Panna: टाइगर निगल गया हीरे की खदान! जानिए इसके पीछे क्या है राज

पन्ना में टाइगर रिजर्व के चलते हीरे की बड़ी खदान बंद हो गई. (प्रतिकात्मक फोटो)

बेशकीमती हीरों के लिए विख्यात राष्ट्रीय खनिज विकास निगम की एक मात्र हीरा खदान में साल की शुरुआत से काम बंद हो गया. पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र में होने से NMDC को अभी तक वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस नहीं मिला है.

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पन्ना. ‘टाइगर पूरे हीरे की खदान ही निगल गया’. पढ़ने में शायद आपको अजीब लगा हो, लेकिन बात सौ फसदी सही है. दरअसल, बेशकीमती हीरों के लिए विख्यात राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (National Mineral Development Corporation) की एकमात्र हीरा खदान में साल की शुरुआत से काम बंद हो गया. पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र में होने से NMDC को अभी तक वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस नहीं मिला है, जिसकी वजह से खदान में काम रोक देना पड़ा. यानी टाइगर के इलाके में NMDC फिलहाल कोई काम नहीं कर सकती.

पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने हीरा खदान परियोजना के महाप्रबंधक को पत्र जारी कर 1 जनवरी 2021 से उत्खनन पूरी तरह बंद करने के निर्देश दिए थे. इसके चलते यहां काम बंद कर दिया गया. यह खदान पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण्य अंतर्गत वन भूमि रकबा 74.018 हेक्टेयर में संचालित है. इसके संचालन की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2020 को समाप्त हो गई है.

अभी तक 13 लाख कैरेट के हीरे दे चुकी खदान

क्षेत्र संचालक का पत्र मिलने के बाद से ही परियोजना में हड़कंप मचा हुआ है. बता दें कि जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित एशिया महाद्वीप की इकलौती मैकेनाइज्ड एनएमडीसी खदान में वर्ष 1968 से लेकर अब तक लगभग 13 लाख कैरेट हीरों का उत्पादन किया जा चुका है. इस खदान में अभी भी 8.5 लाख कैरेट हीरों का उत्पादन होना शेष है. ऐसी स्थिति में खदान संचालन की अनुमति यदि नहीं मिलती तो अरबों रुपए कीमत के हीरे जमीन के भीतर ही दफन रह जाएंगे. अनुमति की अवधि समाप्त हो जाने के कारण 1 जनवरी 21 से उत्खनन बंद कर दिया गया है.

गांव वाले-कर्मचारी चिंता में डूबे

गौरतलब है कि परियोजना के बंद होने से यहां सैकड़ों कर्मचारी जहां चिंतित हैं, वहीं इस परियोजना से आसपास स्थित ग्रामों के निवासी जिन्हें परियोजना से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं मिलती हैं, वे भी परेशान हैं. जंगल व खनिज संपदा से समृद्ध पन्ना जिले में ऐसी कोई बड़ी परियोजना व उद्योग स्थापित नहीं हुए जिनसे इस पिछड़े जिले के विकास को गति मिलती. यहां पर सिर्फ एनएमडीसी हीरा खनन परियोजना है, जिससे पन्ना की पहचान है.

पन्ना की डायमंड सिटी के रूप में पहचान

इस परियोजना के कारण ही पन्ना शहर को देश व  दुनिया में डायमंड सिटी के रूप में जाना जाता है. यदि परियोजना को पर्यावरण महकमे से उत्खनन की अनुमति नहीं मिली और परियोजना स्थाई रूप से बंद हो जाती है तो हीरों की रायल्टी के रूप में शासन को प्रतिवर्ष मिलने वाले करोड़ों रुपए के राजस्व की जहां हानि होगी, वहीं डायमंड सिटी के रूप में पन्ना की जो पहचान है उस पर भी ग्रहण लग जाएगा.