हलछट महोत्सव: अनूठी है पन्ना के इस खूबसूरत मंदिर की विरासत
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हलछट महोत्सव: अनूठी है पन्ना के इस खूबसूरत मंदिर की विरासत
मंदिरो, हीरों और झीलों की नगरी से जाना जाने वाला, चारो ओर से घने जंगल और पहाड़ियों से घिरा मध्य प्रदेश का पवित्र नगर पन्ना में इन दिनों हलछट महोत्सव को लेकर जन-जन मे उत्सुकता और उत्साह है.

मंदिरो, हीरों और झीलों की नगरी से जाना जाने वाला, चारो ओर से घने जंगल और पहाड़ियों से घिरा मध्य प्रदेश का पवित्र नगर पन्ना में इन दिनों हलछट महोत्सव को लेकर जन-जन मे उत्सुकता और उत्साह है.

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मंदिरो, हीरों और झीलों की नगरी से जाना जाने वाला, चारो ओर से घने जंगल और पहाड़ियों से घिरा मध्य प्रदेश का पवित्र नगर पन्ना में इन दिनों हलछट महोत्सव को लेकर जन-जन मे उत्सुकता और उत्साह है.
पवित्र नगर पन्ना मे विश्व के अद्वितीय मंदिर हैं जिनमे मुख्य रूप से श्री पद्मावती देवी जी मंदिर, श्री जुगल किशोर जी मंदिर, श्री प्राणनाथ जी मंदिर, श्री बल्देव जी मंदिर, श्री जगन्नाथ स्वामी जी मंदिर, श्रीराम जानकी मंदिर एंव श्री गोविंद जी मंदिर सहित सैकड़ो मंदिर स्थापित हैं.

ये सभी मंदिर रियासत कालीन राजा महाराजाओ के द्वारा बड़ी ही धार्मिक आस्था के साथ बनवाये गये. पन्ना मे स्थित विश्व प्रसिद्व अद्वितीय संरचना से स्थापित श्री बल्देव जी के मंदिर मे हलछट महोत्सव का प्रतिवर्ष आयोजन किया जाता है पन्ना जिले मे इस महोत्सव का एक अलग ही महत्व रहता है.

श्री बल्देव जी मंदिर की संरचना का मंदिर पूरे विश्व मे कहीं और नही है. यह अपने आप में एक मात्र अनूठा मंदिर है. यह मंदिर 16 कलाओ से परिपूर्ण है, जिसमे प्रवेश द्वार मे 16 सीढियां, अंदर प्रवेश करने पर 16 विशाल पिलर एंव 16 दरवाजे और मंदिर के ऊपर 16 गुम्बद हैं. इसके साथ-साथ 16 खिडकियां बनी हुई हैं.
पन्ना के महाराजा रूद्र प्रताप सिंह वृन्दावन गए थे तो वहां कि प्रकृति बहुत ही ज्यादा फूली-फली थी. वे अपने साथ अपार धन सम्पदा लेकर गये थे जो उन्होने वहां के ब्राम्हणों को दान मे दिया और इस मंदिर का निर्माण सन् 1876 मे कराया गया.



हलछठ महोत्सव मे भगवान श्री बल्देव जी का जन्मोत्सव बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है. जिसमे दूर-दूर से हजारों की संख्या मे श्रद्धालू बड़े ही भक्ति भाव से इस कार्यक्रम मे शामिल होते हैं. भगवान बल्देव जी ने आकाल के समय स्वंय कृषि कार्य करके किसानो को खेती करने का मार्ग दिखाया. साथ ही इस दिन महिलाएं अपने पुत्र प्रप्ति के लिये हलछठ का व्रत रखती हैं. मंदिर मे दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं मे अलग ही प्रकार की आस्था देखने को मिलती है.

प्रदेश की जेल मंदिर सुश्री कुसुम सिंह महदेले भी भगवान श्री बल्देव जी के दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंची.

मंदिर के पुजारी की माने तो पन्ना मे रियासत कालीन महेन्द्र महाराजा रूद्र प्रताप सिंह बड़े ही धार्मिक प्रवृत्ति के महाराजा थे जिन्होने संवत 1933 यानी सन् 1876 मे इस भव्य और अद्वितीय मंदिर का निर्माण कराया था जो भक्तों की अनन्य आस्था का केन्द्र है.

ऐसा भी कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण के लिये इटली से इंजीनियरो को मंदिर की डिजाइन करने के लिये पन्ना बुलाया गया था. भारत ही नही बल्कि विश्व मे यह मंदिर अद्वितीय है. यहां भगवान बल्देव जी की प्रतिमा सालिगराम पत्थर से निर्मित है.
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