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पुलवामा हमला- MP में यहां रोज होती है शहीद की पूजा, नहीं भरा बेटे की मौत का घाव

खुड़ावल में शहीद अश्विनी की मौत का घाव अभी तक नहीं भरा है.

खुड़ावल में शहीद अश्विनी की मौत का घाव अभी तक नहीं भरा है.

खुड़ावल के शहीद अश्विनी की परिवार रोज पूरा करता है. घर के लोग भगवान की तरह बकायदा उसकी आरती करते हैं. अश्विनी पुलवामा हमले में आतंकियों का शिकार हो गए थे.

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जबलपुर. 45 वीर जवानों की शहादत वाले पुलवामा हादसे के 2 साल पूरे हो गए हैं. 14 फरवरी 2019 की वो काली तरीख भुलाए न भूली जा सकेगी. जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित पुलवामा मे हुए आत्मघाति हमले मे जवानों से भरे वाहन पर फिदायीन हमला किया गया और 45 जवान इस हादसे मे शहीद हो गए. दिल को झकझोर देने वाली इस वारदात मे मध्यप्रदेश का भी एक वीर सपूत था जो वतन के नाम शहादत को नसीब हुआ.

खुड़ावल गांव की धरती वीरों की धरती है. क्योंकि, यहां आने वाले हर दसवें घर में एक जवान पैदा होता है, जो देश के लिए मर-मिटने को तैयार है. जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले में शहीद हुआ अश्विनी इस गांव का तीसरा वीर सपूत है, जिसने इस देश की सेवा करते हुए अपने प्राण गवांए. अश्विनी अब इस दुनिया मे भले न हों लेकिन जाने से पहले अपने इस छोटे से गांव का गौरव बढ़ाकर गए. अश्विनी को गए आज पूरे 2 साल हो गए. इस बीच परिजन हर पल उसकी याद में गमगीन रहे. शहीद अश्विनी के पिता सुकरू काछी ने न्यूज 18 से खास बातचीत करते हुए अपने दर्द को बयां किया. उनके मुताबिक उनके दिल पर बेटे की मौत का घाव कभी नहीं भर सकता.

बेटा बिछड़ गया, लेकिन पिता को फलक पर बैठा गया

अश्विनी के पिता के मुताबिक सेना मे भर्ती होने के पहले वह कड़ी मेहनत करता था. एक बार सेना मे भर्ती के लिए वह मेडीकल फिटनेस मे फेल भी हो गया. लेकिन, उन्होंने अश्विनी को कभी न हारने की सलाह दी. नतीजा ये हुआ कि 2017 मे वह सेना मे भर्ती हो ही गया. एक पल ऐसा भी आया जब अश्विनी हिम्मत हार गया था, लेकिन उन्होंने उसके हौंसले को बढ़ाया था. शहीद के पिता के मुताबिक आज उनका बेटा अश्विनी उनसे बिछड़ गया, लेकिन उन्हें वो इज्जत दे गया जो शायद उन्हें कभी नही मिल सकती थी.

यहां परिवार करता है बेटे की पूजा

अश्विनी के घर मे अब एक छोटा सा मंदिर भी है. यहां भगवान नहीं विराजे, बल्कि खुद अश्विनी इस मंदिर मे पूजे जाते हैं. घर की बच्चियों ने शहीद अश्विनी की याद में इस मंदिर मे वो तमाम चीजें सहेज कर रखी हैं जिनसे अश्विनी की यादें जुड़ी थीं. यहां तक कि अश्विनी की वर्दी और जिस तिरंगे मे लिपटकर उनका पार्थिव शरीर यहां लाया गया था, उसे भी संभालकर रखा गया है.

गांव के 100 से ज्यादा जवान कर चुके देश की सेवा

3 हजार की आबादी वाले इस छोटे से गांव में अब 100 से ज्यादा जवान सेना में अपनी सेवाए दे चुके हैं. जबकि, वर्तमान मे करीब 30 जवान देश की सीमा पर तैनात हैं. अश्विनी के जाने के पहले इसी गांव के दो और जवान शहीद हो चुके हैं. 2016 में गांव के शहीद रामेश्वर लाल जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा मे शहीद हुए थे. जबकि 2006 मे राजेन्द्र प्रसाद बालाघाट मे नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान वीर गति को प्राप्त हुए थे. 2019 मे अश्विनी काछी पुलवामा आतंकी हमले मे शहीद हुए.

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