना हो जाएं.

वहीं स्वयंसेवियों की माने तो पन्ना जिले में सिलिकोसिष जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए कोई अलग से व्यवस्थाएं नहीं हैं. इस वजह से यहां के लोगों को जबलपुर जाना पड़ता है. गरीब लोगों के पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वो बाहर अपना सही से उपचार करवा पाएँ. इस वजह से गांव में एक एक करके बीमारियों से पीड़ित लोगों की मृत्यु होती गई.

 

 

 

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First published: April 16, 2018, 5:52 PM IST
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