पन्ना: Mountain Girl गौरी ने माइनस 20 डिग्री में फहराया तिरंगा, ऐसे फतह की केदार कांठा

पन्ना की गौरी ने प्रदेश का नाम रोशन किया है.

पन्ना की गौरी ने प्रदेश का नाम रोशन किया है.

केंदार कांठा करीब 12 हजार 500 फीट की ऊंचाई पर है. यहां पहुंचने के मतलब है पल-पल जोखिम के साथ चलना. जिस वक्त गौरी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया, उस वक्त यहां का तापमान माइनस 20 डिग्री था.

  • Last Updated: January 29, 2021, 5:11 PM IST
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पन्ना. मध्य प्रदेश की बेटी गौरी अरजरिया ने 26 जनवरी को केदार कांठा पर तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान गाया. केंदार कांठा करीब 12 हजार 500 फीट की ऊंचाई पर है. यहां पहुंचने के मतलब है पल-पल जोखिम के साथ चलना. जिस वक्त गौरी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया, उस वक्त यहां का तापमान माइनस 20 डिग्री था.

गौरतलब है कि गौरी जिले के सिमरिया तहसील की रहने वाली हैं. उनके पिता रामकुमार अरजरिया हैं. जानकारी के मुताबिक, गौरी के  साथ इंटरनेशनल एडवेंचर फाउंडेशन ग्रुप के सदस्य भी थे. केदार कांठा  पर जाने के लिए उत्तरप्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ के ग्रुप भी शामिल थे, लेकिन गौरी और उनके साथी सबसे पहले सुबह 5 बजे यहां पहुंच गए. उन्हें प्रथम स्थान मिला.

ये है माउंटेन गर्ल का सपना

पर्वतारोही गौरी का सपना माउंट एवरेस्ट फतह करना है. गौरी ने बताया कि उन्होंने इस तरह की चढ़ाई की बहुत पहले से तैयारी कर रखी थी. सबसे पहले उन्होंने सिमरिया में रहकर तैयीर की, फिर उसके बाद वर्ष 2019 में बेसिक माउंट कोर्स किया. इसी दौरान रेन ऑफ पीक करीब सत्रह हजार फीट ऊंचाई पार  की.
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ये है केदारकंठ की कहानी

उत्तराखंड में हिमालय की एक पर्वतचोटी है केदारकांठा. इसे केदारकंठ भी कहते हैं. इसकी ऊंचाई 12,500 फीट है. केदारकांठा उत्तरकाशी जिले में गोविंद वन्यजीव अभयारण्य के अंदर है. वैसे तो केदारकांठा को लेकर बहुत सारी मान्यताएं हैं. लेकिन, जिसकी बात सबसे ज्यादा होती है वो ये है कि यह मूल केदारनाथ मंदिर था. दरअसल भगवान शिव हिमालय में रहते थे. पहाड़ों में कई शिव प्राचीन शिव मंदिर हैं और उनका मिथ महाभारत से जुड़ा हुआ है. महाभारत युद्ध के बाद पांडव भगवान शिव से आशीर्वाद लेने के लिए हिमालय गए. लेकिन भगवान शिव उनसे मिलने नहीं आए. बल्कि उन्होंने भैंस का भेष धारण किया और पांडवों को गुमराह करने लगे. तभी भैंसों के झुंड को देखकर भीम ने एक चाल चली. वह दो चट्टानों पर पैर फैलाकर खड़े हो गए. सभी भैंस भीम के नीचे से गुजरने लगीं. लेकिन एक भैंस ने भीम के पैरों के नीचे से निकलने से मना कर दिया और इसके बाद दोनों में युद्ध होने लगा.



भीम ने भैंस को टुकड़ों में बांट दिया. जिस स्थान पर ये टुकड़े गिरे पांडवों ने बाद में पूजा करने के लिए वहां पर शिव मंदिरों का निर्माण किया. लोकल किवदंतियों के अनुसार, जब ये मंदिर बन रहा था तो यही असली केदारनाथ मंदिर होने वाला था लेकिन जब मंदिर बन रहा था तभी अचानक गाय की आवाज आ गई. शांति भंग होने के डर से भगवान शिव वहां से चले गए और केदारनाथ जाकर बस गए.
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